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भारत का संविधान एक जीवंत दस्तावेज है: प्रो. डॉ. महेश वर्मा
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-आईपीयू में संविधान दिवस पर कार्यक्रम का किया गया आयोजन
नई दिल्ली। भारत का संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो नागरिकों को समान अवसर, अधिकार और कर्तव्य प्रदान करता है। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने विश्वविद्यालय में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने संविधान के मूल्यों तथा नागरिक उत्तरदायित्वों पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।
संविधान दिवस के अवसर पर सभी छात्रों और संकाय सदस्यों ने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के आदर्शों को बनाए रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर क्विज, भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिनमें छात्रों ने हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। आईपीयू के कुलसचिव डॉ. कमल पाठक ने संविधान की कानूनी महत्ता और समाज पर उसके प्रभाव को रेखांकित किया एवं छात्रों को सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय अखंडता, सद्भाव और संवैधानिक आदर्शों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
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नई दिल्ली। भारत का संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो नागरिकों को समान अवसर, अधिकार और कर्तव्य प्रदान करता है। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने विश्वविद्यालय में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने संविधान के मूल्यों तथा नागरिक उत्तरदायित्वों पर प्रेरणादायी विचार साझा किए।
संविधान दिवस के अवसर पर सभी छात्रों और संकाय सदस्यों ने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के आदर्शों को बनाए रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर क्विज, भाषण और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिनमें छात्रों ने हिस्सा लिया, जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। आईपीयू के कुलसचिव डॉ. कमल पाठक ने संविधान की कानूनी महत्ता और समाज पर उसके प्रभाव को रेखांकित किया एवं छात्रों को सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय अखंडता, सद्भाव और संवैधानिक आदर्शों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।
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