{"_id":"622e893848863e19243f0f9e","slug":"the-victims-of-fire-in-gokulpuri-delhi-told-the-story-of-their-helplessness","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली की आग : धीरे-धीरे मौत कस रही थी शिकंजा, बाहर खड़े अपने मचा रहे थे शोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली की आग : धीरे-धीरे मौत कस रही थी शिकंजा, बाहर खड़े अपने मचा रहे थे शोर
Mon, 14 Mar 2022 05:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 14 Mar 2022 05:45 AM IST
सार
आग पर काबू पाकर रेस्क्यू टीम जब झुग्गियों में दाखिल हुई तो वहां दोनों मासूमों के अर्द्ध जले शव एक जगह बरामद हुए। शुरुआत में परिवार को यकीन ही नहीं हुआ कि दोनों बच्चे उनके ही हैं, लेकिन बाद में जांच के बाद पिंटू और रोमा को यह साफ हो गया कि दोनों उनके ही जिगर के टुकड़े हैं।
विज्ञापन
गोकुलपुरी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
12 वर्षीय रोशन और उसकी नन्ही सी बहन दीपिका (8) आग की लपटों के बीच जिंदगी की तलाश में एक झोपड़ी में घुस गए, लेकिन वह मौत को चकमा नहीं दे पाए। मौत ने उनको ढूंढ ही लिया और दोनों को अपनी आगोश में ले लिया। आग की लपटों और शोरशराबे की बीच मासूमों की चीख भी लोगों को नहीं सुनाई दी।
विज्ञापन
पिंटू और उसकी पत्नी रोमा बच्चों को तलाशते रहे, परंतु उनका पता नहीं चला। आग का कहर करीब तीन घंटे चला। परिजन पल-पल दुआ करते रहे कि उनके बच्चे सुरक्षित रहे। आग पर काबू पाकर रेस्क्यू टीम जब झुग्गियों में दाखिल हुई तो वहां दोनों मासूमों के अर्द्ध जले शव एक जगह बरामद हुए। शुरुआत में परिवार को यकीन ही नहीं हुआ कि दोनों बच्चे उनके ही हैं, लेकिन बाद में जांच के बाद पिंटू और रोमा को यह साफ हो गया कि दोनों उनके ही जिगर के टुकड़े हैं।
विज्ञापन
एक परिजन ने बताया कि आग लगी तो पिंटू और रोमा बच्चों को लेकर बाहर की ओर भागे। पिंटू व उसकी पत्नी ने छोटे बच्चों को गोद में ले रखा था। रोशन व दीपिका माता-पिता के साथ चल रहे थे। आग तेजी से फैल रही थी, जिसे देखकर बच्चे डर गए और पता ही नहीं चला कब एक महिला की झुग्गी में घुस गए। पिंटू और रोमा ने बाहर निकलकर देखा तो बच्चे साथ नहीं थे। दोनों के होश उड़ गए। अंदर आग और भड़क चुकी थी। शोरशराबे के बीच उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। शुरुआत में लगा कि बच्चे शायद भीड़ में इधर-उधर हो गए हैं, लेकिन बाद में उनकी मौत का पता चला।
विज्ञापन
वहीं, रज्जन के परिवार के पांच सदस्य एक छोटे कमरेनुमा झोपड़ी में मौत के मुंह में चले गए। आग के बीच से सभी लोग बाहर निकल गए, लेकिन बबलू का 11 वर्षीय बेटा अमित उर्फ शहंशाह अंदर रह रहा। बबलू उसे बचाने भागा और बाकी परिजन रेशमा के दहेज के लिए रखा सामान निकालने में लग गए। इस बीच आग भी बढ़ती हुई रज्जन की झुग्गी तक पहुंच गई। इसके बाद किसी को कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला। हादसे में बबलू, उसके भाई रंजीत, बहन रेशमा, भाभी प्रियंका और बबलू के बेटे अमित उर्फ शंहशाह की मौत हो गई।
होली के आठ दिन बाद रंजीत के सिर बंधने वाला था सेहरा
गोकुलपुर गांव की कई झुग्गियों से डोली उठने वाली थीं, लेकिन आग ने आशियानों के साथ सपनों को भी जला डाला है। यहां एक लड़के के सिर सेहरा भी सजने वाला था। हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों में शामिल रंजीत की शादी तय हो चुकी थी और होली के आठ दिन बाद घर में बहू लाने की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन किसी को नहीं पता था कि खुशियां मातम में बदल जाएंगी। शुक्रवार रात झुग्गियों में लगी आग में बबलू, उसकी बहन रेशमा और भाभी प्रियंका व भतीजे शहंशाह के साथ रंजीत की भी मौत हो गई। सभी भाई-बहनों में रंजीत सबसे छोटा था। ऐसे में दो भाइयों की शादी के बाद पिता रज्जन और मां मुन्नी बेटे रंजीत की शादी की तैयारियां कर रहे थे। रेशमा की भी अगले माह शादी होनी थी।
पांच माह पहले तय हुआ था रिश्ता
रंजीत का रिश्ता झुग्गी में ही रहने वाले मुनुआ और प्रेमू के बेटी आरती के साथ पांच माह पहले तय हुआ था। आरती की मां मुनुआ ने बताया कि बेटी उन्नाव स्थित कोरारी में रह रही है। शादी तय होने के बाद बेटी भी खुश थी और तैयारियों में लगी हुई थी। परिवार की रंजीत से शादी की तैयारियों को लेकर भी बातचीत होती रहती थी। मुनुआ ने बताया कि बेटी की शादी के लिए सभी सामान खरीद लिया था। होली गुजरने का इंतजार था, जिसके बाद शहनाई बजनी थी, लेकिन इससे पहले ही आग ने सब जला दिया। उधर, बेटी को जब से घटना के बारे में जानकारी मिली है तो उसका रो-रोकर बुरा हाल है।