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दिल्ली: शहरी झुग्गियों के बच्चों की पर्यावरण संबंधी आवाजों को सेसमे वर्कशॉप इंडिया और क्लीन एयर फंड ने दिया प्लेटफार्म

Fri, 27 Aug 2021 05:45 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 27 Aug 2021 05:45 PM IST
सार

क्लीन एयर फंड के सहयोग से सेसमे वर्कशॉप इंडिया भलस्वा जेजे, नरेला, निजामुद्दीन और सुंदर नगरी में बच्चों की स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ 4 सलाहकार बैठकें आयोजित कर रहा है, जिनमें बच्चे अपने इलाकों में पर्यावरण संबंधी अपनी जरूरतों को उजागर करेंगे।

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sesame workshop india and clean air fund gave platform to 10000 voices of kids staying in jhuggis regarding environmental issues
sesame workshop india - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और विकास कल्याण से संबंधित जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, सेसमे वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट ने मेरा प्लैनेट मेरा घर नामक एक पहल की शुरुआत की है। क्लीन एयर फंड के सहयोग से यह पहल, दिल्ली के कम संसाधन वाले समुदायों के 10,000 बच्चों की पर्यावरण संबंधी जरूरतों को जनता के सामने लाने पर केंद्रित है। प्रदूषण के प्रभाव से होने वाले बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास संबंधित जरूरतों को संबोधित करने के लिए, सेसमे वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट ने दिल्ली के 28 इलाकों के बच्चों का सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण में इस बात का अध्ययन किया गया कि बच्चे किस प्रकार की पर्यावरण समस्याओं का सामना कर रहे हैं और इन समस्याओं के समाधान में कैसे घर, आस-पड़ोस और समुदाय के बड़े लोग किस तरह से मदद कर सकते हैं। यह सर्वेक्षण 4 महीने तक किया गया।

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क्लीन एयर फंड के सहयोग से सेसमे वर्कशॉप इंडिया – भलस्वा जेजे, नरेला, निजामुद्दीन और सुंदर नगरी में बच्चों की स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ 4 सलाहकार बैठकें आयोजित कर रहा है, जिनमें बच्चे अपने इलाकों में पर्यावरण संबंधी अपनी जरूरतों को उजागर करेंगे। बच्चे पर्यावरण संबंधित जरूरतों के लिए संभावित समाधान भी प्रस्तुत करते नजर आएंगे।
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सेसमे वर्कशॉप इंडिया की मेरा प्लैनेट मेरा घर पहल बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और विकास के लिए पर्यावरण संबंधित समस्याओं को संबोधित करने का उद्देश्य रखती और यही कारण है कि इंडिया क्लाइमेट कोलैबोरेटिव ने इसके पहले चरण में इसका भी समर्थन किया था।
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बच्चों पर प्रदूषण के व्यापक प्रभाव को दूर करने के लिए, सेसमे वर्कशॉप इंडिया ने एक्शन इंडिया, चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया और चिंतन एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड एक्शन ग्रुप जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के साथ भागीदारी की, जिन्होंने दिल्ली में कम संसाधन वाले समुदायों के लगभग 10,000 बच्चों से प्रतिक्रियाओं को जानने में उनकी मदद की। चिंतन के विशेषज्ञों ने बच्चों की उम्र के अनुसार बच्चों के अनुकूल दृश्यों के साथ सर्वेक्षण को डिजाइन करने में भी मदद की ताकि बच्चे आसानी से सर्वेक्षण में जवाब दे सकें।

चाइल्ड सर्वाइवल इंडिया की दीपा बजाज, चीफ एग्जीक्यूटिव ने कहा, 'हम आम तौर पर समझते हैं कि छोटे बच्चे पर्यावरण और वायु प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दों के प्रति समझ नहीं रखते होंगे, लेकिन इस सर्वेक्षण ने हमारी आंखें खोल दी क्योंकि बच्चे कचरा जलाने, आसपास के कारखानों से प्रदूषण और वाहनों के आवागमन जैसी चीजों के बारे में बात कर पा रहे थे। महामारी के बीच बच्चों की प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण था लेकिन बच्चे अपनी चिंताओं को साझा करने के लिए रोमांचित और उत्साहित थे और हमें खुशी है कि हम उनकी आवाज को सेसमे वर्कशॉप इंडिया तक पहुंचाने में मदद कर पाए हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण पर प्रदूषण के प्रभाव को ईमानदारी से देख रहा है।

