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अध्ययन: कोरोना के हल्के मरीजों में एम्स का वॉक टेस्ट हुआ फेल, नहीं मिला असर

Thu, 07 Oct 2021 01:15 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 07 Oct 2021 01:15 AM IST
सार

एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष जब महामारी की शुरुआत हुई तो कोरोना संक्रमण को शुरुआती स्थिति में पहचाने और यह पता करने कि किस मरीज में बीमारी गंभीर हो रही है? इसका विकल्प नहीं था।

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walk test failed in mild corona patients aiims doctors did not get effect
कोरोना मरीज (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मरीज में कोरोना संक्रमण की गंभीरता का पता लगाने के लिए पिछले कई महीनों से वॉक टेस्ट को लेकर बहस चली आ रही थी जिसे पहली बार नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने चिकित्सीय अध्ययन के जरिए वैज्ञानिक तथ्यों के साथ सामने लाया है। इसके अनुसार कोरोना के हल्के मरीजों पर वॉक टेस्ट का कोई असर नहीं मिला है। 

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एम्स के ही आइसोलेशन वार्ड में स्थित कॉरिडोर में मरीजों को तीन मिनट और छह मिनट के लिए एक से दूसरे छोर तक टहलने के लिए कहा गया था। अस्पताल में भर्ती से डिस्चार्ज होने तक डॉक्टरों ने प्रतिदिन वॉक टेस्ट की रीडिंग को नोट किया और उसके बाद निष्कर्ष निकाला है। 
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मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशन से पूर्व समीक्षात्मक इस अध्ययन को लेकर एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष जब महामारी की शुरुआत हुई तो कोरोना संक्रमण को शुरुआती स्थिति में पहचाने और यह पता करने कि किस मरीज में बीमारी गंभीर हो रही है? इसका विकल्प नहीं था। कुछ विशेषज्ञों ने वॉक टेस्ट की सलाह दी थी जिसे अब तक कार्डियो पल्मोनरी में किया जाता है। इसी का पता लगाने के लिए कोरोना संक्रमित 50 रोगियों का चयन किया गया जिनमें संक्रमण का असर हल्का था। इनमें से 68 फीसदी मरीजों में संक्रमण से पहले कोई बीमारी नहीं थी। 
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डॉ. कुमार ने बताया कि आइसोलेशन वार्ड के बाहर करीब 25 मीटर लंबा कॉरिडोर है। जहां तीन और छह मिनट के लिए मरीजों को टहलाया था। इस अध्ययन में हमें पता चला है कि वॉक टेस्ट के जरिए मरीज में संक्रमण का गंभीरता की ओर बढ़ने की जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। हालांकि अध्ययन में यह जरूर पता चला है कि अस्पताल में भर्ती होने के करीब छह दिन बाद मरीज की रिकवरी होने लगती है। कोविड-19 संक्रमण और वॉक टेस्ट के बारे में और अधिक जानकारी लेने के लिए एक बड़े स्तर पर अध्ययन की आवश्यकता है। फिलहाल इस टेस्ट के आधार पर संक्रमित मरीज की स्थिति गंभीर होने की आशंका व्यक्त नहीं की जा सकती। 


दो मरीजों में टेस्ट हुआ फेल
अध्ययन के दौरान कोरोना संक्रमित दो मरीजों में क्रमश: सातवें और 10वें दिन संक्रमण मोडरेट स्थिति की ओर पहुंच गया था। इन दोनों मरीजों में छह और तीन मिनट का वॉक टेस्ट पूरी तरह फेल रहा क्योंकि इस टेस्ट के जरिए मरीजों की ऐसी स्थिति होने का अनुमान नहीं लगा सके। हालांकि मरीजों में वॉक टेस्ट और अन्य चिकित्सीय पैरामीटर के स्कोर में समय के साथ सुधार देखने को मिला लेकिन यह बीमारी की भविष्यवाणी करने में फेल रहे। 

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