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अनधिकृत कॉलोनियों का तीन दशक पुराना इंतजार खत्म

Thu, 24 Oct 2019 02:00 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2019 02:00 AM IST
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Three decade old wait for unauthorized colonies ends
नई दिल्ली। अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का करीब तीन दशक पुराना इंतजार खत्म होने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव से करीब तीन माह पहले दिल्ली की 40 लाख से ज्यादा आबादी को बड़ी राहत दी है। संसद के शीतकालीन सत्र में इससे जुड़ा बिल मंजूर होने के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने पर काम करेगा।
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केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि केंद्र सरकार जनरल पॉवर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) समेत खरीद- फरोख्त के दूसरे दस्तावेज को कानूनी मान्यता देने के लिए शीतकालीन सत्र में विधेयक लाएगी। इससे अनधिकृत कॉलोनी को नियमित करते वक्त केंद्र सरकार लोगों को रियायतें दे सकेंगी। इसमें रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी की व्यवस्था होगी। दिलचस्प बात यह कि सर्कल रेट से भी कम दर पर आयकर देना पड़ेगा।
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डीडीए कॉलोनियों में संपत्ति के लेनदेन की प्रक्रिया का सरलीकरण करेगा। वहीं, कॉलोनी के विकास के लिए लोकल एरिया प्लान (एलएपी) भी तैयार करना है। इसमें कॉलोनी के विकास का पूरा खाका होगा। वहीं, विकास कार्य की एवज में लोगों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त विकास शुल्क (ईडीसी) नहीं लगेगा। जिन लोगों के पास कई प्लॉट या फ्लैट हैं, उनकी सभी संपत्तियों को मिलाकर संबंधित एरिया में लागू दर के हिसाब से शुल्क लगेगा।
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अधिकारी बताते हैं कि लोगों के पास यह विकल्प होगा कि वे एक साल के अंदर तीन समान किस्तों में शुल्क का भुगतान कर दें। जो भी व्यक्ति एक किस्त में पूरी राशि का भुगतान करेगा, उसेे तुरंत मालिकाना हक मिलेगा। जबकि किस्तों का भुगतान करने पर पहले अल्पकालीन अधिकार मिलेंगे। मालिकाना हक पूरा शुल्क चुकाने के बाद ही मिलेगा। वहीं, देरी से भुगतान करने पर 8 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज लगेगा।

अनधिकृत कॉलोनी के मामले में कब क्या हुआ
1993ऱ् दिल्ली सरकार ने एक सर्वे कराकर 1071 कॉलोनियों की सूची नियमन के लिए तैयार की।
अक्तूबर, 1993 : 567 कॉलोनियां हुई नियमित। लेकिन इसी महीने कोर्ट ने अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन पर स्टे लगा दिया
1998 : तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा कोर्ट के समक्ष पेश हुए। किस नियम के तहत कालोनियों का नियमन करेंगे। कोर्ट ने कुछ कार्यों की छूट दी।
जनवरी 2001: केंद्र सरकार ने अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन को लेकर बनाए दिशा-निर्देश। वहीं, बसने की वजह जानने के लिए नानावती आयोग का गठन।
फरवरी, 2001: कोर्ट ने मामले का निपटारा करके 1993 के स्टे को जारी रखते हुए विकास कार्य कराने की छूट दी और नियमन योग्य व अयोग्य कॉलोनी की सूची पेश करने का निर्देश दिया।
मार्च, 2002: दिल्ली का एरियल सर्वे कराया गया।
2004: केंद्र सरकार ने 2001 के दिशा निर्देश में परिवर्तन किए।
2005: नानावटी आयोग ने सिफारिश की कि जितनी कॉलोनियां बन चुकी हैं उनका नियमन किया जाए। भविष्य में नई कालोनियां न बसें, इसके लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाए।
2007: केंद्र सरकार ने फिर से दिशा निर्देश बदले। इसमें कहा गया कि 31 मार्च 2002 से पहले 50 फीसदी आबादी वाली कॉलोनियां नियमित करनी थीं।
मार्च, 2008: कॉलोनियों के नियमन के लिए नए दिशा निर्देश की अधिसूचना जारी की गई।
जून, 2008: प्रोविजन सर्टिफिकेट जारी करने के लिए विनियमों में कुछ संशोधन किए गए।
अक्तूबर, 2008: 1218 अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन का प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिए गए।
जून, 2012: केंद्र सरकार ने फिर से दिशा-निर्देश में बदलाव किए। इसके तहत 2002 के बजाय 2007 की आबादी को आधार बनाया जाए।
अगस्त, 2012: 917 कॉलोनियों के नियमन की घोषणा।
2015: मौजूदा दिल्ली सरकार ने केंद्र को भेजा प्रस्ताव
23 अक्तूबर 2019: कैबिनेट ने 1797 कॉलोनियों का नियमित करने की घोषणा की।
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