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संत समाज ने दिया किसानों को समर्थन, आचार्य प्रमोद कृष्णम् समेत 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल राकेश टिकैत से मिला
Tue, 09 Feb 2021 12:40 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 09 Feb 2021 12:40 AM IST
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संत समाज ने दिया किसानों को समर्थन
- फोटो : amar ujala
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कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन को 75 दिन पूरे हो गए हैं। आंदोलनरत किसानों का संघर्ष लगातार जारी है। सोमवार को संत समाज के सदस्य भी गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत को समर्थन पत्र दिया और केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील की।
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कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् प्रमोद कृष्णम के नेतृत्व में काशी सुमेरु पीठ के जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के साथ देश के प्रमुख संतो का 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल गाजीपुर बॉर्डर पहुंचा। स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि करीब ढ़ाई माह से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। इन कानूनों से किसानों को काफी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी की घटना किसानों को बदनाम करने की एक साजिश थी। केंद्र सरकार सबका साथ और सबका विकास की बात करती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि हक की इस लड़ाई में संत समाज किसानों के साथ है। अन्नदाताओं की हर संभव मदद की जाएगी। किसान नेता राकेश टिकैत को समर्थन पत्र देते हुए किसानों ने उनपर पुष्प वर्षा करके उनका सम्मान भी किया।
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बॉर्डर पर घट रही है किसानों की संख्या
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्र प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा था। उस दौरान यहां करीब 10 हजार किसान मौजूद थे, यह सिलसिला एक सप्ताह तक रहा, लेकिन अब बीते तीन दिनों से यहां पहले के मुकाबले आधे ही लोग मौजूद हैं। किसान एकता मोर्चा के सदस्य बलजीत सिंह ने कहा, खेती के काम के सिलसिले में कई किसान इस समय अपने गांव गए हुए हैं। यह समय गन्नो को मिल में पहुंचाने का है। इस पूरे कार्य में दो से तीन दिन का समय लगता है।
इसके अलावा कुछ किसान शाम को अपने घर भी निकल जाते हैं। यही कारण है कि पहले के मुकाबले संख्या थोड़ी काम हुई है, हालांकि महिलाएं अधिक तादाद में अब पहुंच रही हैं। बलजीत ने कहा कि देश के कई राज्यों के किसानों का समर्थन भी मिल रहा है। रविवार को दार्जिलिंग से 24 किसानों का एक समूह यहां आया है।