फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   TB medicine useful in early detection of eye problems claims in research

टीबी इलाज पर अहम शोध: आंखों की समस्या का जल्द पता लगाने में उपयोगी, रिसर्च में नसों की परत में दिखी कमी

Sun, 08 Feb 2026 08:12 AM IST
राहुल तिवारी सिमरन, नई दिल्ली
सिमरन, नई दिल्ली Published by: राहुल तिवारी Updated Sun, 08 Feb 2026 08:12 AM IST
सार

टीबी की दवा इथाम्बुटोल से आंखों की नसों को होने वाले नुकसान का शुरुआती पता अब ऑटोमेटेड प्यूपिलोमेट्री जांच से लगाया जा सकेगा। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के शोध में 62 मरीजों पर अध्ययन कर सूक्ष्म बदलाव समय रहते पकड़ने की पुष्टि हुई।

विज्ञापन
TB medicine useful in early detection of eye problems claims in research
रिसर्च - फोटो : Adobe Stock Photo

विस्तार

टीबी (क्षय रोग) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा इथाम्बुटोल से आंखों की नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, लेकिन अब इस समस्या को शुरुआती दौर में ही पकड़ने का एक आसान तरीका सामने आया है।

विज्ञापन


 मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक नए शोध में पाया है कि ऑटोमेटेड प्यूपिलोमेट्री नामक जांच से आंखों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यह अध्ययन ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। इस रिसर्च में 62 नए टीबी मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें फेफड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों की टीबी थी।
विज्ञापन


शोध के अनुसार, इन मरीजों को पहली बार एंटी-टीबी दवाएं दी गईं, जिनमें इथाम्बुटोल भी शामिल था। डॉक्टरों ने इलाज शुरू होने से पहले 3 महीने और फिर 6 महीने बाद मरीजों की आंखों की जांच की। इसके लिए ऑटोमेटेड प्यूपिलोमेट्री के साथ-साथ ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) और विजुअल इवोक्ड पोटेंशियल (वीईपी) जैसे टेस्ट किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


अध्ययन के नतीजों में पाया गया कि 6 महीने बाद मरीजों की आंख की पुतली की प्रतिक्रिया में बदलाव आने लगे। पुतली के सिकुड़ने की मात्रा कम हुई और उसके फैलने की गति भी धीमी पाई गई। इसके साथ ही रेटिनल नर्व फाइबर लेयर (आरएनएफएल) कही जाने वाली आंख की नसों की परत की मोटाई में भी कमी देखी गई। खासकर ऊपरी, किनारे और निचले हिस्सों में। वीईपी टेस्ट में भी देरी बढ़ी, जो आंखों की नसों पर असर का संकेत है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि किसी भी मरीज में आंखों से जुड़ी कोई स्पष्ट समस्या या शिकायत नजर नहीं आई।  


शोध टीम की प्रमुख डॉ. परोमिता दत्ता के अनुसार, आंख की नसों के किनारे वाले हिस्से में आए बदलावों का सीधा संबंध प्यूपिलोमेट्री में दिखे बदलावों से है।  उन्होंने बताया कि ऑटोमेटेड प्यूपिलोमेट्री एक सस्ती, आसान और तेज जांच है, जिसे पोर्टेबल मशीन से भी किया जा सकता है। इसकी तुलना में ओसीटी और वीईपी जैसे टेस्ट महंगे हैं और हर जगह उपलब्ध नहीं होते, खासकर ग्रामीण इलाकों में।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed