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पार्षदों व अफसरों के वेतन को रोका जाएगा तो चीजें खुद सुधर जाएंगी: हाईकोर्ट

Sat, 16 Jan 2021 12:38 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 16 Jan 2021 12:38 AM IST
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things will improve automatically after deduction of salaries of officers
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों, नर्सों और स्वच्छता कर्मचारियों के वेतन का भुगतान न करने पर तीनों एमसीडी को आड़े हाथ लिया। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि लॉर्ड की तरह जी रहे पार्षदों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन समेत तीनों नगर निगमों के सभी गैर जरूरी एवं विवेकाधीन व्ययों को रोका जाएगा तो चीजेें अपने आप ठीक हो जाएंगी।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पिल्लई की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कोविड-19 में अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे डॉक्टरों, नर्सों और स्वच्छता कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं जाना दुर्भाग्य पूर्ण है। अदालत ने तीनों एमसीडी को उच्च अधिकारियों पर किए जा रहे खर्चों का पूरा विवरण पेश करने का निर्देश दिया है।
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अदालत इन तीनों निगमों के शिक्षकों, डॉक्टरों और सफाईकर्मियों समेत सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मियों को वेतन एवं पेंशन का भुगतान नहीं किये जाने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 21 जनवरी तय की है।
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अदालत ने कहा कि यदि वेतन में कटौती करनी है तो पार्षदों व अधिकारियों से इसकी शुरुआत होनी चाहिए। शीर्ष पदों पर आसीन लोग राजाओं की तरह रह रहे हैं। एक बार उन्हें तकलीफ महसूस होगी तो चीजें अपने आप काम करने लगेंगी। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मी ही क्यों परेशान हों?
अदालत ने कहा कि वेतन एवं पेंशन संविधान के तहत ये मौलिक अधिकार हैं। सही समय पर भुगतान न होने पर हकदार व्यक्तियों के जीवन और जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। अदालत ने कहा फंड के न होने का तर्क नहीं माना जा सकता। खंडपीठ ने उस तर्क को खारिज कर दिया कि दिल्ली सरकार द्वारा निगमों को दिये गये पैसे में ऋण की राशि काट ली है।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील सत्यकाम ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें यह निर्देश लेने का समय दिया जाए कि कटौती क्यों उचित है। अदालत ने दिल्ली सरकार को यह बताने के लिए 21 जनवरी तक का समय दिया है कि महामारी के दौरान कटौती क्यों नहीं रोकी गई जब सभी को किसी प्रकार की वित्तीय हानि हुई हो।
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