रजनीश त्यागी जो की चिंतन संस्था की तरफ से सेसमे वर्कशॉप इंडिया के सर्वेक्षण एवं प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं बताते हैं कि, छोटे बच्चे खासकर जो झुग्गी झोपड़ी या कूड़े के आसपास रहते हैं, वो वायु प्रदूषण के प्रभाव के प्रति और भी संवेदनशील होते हैं क्योंकि बड़े लोगों के मुकाबले उनके सांस लेने की प्रणाली अभी भी विकसित हो रही है और वो हवा में खतरनाक कड़ों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

एक्शन इंडिया के सरोज पुंडीर, चीफ़ एडमिन ऑफिसर ने कहा कि प्रदूषण बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। हमें सेसमे वर्कशॉप इंडिया की उस परियोजना का हिस्सा बनकर खुशी हो रही है जिसका लक्ष्य पर्यावरण प्रदूषण के कारण छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को संबोधित करना है।

मेरा प्लैनेट, मेरा घर के साथ सेसमे वर्कशॉप इंडिया को समर्थन करने पर, क्लीन एयर फंड की ऋचा उपाध्याय, इंडिया प्रमुख , प्रोग्राम ने कहा, वायु प्रदूषण की चुनौतियों से प्रभावित दिल्ली के छोटे बच्चों को सशक्त बनाने के लिए सेसमे वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट के साथ साझेदारी करने पर गर्व है। मेरा प्लैनेट, मेरा घर का समर्थन करके, हमें वायु प्रदूषण के संबंध में सामुदायिक स्तर पर काम को बढ़ाने में खुशी हो रही है।

बच्चों को अपनी आवाज उठाने के लिए एक मंच देते हुए, सेसमे वर्कशॉप इंडिया ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी, सोनाली खान ने कहा, “स्वच्छ हवा, पीने योग्य पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच की कमी निम्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों को कहीं अधिक गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इसलिए, बच्चों के स्वास्थ्य और बढ़ते विकास के लिए, सेसमे वर्कशॉप इंडिया ने दिल्ली के कम संसाधन वाले समुदायों के लगभग 10,000 बच्चों के पर्यावरण सम्बंधित समस्याओं को समझने और उनके स्थानीय जन प्रतिनिधियों के समक्ष रखने के लिए, अन्य गैर लाभकारी संस्थाओं से भागीदारी की ।”

समुदायों में बच्चों का सर्वेक्षण दो आयु समूहों, यानी 6-8 वर्ष और 9-10 वर्ष में किया गया। इस सर्वेक्षण में 6-8 वर्ष आयु वर्ग द्वारा निम्नलिखित पर्यावरण संबंधी जरूरतों को उजागर किया गया:

• 46.94% बच्चों ने कहा कि सभी व्यक्ति चाहे वे कहीं भी रहते हों, उन्हें अपने घरों के 500 मीटर के दायरे में पीने योग्य पानी प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए।

• 23.77% बच्चों ने महसूस किया कि कचरे को जलाया नहीं जाना चाहिए, इसके बजाय इसे प्राकृतिक तरीके से नष्ट नहीं होने वाले (नॉन–बायो-डिग्रेडेबल) और प्राकृतिक तरीके से नष्ट होने वाले (बायो-डिग्रेडेबल) कचरे के रूप में अलग किया जाना चाहिए। नॉन–बायो-डिग्रेडेबल कचरे और बायो-डिग्रेडेबल कचरे की अधिक से अधिक रिसाइक्लिंग कर बायो-गैस और खाद बनाने के लिए परिवर्तित किया जाना चाहिए।

• 22.10% बच्चों का मानना था कि साइकिल को परिवहन के साधन के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए और यह सस्ता होना चाहिए।

दूसरी ओर, 9-10 वर्ष के समूह में, निम्नलिखित चिंताएं प्रमुख रूप में उभरीं जिन्हें बच्चों ने स्थानीय नेताओं के समक्ष साझा किया है :

• 26.96% बच्चों ने कहा कि साइकिल को परिवहन के साधन के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए और यह सस्ता होना चाहिए।

• 26.40% बच्चों ने कहा कि सभी व्यक्ति चाहे वे कहीं भी रहते हों, उन्हें अपने घरों के 500 मीटर के दायरे में पीने योग्य पानी प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए।


• 20% बच्चों ने पटाखों के व्यापक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने और आतिशबाजी के प्रदर्शन के लिए विशेष क्षेत्र बनाने की मांग की।

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि दोनों आयु समूहों में बच्चों ने प्रमुख रूप से यह संकेत दिया कि बच्चे अपने लिए स्वच्छ हवा और स्वच्छ वातावरण चाहते हैं क्योंकि उन्होंने साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने, कचरा जलाने या पटाखों पर अंकुश लगाने पर स्पष्ट रूप से जोर दिया है। इन सभी को यदि लागू किया जाए तो वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।

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