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Delhi News: इंजीनियरिंग से पर्यावरणीय समाधान भी निकालें विद्यार्थीः उपराज्यपाल
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नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने किया संबोधित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। द्वारका स्थित यशोभूमि नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) का तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि इंजीनियरिंग का अर्थ केवल तकनीकी दक्षता नहीं बल्कि सतत विकास, समावेशिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ समाधान प्रस्तुत करना है।
एनएसयूटी ने स्वयं को एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित किया है जो विद्यार्थियों को केवल प्रोफेशनल सफलता के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के लिए भी तैयार करता है। उपराज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक ऊष्मीकरण, कार्बन उत्सर्जन एवं मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूएन-कॉप लक्ष्यों के प्रति प्रदर्शित प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए युवा स्नातकों से आह्वान किया कि वह अपने पेशेवर भविष्य को इन लक्ष्यों के अनुरूप व्यवस्थित करें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि एनएसयूटी जैसे संस्थान तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से भारत के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। एनएसयूटी निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने ईस्ट और वेस्ट कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण को गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि नेताजी का जीवन आज भी देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी ऐतिहासिक पहल शुरू की गईं। जिनसे देश में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई गति मिली है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने विद्यार्थियों से कहा कि वह ऐसे दौर में स्नातक बनकर निकल रहे हैं, जब भारत विकसित भारत 2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत केवल नारा नहीं बल्कि युवाओं को देश में अवसर देने और उनसे नवाचार व समाधान की अपेक्षा का स्पष्ट संकल्प है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। द्वारका स्थित यशोभूमि नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) का तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि इंजीनियरिंग का अर्थ केवल तकनीकी दक्षता नहीं बल्कि सतत विकास, समावेशिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ समाधान प्रस्तुत करना है।
एनएसयूटी ने स्वयं को एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित किया है जो विद्यार्थियों को केवल प्रोफेशनल सफलता के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन के लिए भी तैयार करता है। उपराज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक ऊष्मीकरण, कार्बन उत्सर्जन एवं मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यूएन-कॉप लक्ष्यों के प्रति प्रदर्शित प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए युवा स्नातकों से आह्वान किया कि वह अपने पेशेवर भविष्य को इन लक्ष्यों के अनुरूप व्यवस्थित करें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि एनएसयूटी जैसे संस्थान तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से भारत के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। एनएसयूटी निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने ईस्ट और वेस्ट कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा के अनावरण को गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि नेताजी का जीवन आज भी देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी ऐतिहासिक पहल शुरू की गईं। जिनसे देश में नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई गति मिली है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने विद्यार्थियों से कहा कि वह ऐसे दौर में स्नातक बनकर निकल रहे हैं, जब भारत विकसित भारत 2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत केवल नारा नहीं बल्कि युवाओं को देश में अवसर देने और उनसे नवाचार व समाधान की अपेक्षा का स्पष्ट संकल्प है।
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