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अभियोग तय करने से पहले पेश साक्ष्यों का गंभीरता से विश्लेषण जरूरी: हाईकोर्ट

Sat, 04 Sep 2021 09:09 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 09:09 PM IST
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Serious analysis of the evidence presented is necessary before framing the charges: High Court
विजय सिंघल
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में अभियोग तय करने से पहले पेश साक्ष्यों का गंभीरता से विश्लेषण करना चाहिए कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं। कोर्ट मात्र पोस्ट ऑफिस नहीं है कि अभियोजन पक्ष के आदेश पर अभियोग तय करे दे। उसे अपने न्यायिक विवेक का प्रयोग कर यह निर्धारित करना होता है कि मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं। हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म व अप्राकृतिक कृत्य के मामले में पति-पत्नी के खिलाफ निचली अदालत द्वारा तय अभियोग आदेश को खारिज करते हुए ये टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट को देखना है कि आरोपी के खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं। उन्होंने कहा इस मामले में स्पष्ट है कि पीड़ित महिला की भूमिका संदिग्ध है और उसने जिन दो फ्लैटों में याची दीपक दुआ व उसके पार्टनर कृष्ण कुमार द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाया है वह दोनों फ्लैट महिला के नाम पर किराए पर हैं।
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अदालत ने कहा कि महिला ने पुलिस आयुक्त व गौतम बुद्ध नगर अदालत में दी शिकायत में कृष्ण कुमार से फ्लैट के विवाद की शिकायत दी है और कहीं भी दुष्कर्म व अन्य आरोप नहीं लगाए। यह मामला घटना से करीब ढाई वर्ष बाद दर्ज करवाया गया और उसमें याची की पत्नी का नाम भी दर्ज करवा दिया।
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अदालत ने याची के अधिवक्ता के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि महिला ने कृष्ण कुमार से अपने विवाद को निपटाने के लिए उनके मुवक्किल व उनकी पत्नी को फर्जी मामले में फंसाया है।
अदालत ने निचली अदालत द्वारा याची के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, अप्राकृतिक कृत्य, जान से मारने की धमकियां इत्यादि देने के आरोप में तय अभियोग संबंधी फैसले को खारिज करते हुए कहा कि न्यायिक विवेक के उपयोग की अनुपस्थिति गंभीर अन्याय का कारण बन सकती है जो किसी व्यक्ति को अपनी गलती के बिना कानूनी प्रणाली की कठोरता से प्रेरित कर सकती है।
उन्होंने कहा निचली अदालत के 14 सितंबर 18 के आदेश के अवलोकन से संकेत मिलता है कि कोर्ट मामले के तथ्यों पर अपना दिमाग लगाने में विफल रहा है। ट्रायल कोर्ट को यह तय करने के लिए आरोपपत्र का अधिक बारीकी से विश्लेषण करना चाहिए था कि क्या आरोपों और उसके बाद की गई जांच के आलोक में याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध बनाया गया है।
क्या था मामला
महिला ने मामला दर्ज करवाया कि वह अपने पति से विवाद के चलते अलग रह रही थी और वजन कम करने के लिए 8 फरवरी 12 को कृष्ण कुमार के जिम में गई। पति से अलग होने का फायदा उठाकर कृष्ण उसके नजदीक आ गया। नवंबर 13 में कृष्ण ने कहा कि उसका वजन कम नहीं हो रहा और वह उसे प्रयत्न विहार के जिम में ले जाएगा। वहां आधुनिक मशीनें लगी हैं।
वह उसके साथ गई तो वहां आरोपी दीपक दुआ भी था। दोनों ने उसके साथ चाकू की नोक पर दुष्कर्म किया व उसकी अश्लील फोटो व वीडियो बना लिया। इसके बाद लगातार यह क्रम चलता रहा और कृष्ण ने कहा कि वह उसके साथ विवाह कर लेगा।

पीड़िता ने कहा कि आरोपी उसे नोएडा के एक फ्लैट में ले गए। वहां आरोपी दीपक की पत्नी भी थी। दोनों ने कई बार ब्लैकमेल कर दुष्कर्म किया व जान से मारने की धमकी दी। यह सिलसिला 8 अप्रैल 2016 तक चलता रहा।
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