सर्वे: दिल्ली में 48 फीसदी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार, 69 प्रतिशत चाहते हैं कोरोना संक्रमण दर दो फीसदी से कम होने पर भेजना
69 फीसदी ऐसे अभिभावक ऐसे हैं जो कि संक्रमण की दर दो फीसदी से कम होने पर भी बच्चों को स्कूल भेजने के इच्छुक हैं। वहीं 31 फीसदी अभिभावक ऐसे हैं जो मार्च-अप्रैल में शुरु होने वाले अगले सत्र में बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और उतराखंड जैसे राज्यों में स्कूल खोल दिए गए हैं, अन्य कई राज्यों में जल्द स्कूल खुलने वाले हैं। ऐसे में दिल्ली में भी स्कूलों को खोले जाने की मांग उठने लगी है। दिल्ली में करीब 48 फीसदी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं। जबकि कोरोना संक्रमण दर दो फीसदी से कम होने पर 69 फीसदी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। यह खुलासा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल्स के सर्वे में हुआ है। इस सर्वे में दिल्ली के विभिन्न जिलों के करीब 10 हजार (9, 758) अभिभावकों ने हिस्सा लिया।
दिल्ली की विभिन्न प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन भी उप-राज्यपाल को पत्र लिखकर स्कूलों को तत्काल खोले जाने की गुहार लगा चुकी हैं। दिल्ली स्टेट हेल्थ बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में संक्रमण की दर बीते कुछ दिनों से लगातार कम हो रही है। इस बीच लोकल सर्कल्स की ओर से कराए गए सर्वे सामने आया है कि अब जब संक्रमण दर पांच फीसदी है, तब 48 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा है कि स्कूल में बच्चों को भेजना चाहते हैं।
69 फीसदी ऐसे अभिभावक ऐसे हैं जो कि संक्रमण की दर दो फीसदी से कम होने पर भी बच्चों को स्कूल भेजने के इच्छुक हैं। वहीं 31 फीसदी अभिभावक ऐसे हैं जो मार्च-अप्रैल में शुरु होने वाले अगले सत्र में बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। लोकल सर्कल्स ने कोरोना की धीमी पड़ती रफ्तार के बीच सर्वे के माध्यम से स्कूलों को खोले जाने को लेकर अभिभावकों का मूड जानने की कोशिश की।
इस सर्वे के निष्कर्षों को दिल्ली के उप-राज्यपाल, मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के साथ साझा किया जाएगा। ताकि अभिभावकों की बात को दुबारा स्कूल खोलने केनिर्णय में शामिल किया जा सके। मालूम हो कि स्कूल काफी समय से बंद हैं। बोर्ड टर्म-2 की परीक्षाएं नजदीक आने के कारण स्कूलों को खोलने की मांग भी तेज होती जा रही है। जिससे कि बच्चों की प्रैक्टिकल परीक्षाओं और लिखित परीक्षाओं की तैयारी करवाई जा सके।