प्रदूषण पर वार: अगले सप्ताह से तैयार होगा 'विंटर एक्शन प्लान', दिल्ली का पड़ोसी राज्यों से भी लागू करने का आह्वान
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की समस्या के समाधान और दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की जाएगी।
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दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए अगले सप्ताह से विंटर एक्शन प्लान तैयारी करेगी। साथ ही पराली की समस्या को लेकर सरकार की वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की भी तैयारी है। सरकार प्रदूषण पर रोकथाम के लिए केंद्र से संयुक्त कार्य योजना बनाने की मांग करेगी।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की समस्या के समाधान और दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात की जाएगी। यदि केंद्र सरकार के माध्यम से सभी राज्यों का सहयोग मिलता है, तो दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत को प्रदूषण से मुक्ति दिलाना आसान हो जाएगा।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पराली को गलाने के लिए पिछले साल सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट के माध्यम से खेतों में बॉयो डी-कंपोजर का छिड़काव किया था, जिसका परिणाम सकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को बॉयो डी-कंपोजर को लेकर पहल शुरू कर देनी चाहिए, ताकि पराली की समस्या से निजात पाया जा सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ने के लिए अगले सप्ताह से विंटर एक्शन प्लान तैयार करने जा रही है।
मंत्री ने कहा कि ठंड के मौसम में प्रदूषण बढने के बहुत से कारण हैं, जिसमें वाहन प्रदूषण और धूल प्रदूषण आदि शामिल हैं, लेकिन ठंड के समय प्रदूषण बढने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारण पराली है। ठंड के समय पराली के जलने से उसके धुएं से काफी प्रदूषण पैदा होता है। पिछले कई सालों से पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर लगातार चर्चा हो रही है। केंद्र सरकार भी इस पर चर्चा करती रहती है, लेकिन इसका समाधान निकल कर नहीं आ रहा।
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पिछले साल दिल्ली सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट के माध्यम से बॉयो डी-कंपोजर का छिड़काव खेतों में किया था। सरकार चाहती है कि दिल्ली के आसपास पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारें अभी से बॉयो डी-कंपोजर को लेकर पहल शुरू करें, जिससे इस बार ठंड के मौसम में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की समस्या से निजात पाया जा सके। पिछले साल सरकार ने जो प्रयोग किए, उसको लेकर सरकार ने राष्ट्रीय आयोग में भी अपनी बात रखी थी।
अब उसको गति देने के लिए दिल्ली सरकार का एक प्रतिनिधि मंडल जल्द ही केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ-साथ राष्ट्रीय आयोग से भी मुलाकात करेगा। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। इन कार्यों को भी सरकार आयोग के सामने रखना चाहती है। इसमें रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ कैंपेन शामिल है। यह कैंपेन सभी राज्यों में चलाया जा सकता है।
दिल्ली के अंदर धूल का प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने एंटी डस्ट कैंपेन चलाया, यह कैंपेन भी सभी राज्यों में चलाने की जरूत है। दिल्ली के अंदर इस पूरे अभियान के लिए केंद्रीकृत वाररूम बनाया है, जिससे ग्रीन वाररूम से सारी चीजों की निगरानी करते हैं। इस पर भी सरकार चर्चा करना चाहती है। जिससे कि सभी राज्यों के साथ एक संयुक्त कार्य योजना (ज्वाइंट एक्शन प्लान) बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जल्द ही केंद्र सरकार के साथ बैठक कर अपने सभी बिंदुओं को रखेंगे और चाहेंगे कि केंद्र सरकार से सहयोग मिले, जिससे कि इस लड़ाई को आगे बढ़ाया जा सके।
आम आदमी पार्टी (आप) के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने वायु प्रदूषण को लेकर पड़ोसी राज्यों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने इन राज्यों की योजना को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग के मुताबिक, कोरोना की संभावित तीसरी लहर के समय पराली से प्रदूषण हुआ तो बेहद विनाशक होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की सभी तैयारियां सिर्फ कागज पर हैं। इससे दिल्लीवालों की सेहत को बड़ा नुक़सान हो सकता है। उन्होंने कहा कि एजेंसी सफर के मुताबिक, दिल्ली में करीब 45 फीसदी प्रदूषण पड़ोसी राज्यों की पराली जलने से होगा। उन्होंने कहा कि आयोग का अवलोकन है कि राज्यों ने कोई प्लान नहीं दिया है। सिर्फ कागजी कार्रवाई की है। आयोग ने कहा है कि पंजाब के अंदर बायोमास प्लांट बनाए गए हैं, लेकिन वे अभी चालू नहीं किए गए हैं।