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Delhi: सीजेपी का साथ देने परिजनों से झूठ बोलकर दूर-दराज से पहुंचीं युवतियां, कार्यकर्ताओं से संपर्क कर पहुंचीं
Tue, 21 Jul 2026 05:09 AM IST
Digvijay Singh
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 21 Jul 2026 05:09 AM IST
सार
सोमवार सुबह घर से निकलने से पहले 17 वर्षीय अंशिका ने अपने परिवार को बताया था कि वह स्कूल जा रही है, लेकिन वह परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मसले पर सीजेपी के विरोध मार्च में शामिल होने के लिए मध्य दिल्ली पहुंच गई।
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जंतर मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए युवतियां देश के कोने-कोने से दिल्ली पहुंची। अधिकतर ने परिजनों से झूठ बोलकर दिल्ली की राह पकड़ी। इन लोगों ने यहां आने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और अपने-अपने नेटवर्क का सहारा लिया। सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल कई लोगों के मुद्दे सीजेपी की मांगों से अलग रहे। इनमें से कोई जम्मू में 370 के खिलाफ तो कोई पुलिस की बर्बरता की शिकायत लेकर यहां पहुंचा। प्रदर्शन में शामिल युवतियां काफी गुस्से में नजर आईं।
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सोमवार सुबह घर से निकलने से पहले 17 वर्षीय अंशिका ने अपने परिवार को बताया था कि वह स्कूल जा रही है, लेकिन वह परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मसले पर सीजेपी के विरोध मार्च में शामिल होने के लिए मध्य दिल्ली पहुंच गई। संसद की ओर मार्च के दौरान जब वह और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ अवरोधकों पर चढ़ने लगी तो महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें नीचे खींच लिया। दिल्ली के बदरपुर की रहने वाली अंशिका ने हाथ पर आए खरोंच के निशान दिखाते हुए कहा कि हम अपने परिवारों से झूठ बोलकर यहां इसलिए नहीं आए थे कि हमें अपराधियों की तरह उठाया जाए और हिरासत में लिया जाए।
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अंशिका ने कहा कि जब चुनाव होता है, तो वे हमारे घरों पर वोट मांगने आते हैं लेकिन नीट पर्चा लीक होने पर कोई बातचीत के लिए आगे नहीं आया। अंशिका ने सवाल किया, हम केवल बातचीत की मांग कर रहे हैं। क्या हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की भी अनुमति नहीं है। कुछ महिला प्रदर्शनकारी पूरी तैयारी के साथ आई थीं। पुलिस हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके क्या-क्या कानूनी अधिकार होते हैं, उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी थी। बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों की महिलाएं इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। इनमें से कई महिलाओं ने समूहों में दिल्ली की यात्रा की। अपने-अपने नेटवर्क के जरिये एक दूसरे से संपर्क बनाए रखा।प्रदर्शनकारियों के अनुसार, समलैंगिक और ट्रांसजेंडर प्रतिभागियों को अलग-अलग संपर्क नेटवर्क प्रदान किए गए थे। पूर्वा ने कहा कि हम सभी ने पुणे से रात भर बस से एक साथ यात्रा की। हम व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में आए और फैसला किया कि दिल्ली पहुंचने के बाद हम कहां मिलेंगे।
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बिहार के वैशाली की रहने वाली 20 वर्षीय किस्मत ने इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पटना से दिल्ली तक रात भर अकेले यात्रा की। उन्होंने कहा, मैंने अपने परिवार से झूठ बोला और यहां आई क्योंकि नहीं तो वे मेरी सुरक्षा को लेकर चिंता करते। दिल्ली पहुंचने के बाद किस्मत अकेली नहीं थीं। फरीदाबाद के छात्रों के एक समूह की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनसे जंतर-मंतर पर मिली थीं और उनके साथ मार्च कर रही थीं।
अपने बेटे और बेटी के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं शोभा ने दावा किया कि उन्होंने झड़प के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों को महिलाओं को पीटते देखा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने खुद अवरोधकों को धक्का दिया और जब लोग आगे बढ़े, तो उन्होंने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। पुरुष पुलिसकर्मियों को एक महिला को पीटते देखा।