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कृषि कानूनों का विरोध : अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करते दिखे सुखबीर बादल
Sat, 18 Sep 2021 05:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 18 Sep 2021 05:48 AM IST
सार
उन्होंने अकाली दल को किसान हितैषी होने का प्रमाण पत्र देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया कि अकाली दल ही एकमात्र ऐसा दल हैं, जिसने किसानों और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है।
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प्रदर्शन में बादल और हरसिमरत...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब विधानसभा के अगले साल होने वाले चुनाव के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रमुख सुखबीर बादल ने कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने संबोधन में कई बार अपने दल को किसानों का सच्चा हितैषी साबित करने की कोशिश की, वहीं उन्होंने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को किसान विरोधी होने के कई तथ्य प्रस्तुत किए। इसी कड़ी में उन्होंने आम आदमी पार्टी की विश्वनीयता पर सवाल खड़ा किया।
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प्रदर्शन के दौरान सुखबीर बादल काफी उग्र दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने अपनी पुरानी साथी भाजपा की तरह अपनी घोर विरोधी कांग्रेस व आम आदमी पार्टी और उनके नेताओं पर जमकर हमले बोले। उन्होंने भाजपा पर केवल कृषि कानूनों के संबंध में ही आरोप लगाए। इस कड़ी में उन्होंने पंजाब में भाजपा की राजनीतिक जमीन खिसकने की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री से कृषि कानून वापस लेने की अपील की। उन्होंने इशारों ही इशारों में कहा कि पंजाब में किसानों के बिना सत्ता हासिल नहीं हो सकती है। इस कारण शिरोमणी अकाली दल केंद्रीय सरकार से अलग हो गया और एनडीए से बरसों पुराने संबंधों को खत्म कर लिया।
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उन्होंने किसानों को साधने में लगी कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कांग्रेस को भी किसानों विरोधी करार करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। इस मामले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का नाम लेकर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने कृषि कानूनों पास कराने का प्रयास किया था। इस तरह पंजाब में कांग्रेस की सरकार ने बाद में निजी मंडियों को लाने के लिए एपीएमसी अधिनियम में संशोधन भी किया। इतना ही नहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तीनों कृषि कानूनों को तैयार कराने में अहम भूमिका है।
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वह मुख्यमंत्रियों की उस सात सदस्यीय समिति का हिस्सा थे जिसने इन तीनों कृषि अध्यादेशों को अंतिम रूप दिया था। वहीं उन्होंने कहा कि आप नेता व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर कभी भी विश्वास नहीं किया जा सकता। वह एसवाईएल मुद्दे सहित पंजाब के सभी मुददों पर दोहरे मापदंड अपनाते है। इसी तरह वह राज्य के थर्मल प्लांटों को चलाने का विरोध करते और पराली जलाने के लिए किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते है। वह पूरी तरह किसान व पंजाब के निवासियों के विरोधी है।
उन्होंने अकाली दल को किसान हितैषी होने का प्रमाण पत्र देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया कि अकाली दल ही एकमात्र ऐसा दल हैं, जिसने किसानों और उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। खेती के काम, पक्के पानी के चैनलों का निर्माण और किसानों को मुफ्त नहरी पानी के लिए मुफ्त बिजली देना सुनिश्चित किया था।