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हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस के जिला व्यवसायिक केंद्र के दफ्तर में लगी आग पर कड़ा रुख अपनाया
Wed, 18 Aug 2021 05:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 18 Aug 2021 05:02 AM IST
सार
- दिल्ली पुलिस, एमसीडी को निर्देश दिया कि सुनिश्चित करे नो वेंडिंग जोन में रेहड़ी-पटरी न लगे
- आदेश का पालन न करने पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस के जिला व्यवसायिक केंद्र के दफ्तर में लगी आग व फायर ब्रिगेड की गाडियों के मौके पर न पंहुचने पर हुई परेशानी पर स्वयं संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि दैनिक आधार पर कोई हॉकिंग और वेंडिंग (ठेली लगाने और फुटकर विक्रेता) नीति न हो।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने एसडीएमसी, दिल्ली पुलिस और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से इस संबंध में एक संयुक्त बैठक आयोजित कर उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 24 अगस्त तय की है।
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पीठ ने कहा है कि यह इलाका नो-हॉकिंग व नो-वेंडिंग जोन है। उसके बावजूद वहां रेहड़ी पटरी वाले अपना दुकान लगाते हैं। आखिर किस की जिम्मेवारी बनती है कि इलाका नो-हॉकिंग व नो-वेंडिंग जोन बना रहे।
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पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी विभाग को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए और समय नहीं दिया जाएगा। यदि स्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की जाती है तो दिल्ली पुलिस आयुक्त, एसडीएमसी आयुक्त और उपाध्यक्ष डीडीए सुनवाई की अगली तारीख पर उपस्थित रहेंगे।
पीठ ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट में कार्यरत सभी एजेंसियों के विवरण का खुलासा होना चाहिए। यह भी खुलासा होना चाहिए कि डीडीए या एसडीएमसी किस प्राधिकरण से काम करवा रहा है। रिपोर्ट में रेहड़ी पटरी वालों को हटाने पर लगी अदालती रोक के सभी आदेशों का भी खुलासा होना चाहिए। यह कहा जाता है कि सभी अतिक्रमणकारियों, फेरीवालों और विक्रेताओं को उक्त क्षेत्र से नहीं हटाया जा रहा है, जबकि इसे नो-हॉकिंग नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया है।
पीठ ने कहा कि एसडीएमसी के संबंधित एसएचओ, पीएस कालकाजी और कार्यकारी अभियंता उनके निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। अगर वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने पाया कि फुटपाथ की जगह पर फेरीवालों और विक्रेताओं ने कब्जा कर लिया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में देखा गया था कि इसके चलते दमकल गाड़ियों को उस इमारत तक पहुंचना मुश्किल था, जहां आग लगी थी। पीठ ने कहा कि वीडियों यह भी दिखाता है कि क्षेत्र में नगरपालिका अधिकारियों की ओर से किसी भी तरह की सफाई या रखरखाव नहीं के बराबर है।
एसएचओ ने कहा कि फेरीवालों और विक्रेताओं के पक्ष में दिए गए कई आदेशों के कारण उक्त विक्रेताओं को क्षेत्र को नो हॉकिंग और नो वेंडिंग जोन घोषित किए जाने के बावजूद नहीं हटाया गया था। पीठ ने कहा कि हमें यह समझना मुश्किल है कि कोई भी व्यक्ति, जो अदालत के आदेशों से सुरक्षित नहीं है, किसी भी स्थान पर कब्जा करना जारी रख सकता है। साथ ही संबंधित स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना रेहडी पर बिक्री कैसे कर सकता है?