{"_id":"608d91d88ebc3e8d2a1164ec","slug":"tendency-of-making-huge-profit-not-responsible-says-high-court-ashram-news-noi5798835108","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया: हाईकोर्ट
विज्ञापन
नई दिल्ली। हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया है। उच्च न्यायालय ने ये टिप्पणी राजधानी के अस्पतालों में बेड के लिए मोटी रकम मांगे जाने के आरोपों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अदालत ने राजधानी के सभी अस्पतालों व नर्सिंग होम के चिकित्सा अधीक्षक, प्रबंधकों व निदेशकों को एक अप्रैल से भर्ती सभी कोविड-19 रोगियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि मरीज द्वारा कब्जे वाले बिस्तर की स्थिति और डिस्चार्ज की तारीख भी बताई जानी चाहिए। अदालत ने यह निर्देश निजी अस्पतालों में बेड के लिए मुंह मांगे दाम लेने के आरोप पर दिया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि बेड खाली नहीं होने के आरोपों की समीक्षा जरूरी है। हम जानते हैं कि हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया है। हमने इस पर विचार नहीं किया था। अदालत ने कहा कि आप इस प्रकार से 10 कमरे कम कर सकते हैं। यह उचित नहीं है।
विज्ञापन
खंडपीठ ने मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्याय मित्र राजशेखर राव को अस्पतालों के लिए एक फार्मेट तैयार करने को कहा है ताकि चार दिन के भीतर उक्त जानकारी प्राप्त की जा सके।
वहीं दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि एक मई तक दिल्ली में कुल 20,938 कॉविड बेड हैं, जिनमें वेंटिलेटर के साथ साधारण बेड, ऑक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड और आईसीयू बेड शामिल हैं।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि मरीज द्वारा कब्जे वाले बिस्तर की स्थिति और डिस्चार्ज की तारीख भी बताई जानी चाहिए। अदालत ने यह निर्देश निजी अस्पतालों में बेड के लिए मुंह मांगे दाम लेने के आरोप पर दिया है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि बेड खाली नहीं होने के आरोपों की समीक्षा जरूरी है। हम जानते हैं कि हर कोई अपने मुनाफे को उच्च रखना चाहता है, यह गैर जिम्मेदार रवैया है। हमने इस पर विचार नहीं किया था। अदालत ने कहा कि आप इस प्रकार से 10 कमरे कम कर सकते हैं। यह उचित नहीं है।
विज्ञापन
खंडपीठ ने मामले में अदालत की सहायता के लिए नियुक्त न्याय मित्र राजशेखर राव को अस्पतालों के लिए एक फार्मेट तैयार करने को कहा है ताकि चार दिन के भीतर उक्त जानकारी प्राप्त की जा सके।
वहीं दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि एक मई तक दिल्ली में कुल 20,938 कॉविड बेड हैं, जिनमें वेंटिलेटर के साथ साधारण बेड, ऑक्सीजनयुक्त बेड, आईसीयू बेड और आईसीयू बेड शामिल हैं।