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दिल्ली दंगों के दो साल : अंकित को याद कर आज भी छलक आते हैं आंसू

Thu, 24 Feb 2022 04:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 24 Feb 2022 04:43 AM IST
सार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों से राजधानी ही नहीं पूरा देश सिहर उठा था। सीएए और एनआरसी के विरोध में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 583 जख्मी हुए थे। मरने वालों में आईबी और दिल्ली पुलिस के हवलदार भी शामिल थे। दंगाइयों ने शाहदरा जिले के तत्कालीन पुलिस उपायुक्त अमित शर्मा पर भी जानलेवा हमला कर दिया था। दंगे के बाद उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस ने 758 एफआईआर दर्ज कर 1949 लोगों को गिरफ्तार किया गया था...
 

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What are the conditions after 2 years of riots in Delhi, the victims are telling
दो साल पहले दंगों में झुलस रहा था जाफराबाद का ये इलाका.... आज सुकून है और जिंदगी पटरी पर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दो साल पहले 23 से 26 फरवरी के बीच हुए दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी, जबकि काफी लोग जख्मी हो गए थे। मृतकों में आईबी के जवान अंकित शर्मा (25) भी शामिल थे। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वह ड्यूटी कर रहे थे। हादसे के दो साल बाद भी अंकित के परिजनों के जख्म ताजा हैं। अंकित को याद करते हुए माता-पिता की आंखों से आंसू बहने लगते हैं। घटना के कुछ ही दिन बाद परिवार ने उनकी यादों को भुलाने के लिए खजूरी खास का अपना मकान छोड़ दिया था। अंकित का परिवार अब गाजियाबाद में किराए के मकान में रह रहा है।

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अंकित के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने बताया कि पहले परिवार गली नंबर-6, खजूरी खास में रहता था। परिवार में पिता रविंदर कुमार, मां सुधा, एक बहन सोनम शर्मा है। दोनों भाई-बहन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अंकुर ने बताया कि जिस जगह से भाई की यादें जुड़ी थीं, उस जगह को छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ा। मां और पिता दोनों ही दिल के मरीज हैं। भाई की यादों को भुलाने के लिए परिवार ने खजूरी के मकान को छोड़ने का फैसला लिया था। 
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मुआवजा मिला पर नौकरी नहीं
अंकित शर्मा ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे। गृहमंत्री अमित शाह ने पत्र लिखकर परिवार से संवेदनाएं भी जताई थीं। घटना के बाद दिल्ली सरकार ने परिवार को मुआवजा देने और एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही थी। मुआवजा तो मिल गया पर नौकरी अब तक नहीं मिली। अंकुर ने बताया कि 26 मार्च 2021 को दिल्ली सरकार के कैबिनेट ने उसको ग्रेड-2 की नौकरी देने की मंजूरी दे दी थी। लेकिन 11 माह बाद भी मामला फाइलों में अटका है।
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गांव में शहीद के नाम पर सड़क व गेट
अंकित शर्मा का परिवार यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित इटावा गांव का रहने वाला है। अंकित के शहीद होने के बाद केंद्र सरकार ने उसे शहीद का दर्जा देने के अलावा उनके नाम पर एक सड़क बनाने का एलान किया था। वादे के मुताबिक सरकार ने उनके गांव इटावा से गांव धनौरा तक बनी सड़क का नाम अंकित के नाम पर रखा।  इसके अलाव गांव का द्वार भी शहीद अंकित शर्मा के नाम से बना दिया गया है। गांव में उनकी प्रतिमा भी लगाई गई है।

दोषियों को मिले फांसी की सजा : परिवार
अंकित के मौत के बाद वादा किया गया था कि उनकी हत्या के आरोपियों को जल्द ही कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी। लेकिन दो साल बीत जाने के बाद आज भी मामले की सुनवाई जारी है। अंकुर कहते हैं कि भगवान ऐसा किसी भी परिवार के साथ न करे। परिवार ने मांग की है कि उनको जल्द से जल्द न्याय दिलवाया जाए और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए।
 

अब तो बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज पा रही हूं..., भर्राई आवाज में इमराना ने बताया

What are the conditions after 2 years of riots in Delhi, the victims are telling
कुछ दर्दनाक यादें... - फोटो : AmarUjala

पथराई हुई आंखों से इमराना ने बताया कि सर अब तो बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज पा रही हूं...। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगाइयों ने इमराना के पति मोहम्मद मुद्दसिर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के समय मुद्दसिर बच्चों की फीस जमा करने के लिए मौजपुर स्थित नेशनल विक्टर और क्रिसेंट स्कूल गए थे। कर्दमपुरी की पुलिया पर किसी ने उनके सिर में गोली मार दी। इमराना ने बताया कि पति का सारा कारोबार खत्म हो गया। सरकार की ओर से मिली
आर्थिक सहायता से उन्होंने एक दुकान भी खोली थी, लेकिन सामान न होने के कारण वह भी बंद हो गई।

