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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी : गुरुमुखी की परीक्षा में सिरसा फेल, सदस्यता खतरे में 

Sun, 19 Sep 2021 04:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Sep 2021 04:40 AM IST
सार

अदालत ने गुरुद्वारा चुनाव के नियमों के तहत धार्मिक परीक्षा लेने का आदेश पिछले दिनों दिया था। इसमें सिरसा पास नहीं हो पाए।

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Sirsa fails in Gurmukhi's test, membership in danger
मनजिंदर सिंह सिरसा - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा की सदस्यता खतरे में पड़ गई है। दोबारा सिरसा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष पद संभालेंगे या नहीं इसे लेकर संशय दिखने लगा है। दरअसल दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी चुनाव निदेशालय द्वारा आयोजित गुरबानी और गुरुमुखी के परीक्षा में सिरसा फेल हो गए है। अदालत ने गुरुद्वारा चुनाव के नियमों के तहत धार्मिक परीक्षा लेने का आदेश पिछले दिनों दिया था। 

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गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निर्वतमान सदस्य हरविंदर सिंह सरना ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद आधारभूत धार्मिक परीक्षा शुक्रवार को चुनाव निदेशालय में ली गई। जिसमें सिख से जुड़े मूल प्रश्नों का जवाब देना था। चुनाव निदेशालय ने गुरुबानी का पाठ और गुरुमुखी में लिखे लेख को पढ़ने को कहा जिसमे सिरसा विफल हो गए। 
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पूरे प्रक्रिया की लाइव-वीडियो में रिकार्डिंग भी की गयी। इस मामले में सरना ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए सिरसा की सदस्यता खत्म करने की मांग की। मीडिया से बातचीत में सरना ने कहा कि सिख संगत को पिछले 8 सालों से बड़ा धोखा मिला है। यदि पंथ के नुमाईंदे को सिखी का ही आधारभूत ज्ञान नही, तो कुर्सी पर बैठने का क्या हक है? 
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उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई राजनीति की बात नहीं है बल्कि धार्मिक बात है। सिरसा को तुरंत बर्खास्त करने की जरूरत है। क्योंकि इसमें भी शक है कि सिरसा सिख नहीं है। सरना ने कहा कि सिरसा फर्जी  व्यक्ति है जिन्होंने फर्जी अस्पताल का निर्माण ही नहीं कराया फर्जी तरीके से कोविड केयर सेंटर भी बनवाया। डीएसजीएमसी चुनावो में पंजाबी बाग वार्ड के सिखों ने मनजिंदर सिंह सिरसा को वोट तक नहीं दिया। करारी शिकस्त मिली। 


बावजूद अकाली दल बादल गुट के सहयोग से सिरसा ने एसजीपीसी के रिफ्रेन्श के आधार पर बैकडोर एंट्री से दिल्ली गुरुद्वारा के सदस्य बन गए। ताकि उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाया जा सके। लेकिन एक बार फिर धार्मिक परीक्षा में असफल होने के बाद सिरसा की डीएसजीएमसी सदस्यता खतरे में है। 

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