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रोहिणी कोर्ट शूटआउट : जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग को लेकर दो याचिकाएं दायर
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नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट में शुक्रवार को हुई गोलीबारी की घटना के बाद जिला अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में वकीलों, जजों व आम लोगों की सुरक्षा के ध्यानार्थ जिला अदालतों की सुरक्षा के कड़े कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई है।
अधिवक्ता दीपा जोसेफ द्वारा अधिवक्ता रॉबिन राजू के माध्यम से दायर याचिका के अलावा तीन वकीलों रिषी कपूर, अंकुर गोगिया व शिवम शर्मा ने पत्र याचिका दायर की है। याचिकाओं में कहा गया है कि वीडियो, फोटो और घटना से संबंधित जानकारी ने उन्हें मानसिक रूप से झटका दिया है। उन्होंने तर्क रखा कि शुक्रवार की घटना दिल्ली की अदालतों में पहली नहीं है।
याचिका में हाल ही में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि हाल के दिनों में द्वारका कोर्ट में शूटिंग की घटनाएं हुई हैं, मई 2019 में साकेत कोर्ट के पास फायरिंग और इससे पहले 2017 में रोहिणी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में गोली मारकर एक विचाराधीन व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी।
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रोहिणी कोर्ट में हुई घटना के समान एक चौंकाने वाली घटना दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की हत्या की थी। जब चार हथियारबंद हमलावरों ने वर्ष 2015 में कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में एक कोर्ट रूम के अंदर गोलियां चलाई थीं।
याचिका में कहा गया है कि जिस गोलीबारी में एक कथित गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या हुई है उसे वास्तव में सुनियोजित बताया गया है। याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि अधिवक्ताओं की पोशाक में हमलावर जिस आसानी से अदालत परिसर में दाखिल हुए थे, उससे पता चलता है कि वे अच्छी तरह से जानते थे कि अदालत में पहुंचना आसान है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में जिला अदालतों का दौरा करने पर पाया कि कैसे अदालत में मौजूद पुलिसकर्मी किसी व्यक्ति की तलाशी लेने से पीछे हटते हैं। उन्होंने वकील की ड्रेस देखकर पुलिसकर्मी ध्यान नहीं देते। ऐसे में वकीलों की तलाशी के स्तर को भी उसी स्तर पर बनाए जाने की आवश्यकता है जैसे दिल्ली के उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में है।
याचिका में सभी अदालतों के प्रवेश द्वारों के बाहर बायो मैट्रिक पंचिंग डिवाइस लगाने का सुझाव दिया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वकीलों का एक वर्ग हो सकता है जो उनके इस सुझाव पर असहमत हो लेकिन याचिकाकर्ता न्यायाधीशों, वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और वादियों की समग्र सुरक्षा को ध्यान में रखते इस सुझाव पर अमल जरूरी है।
जोसेफ ने उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को अदालत के प्रवेश द्वार पर सभी पुलिस कर्मियों को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश देने की भी मांग की कि वे अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वकील के आईडी कार्ड की जांच करें।
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अधिवक्ता दीपा जोसेफ द्वारा अधिवक्ता रॉबिन राजू के माध्यम से दायर याचिका के अलावा तीन वकीलों रिषी कपूर, अंकुर गोगिया व शिवम शर्मा ने पत्र याचिका दायर की है। याचिकाओं में कहा गया है कि वीडियो, फोटो और घटना से संबंधित जानकारी ने उन्हें मानसिक रूप से झटका दिया है। उन्होंने तर्क रखा कि शुक्रवार की घटना दिल्ली की अदालतों में पहली नहीं है।
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याचिका में हाल ही में हुई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि हाल के दिनों में द्वारका कोर्ट में शूटिंग की घटनाएं हुई हैं, मई 2019 में साकेत कोर्ट के पास फायरिंग और इससे पहले 2017 में रोहिणी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में गोली मारकर एक विचाराधीन व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी।
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रोहिणी कोर्ट में हुई घटना के समान एक चौंकाने वाली घटना दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की हत्या की थी। जब चार हथियारबंद हमलावरों ने वर्ष 2015 में कड़कड़डूमा कोर्ट कॉम्प्लेक्स में एक कोर्ट रूम के अंदर गोलियां चलाई थीं।
याचिका में कहा गया है कि जिस गोलीबारी में एक कथित गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या हुई है उसे वास्तव में सुनियोजित बताया गया है। याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि अधिवक्ताओं की पोशाक में हमलावर जिस आसानी से अदालत परिसर में दाखिल हुए थे, उससे पता चलता है कि वे अच्छी तरह से जानते थे कि अदालत में पहुंचना आसान है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में जिला अदालतों का दौरा करने पर पाया कि कैसे अदालत में मौजूद पुलिसकर्मी किसी व्यक्ति की तलाशी लेने से पीछे हटते हैं। उन्होंने वकील की ड्रेस देखकर पुलिसकर्मी ध्यान नहीं देते। ऐसे में वकीलों की तलाशी के स्तर को भी उसी स्तर पर बनाए जाने की आवश्यकता है जैसे दिल्ली के उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में है।
याचिका में सभी अदालतों के प्रवेश द्वारों के बाहर बायो मैट्रिक पंचिंग डिवाइस लगाने का सुझाव दिया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वकीलों का एक वर्ग हो सकता है जो उनके इस सुझाव पर असहमत हो लेकिन याचिकाकर्ता न्यायाधीशों, वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और वादियों की समग्र सुरक्षा को ध्यान में रखते इस सुझाव पर अमल जरूरी है।
जोसेफ ने उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को अदालत के प्रवेश द्वार पर सभी पुलिस कर्मियों को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश देने की भी मांग की कि वे अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वकील के आईडी कार्ड की जांच करें।