इमराना (35) ने भर्राई हुई आवाज में बताया कि उसके पति मुद्दसिर का प्लास्टिक स्क्रेप का कारोबार था। घर में खुशहाली थी। बच्चे भी अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे थे। अचानक जिंदगी में ऐसा मोड़ गया कि जिंदगी लगभग खत्म हो गई। अब तो वह किसी तरह बच्चों के लिए जी रही है। परिवार में देवर और जेठ हैं। देवर ने पति का काम संभाल लिया था, देवर बस गुजारे भर के रुपये देता है। कभी-कभार एक एनजीओ से थोड़ी मदद मिल जाती है। इमराना की आठ में तीन ही बेटी स्कूल जा पा रही हैं। अब इमराना को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। इमराना ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।

आज तक नहीं उठ पाई बेटी की डोली
दंगों के कारण कई लोगों का कारोबार भी प्रभावित हो गया। दंगाइयों ने करावल नगर रोड पर फल कारोबारी गणेश गुप्ता का गोदाम लूटने के बाद गोदाम और मकान में आग लगा दी थी। इससे उनको करीब 20 लाख का नुकसान हुआ था। बेटी की शादी होने ही वाली थी, लेकिन आर्थिक नुकसान की वजह से शादी ऐसी टली कि आज तक नहीं बात बनी है। निराश होकर गणेश ने बताया कि सरकार की ओर से मिला मुआवजा भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही था। 20 लाख के नुकसान का आकलन डेढ़ लाख रुपये कर उनके बस यही रकम दी गई थी।

गणेश गुप्ता ने बताया कि वह परिवार के साथ करावल नगर रोड, मजार के सामने फल मार्केट में रहते हैं। ग्राउंड फ्लोर पर उनका फलों का गोदाम था और ऊपर वह परिवार के साथ रहते थे। उनका मंडी से फलों के होलसेल का काम था। छोटे कारोबारी उनसे फल खरीदकर ले जाते थे। दंगाइयों ने बलवा किया तो उन्होंने परिवार समेत भागकर जान बचाई। जब वह वापस आए तो सब कुछ खत्म हो चुका था। गोदाम और ऊपर मकान को आग के हवाले कर दिया गया था। किसी तरह कर्ज लेकर काम को दोबारा शुरू करने का प्रयास किया तो कोरोना और लॉकडाउन की वजह से और नुकसान हो गया।

भाईचारा कायम करने के दिल्ली पुलिस ने उठाए यह कदम... : जिला पुलिस उपायुक्त संजय कुमार सैन ने बताया कि जिले में भाईचारा कायम करने के लिए मार्च 2021 में जिलास्तर पर नागरिक भाईचारा समिति का गठन किया गया। इसमें दोनों समुदायों के गणमान्य लोगों को शामिल किया गया।  समय-समय पर बैठक की जाती है। दोनों समुदायों को एक साथ बुलाकर उनके लिए कई प्रतियोगिताएं कराई गई। पिछले साल 18 अगस्त को जिले में उम्मीद के नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें पहला-दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने वालों बच्चों को शहीद हवलदार रतनलाल के नाम से अवार्ड दिया गया।

जल उठी थी  उत्तर-पूर्वी दिल्ली, 53 ने गंवाई थी जान
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगें में 53 लोगों की मौत हो गई। 62 मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। इनमें अधिकतर हत्या के मामले शामिल हैं। लोकल पुलिस 695 केसों की जांच कर रही है। दंगों के दो साल बाद भी आज तक बस दो ही मामलों (सोनिया विहार और गोकुलपरी थाने में दर्ज) दोषियों को सजा सुनाई गई है।

 वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दंगों के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम को लगभग 16 हजार पीसीआर कॉल मिली थी। तीन दिन तक चले दंगों के बाद धीरे-धीरे लोगों ने शिकायतें दी थीं। पुलिस ने हर शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। सबसे अधिक खजूरी खास में 153 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद भजनपुरा में 137, गोकुलपुरी 119, करावल नगर में 91, जाफराबाद में 81, दयालपुर में 77, ज्योति नगर में 35, वेलकम 26, न्यू उस्मानपुर 24, शास्त्री पार्क 10 और सोनिया विहार में पांच एफआईआर दर्ज की गई थीं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस की ओर से अब तक कुल 367 मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। ब्यूरो

अब तक 1949 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
दिल्ली दंगों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों को मामले में गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत है। पुलिस ने मामले में अब तक 1949 लोगों को गिरफ्तार है।

इन तकनीकों का लिया गया सहारा...

  • इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल्स रिकॉर्ड का सहारा लेकर पुलिस ने कई आरोपियों को पहचान की। मोबाइल प्रदाता कंपनियों की मदद से आरोपियों को धरा गया।
  • वीडियो, सीसीटीवी और दंगे की फोटो के आधार पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से दंगाइयों की पहचान कर बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करके आरोपियों की पहचान कर उनको दबोचा गया।
  • जियो लोकेशन की मदद से दंगा कर रहे लोगों को उनके मौजूद रहने का पता लगाया गया।
  • ड्रोन मैपिंग और क्राइम सीन को रिक्रिएट करके आरोपियों की पहचान की गई।
  • डीएनए, फिंगर प्रिंट व दूसरे फॉरेंसिक साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की हुई पहचान।
  • दंगाइयों के वाहनों के नंबर पर ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की मदद से आरोपियों की पहचान की।
  • एफएसएल की टीम ने भी मौके से मिले वीडियो व सीसीटीवी को फिल्टर आरोपियों को पहचाना।
  • डंप डाटा के आधार पर पुलिस ने करीब 10 हजार नंबरों की जांच के बाद आरोपियों को पहचाना।
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