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Hindi News ›   Education ›   16-Year-Old Disha Ubale Writes SSC Exam While Father’s Funeral Takes Place, Inspires with Her Determination

Board Exam 2025: पिता की चिता जल रही थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी; खुद को संभाला और दी बोर्ड परीक्षा

Sat, 22 Feb 2025 07:59 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Sat, 22 Feb 2025 07:59 PM IST
सार

Board Exam 2025: पिता की मृत्यु के बावजूद, 16 वर्षीय दिशा नागनाथ उबाले ने हिम्मत नहीं हारी और एसएससी परीक्षा में मराठी का पेपर दिया। शिक्षकों के समर्थन से उन्होंने खुद को संभाला और औसा के अजीम हाई स्कूल में परीक्षा दी।
 

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16-Year-Old Disha Ubale Writes SSC Exam While Father’s Funeral Takes Place, Inspires with Her Determination
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Latur: महाराष्ट्र के लातूर जिले की 16 वर्षीय दिशा नागनाथ उबाले ने ऐसी मिसाल पेश की, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है। पिता की मृत्यु के गहरे सदमे के बावजूद, उन्होंने अपनी एसएससी (कक्षा 10वीं) परीक्षा में मराठी का पेपर दिया और मजबूत आत्मविश्वास का परिचय दिया।

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गुरुवार शाम को बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद दिशा के पिता का निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार की रस्में अगले दिन शुक्रवार को भादा गांव में आयोजित की जानी थीं। इस कठिन परिस्थिति में, दिशा दुविधा में थीं कि वह परीक्षा दे भी पाएंगी या नहीं।

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शिक्षकों ने बढ़ाया हौसला, दी हिम्मत

दिशा के शिक्षक शिवलिंग नागापुरे ने उनके इस संघर्षपूर्ण समय में सहारा दिया। नागापुरे ने लातूर डिवीजनल बोर्ड के अध्यक्ष सुधाकर तेलंग से संपर्क किया और उन्हें दिशा की स्थिति से अवगत कराया। तेलंग ने दिशा से स्वयं बात की और उन्हें परीक्षा न छोड़ने के लिए प्रेरित किया।

दिशा ने अपने आंसू पोछे, खुद को संभाला और पिता को अंतिम विदाई देकर औसा के अजीम हाई स्कूल में परीक्षा देने के लिए निकल पड़ीं। जब वह परीक्षा हॉल में उत्तर लिख रही थीं, उसी समय भादा गांव में उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जा रहा था।

परिवार और गांववालों को है गर्व

दिशा के परिवार में उनकी दादी, मां और छोटा भाई हैं। पूरे गांव को दिशा पर गर्व है, जिन्होंने इस कठिन समय में भी अपनी शिक्षा को प्राथमिकता दी।

भादा गांव के निवासी प्रेमनाथ लाटूरे ने बताया कि जब दिशा औसा में परीक्षा दे रही थी, तब उनके पिता की अंतिम क्रियाएं गांव में पूरी की जा रही थीं। उनकी यह हिम्मत न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते।

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