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दिल्ली: शरजील इमाम ने कहा- मैं आतंकी नहीं, मेरे खिलाफ मुकदमा किसी सम्राट के चाबुक जैसा, सरकार की निंदा करना देशद्रोह नहीं

Tue, 05 Oct 2021 10:35 AM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 05 Oct 2021 10:35 AM IST
सार

शरजील की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि सरकार की निंदा करना देशद्रोह नहीं हो सकता। इस पूरे मुकदमे का सार ये है कि तुम हमारे खिलाफ बोलोगे, तुम पर देशद्रोह का मुकदमा किया जाएगा।

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Sharjeel Imam said I am not a terrorist case against me is like the whip of an emperor condemning government is not treason
शरजील इमाम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

देशद्रोह और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी जेएनयू छात्र शरजील इमाम ने कहा कि वह कोई आतंकी नहीं है और उसके खिलाफ मुकदमा स्थापित कानून के अनुरूप नहीं, बल्कि किसी सम्राट के चाबुक की तरह है। यह तर्क शरजील ने मामले में जमानत देने और आरोपमुक्त किए जाने की मांग करते हुए रखा।

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दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम को सीएए-एनआरसी के विरोध के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। आरोप है कि उसने 2019 में अपने भाषणों में कथित रूप से असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों को देश से अलग करने की धमकी दी थी। 
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ये कथित भाषण उसने जामिया में 13 दिसंबर 2019 और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 16 दिसंबर 2019 को दिए थे। वह जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में है। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष मामले की सुनवाई हो रही है।
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शरजील की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि सरकार की निंदा करना देशद्रोह नहीं हो सकता। इस पूरे मुकदमे का सार ये है कि तुम हमारे खिलाफ बोलोगे, तुम पर देशद्रोह का मुकदमा किया जाएगा। उनके मुवक्किल ने सीएए-एनआरसी का विरोध किया, केवल इसके लिए उस पर अत्याचार नहीं किया जा सकता। 

सरकार का विरोध करने पर देशद्रोह का मुकदमा
मीर ने कहा कि शरजील के खिलाफ ये मुकदमा स्थापित कानून के अनुसार नहीं है, बल्कि किसी सम्राट के चाबुक की तरह है। सरकार या कार्यपालिका इस तरह प्रतिक्रिया नहीं दे सकती। अंत में व्यवस्था बदल जाएगी, क्योंकि कुछ भी स्थायी नहीं है। प्रदर्शनकारी किसानों के हालिया भारत बंद का हवाला देते हुए मीर ने कहा कि क्या इन सब मामलों में भी हम देशद्रोह का मुकदमा लगाएंगे? रेल रोको आंदोलन, सड़क जाम आदि करना क्या विरोध के सांविधानिक तरीके नहीं हैं? अगर किसान अपनी फसल का दाम मांगते हैं या लोग महिलाओं के लिए अधिकारों की मांग करते हैं तो क्या उन पर देशद्रोह का मुकदमा लगेगा? 

निंदा करने का जज्बा नहीं होगा तो मर जाएगा समाज
मीर ने कहा कि सरकार की निंदा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। सरकार को कहां लोगों के स्नेह की जरूरत होती है। केवल सम्राटों और राजाओं को लोगों के स्नेह की जरूरत होती है। हम लोग केवल सरकार के सामने सिर झुकाने के लिए नहीं हैं। अगर समाज में निंदा करने का जज्बा नहीं होगा तो समाज मर जाएगा। अधिवक्ता ने कहा इमाम के खिलाफ कई मुकदमे लगा दिए गए, क्योंकि उसने सरकार की नीतियों का विरोध किया। वह कोई आतंकी नहीं है, न किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है। उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है, उसका कोई राजनीतिक एजेंडा भी नहीं है।


अराजकता फैलाने की कोशिश
इसके विरोध में विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अमित प्रसाद ने कहा कि विरोध करने का मौलिक अधिकार केवल वहां तक है जहां उससे दूसरों को असुविधा न हो। इमाम के भाषणों के बाद हिंसक दंगे हुए। मुस्लिमों के लिए कोई उम्मीद नहीं है और अब कोई रास्ता नहीं बचा है, ये कहकर उसने अराजकता फैलाने की कोशिश की।

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