{"_id":"615f45208ebc3ed0984a9a55","slug":"students-are-making-mistakes-in-calculation-of-marks-applications-are-being-rejected-ashram-news-noi6092128163","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंकों की गणना में छात्र कर रहे गलती, आवेदन हो रहे अस्वीकृत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंकों की गणना में छात्र कर रहे गलती, आवेदन हो रहे अस्वीकृत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक कोर्सेज की दाखिला प्रक्रिया में छात्रों को खुद अंकों की गणना करना मंहगा पड़ रहा है। कई छात्र दाखिले के लिए कटऑफ के आधार पर अपने आप गणना कर आवेदन तो कर देते हैं, लेकिन जब कॉलेज छात्र के अंकों की गणना करते हैं तो वह दाखिले के लिए अयोग्य पाए जाते हैं। ऐसे में कॉलेजों को उनके आवेदन को अस्वीकृत करना पड़ रहा है।
कॉलेज प्रिंसिपल कहते हैं कि छात्र दाखिला पोर्टल पर बेस्ट फोर विषयों की गणना करने पर तो वह कटऑफ में होते हैं लेकिन जब कॉलेज करते हैं तो ऐसे कई आवेदन होतेे हैं जिनकी कटऑफ कम निकलती है।
रामानुजन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ एसपी अग्रवाल कहते हैं कि उनके यहां पहली कटऑफ के तीन दिन में 500 आवेदन आए। इनमें से 125 आवेदन अस्वीकृत करने पड़े। इसका कारण यह है कि छात्र कटऑफ आने पर किसी भी कोर्स मेें आवेदन कर रहे हैं। लेकिन जब हम विषय के अनुसार बेस्ट फोर की गणना करते हैं उसकी कटऑफ कम निकलती है। इस कारण आवेदन अस्वीकृत करना पड़ता है।
विज्ञापन
आर्यभट्ट कॉलेज की दाखिला समिति संयोजक प्रो राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि हम दाखिला पोर्टल पर बेस्ट फोर के कॉलेज बेस्ट ऑफ फोर अंक जांचते हैं। ऐसे कई आवेदन होते हैं जिनकी कटऑफ कम निकली है। पोर्टल पर बेस्ट ऑफ फोर की गणना उसके चार विषयों के हिसाब से होती है। लेकिन हर कोर्स में दाखिले के लिए दाखिला मानक अलग होता है। कॉलेज ने 200 से अधिक आवेदन अस्वीकृत किए हैं।
दरअसल यदि किसी छात्र ने बारहवीं में कोई कोर्स नहीं पढ़ा और वह अब स्नातक में पढ़ना चाहता है तो उसके अंकों में कुछ कटौती होती है।
इसी तरह यदि कोई छात्र ऑनर्स कोर्स में शारीरिक शिक्षा लेना चाहता है तब भी उसके अंकों मेें 2.5 अंकों की कटौती होती है। ऐसे में छात्र की अंकों की गणना कटऑफ के अंकों के मुकाबले में कम हो जाती है। एसआरसीसी कॉलेज में भी 100 से अधिक आवेदनों को खारिज किया गया।
डीन दाखिला डॉ पिंकी शर्मा ने बताया कि कॉलेजों से कहा गया है कि वह अस्वीकृत आवेदन की जानकारी भी दें, इसका कारण बताएं। इससे छात्रों को दिक्कत नहीं होगी और शिकायतें भी कम होंगी।
विज्ञापन
कॉलेज प्रिंसिपल कहते हैं कि छात्र दाखिला पोर्टल पर बेस्ट फोर विषयों की गणना करने पर तो वह कटऑफ में होते हैं लेकिन जब कॉलेज करते हैं तो ऐसे कई आवेदन होतेे हैं जिनकी कटऑफ कम निकलती है।
विज्ञापन
रामानुजन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ एसपी अग्रवाल कहते हैं कि उनके यहां पहली कटऑफ के तीन दिन में 500 आवेदन आए। इनमें से 125 आवेदन अस्वीकृत करने पड़े। इसका कारण यह है कि छात्र कटऑफ आने पर किसी भी कोर्स मेें आवेदन कर रहे हैं। लेकिन जब हम विषय के अनुसार बेस्ट फोर की गणना करते हैं उसकी कटऑफ कम निकलती है। इस कारण आवेदन अस्वीकृत करना पड़ता है।
विज्ञापन
आर्यभट्ट कॉलेज की दाखिला समिति संयोजक प्रो राजेश कुमार द्विवेदी ने बताया कि हम दाखिला पोर्टल पर बेस्ट फोर के कॉलेज बेस्ट ऑफ फोर अंक जांचते हैं। ऐसे कई आवेदन होते हैं जिनकी कटऑफ कम निकली है। पोर्टल पर बेस्ट ऑफ फोर की गणना उसके चार विषयों के हिसाब से होती है। लेकिन हर कोर्स में दाखिले के लिए दाखिला मानक अलग होता है। कॉलेज ने 200 से अधिक आवेदन अस्वीकृत किए हैं।
दरअसल यदि किसी छात्र ने बारहवीं में कोई कोर्स नहीं पढ़ा और वह अब स्नातक में पढ़ना चाहता है तो उसके अंकों में कुछ कटौती होती है।
इसी तरह यदि कोई छात्र ऑनर्स कोर्स में शारीरिक शिक्षा लेना चाहता है तब भी उसके अंकों मेें 2.5 अंकों की कटौती होती है। ऐसे में छात्र की अंकों की गणना कटऑफ के अंकों के मुकाबले में कम हो जाती है। एसआरसीसी कॉलेज में भी 100 से अधिक आवेदनों को खारिज किया गया।
डीन दाखिला डॉ पिंकी शर्मा ने बताया कि कॉलेजों से कहा गया है कि वह अस्वीकृत आवेदन की जानकारी भी दें, इसका कारण बताएं। इससे छात्रों को दिक्कत नहीं होगी और शिकायतें भी कम होंगी।