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इधर दिल्ली का चुनाव प्रचार थमा, उधर शाहीन बाग को लेकर मची ऐसी हलचल!

Thu, 06 Feb 2020 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 06 Feb 2020 06:46 PM IST
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Rumors about removal of Shaheen Bagh protest by delhi police after feb 8
शाहीन बाग प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
दिल्ली का चुनाव प्रचार गुरुवार शाम को थम गया। सभी पार्टियों ने प्रचार के अंतिम दिन पूरी ताकत झोंक दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर आप संयोजक अरविंद केजरीवाल तक प्रचार में जुटे रहे। कांग्रेस की ओर से राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने वोट मांगे। जैसे जैसे प्रचार का समय खत्म हो रहा था, वैसे ही शाहीन बाग को लेकर कई तरह की खबरें आने लगीं।
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दोपहर में ऐसी खबर आई कि दिल्ली पुलिस बवाना, नांगलोई और कंझावला इलाके में 'खुली जेल' बनाने जा रही है। इसके लिए दिल्ली सरकार से इजाजत मांगी गई है। दूसरी ओर, चुनाव प्रचार की आखिरी रात को शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों की संख्या में एकाएक कमी आ गई। बताया जा रहा है कि अब वहां रात को दो सौ से कम लोग ही दिखाई पड़ रहे हैं।
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शाहीन बाग के आसपास पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ा दी गई है। अतिरिक्त बसों एवं एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों की जांच और पहचान पत्र देखने के अलावा कथित तौर पर उनका मोबाइल नंबर भी लिया जा रहा है।
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बता दें कि आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता सार्वजनिक तौर पर यह बात कह चुके हैं कि शाहीन बाग का प्रदर्शन भाजपा जानबूझकर खत्म नहीं करा रही है। केजरीवाल ने तो इतना भी कह दिया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पास शक्ति है, तमाम संसाधन हैं, वे चाहें तो कुछ ही देर में शाहीन बाग की सड़क खाली करा सकते हैं।


मगर वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें राजनीति करनी है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने शाहीन बाग के प्रदर्शन के लिए सीधे तौर पर केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा दिया है। दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि केजरीवाल चाहते तो शाहीन बाग का प्रदर्शन कब का खत्म हो गया होता। वे अपने डीएम को आदेश दें और सड़क खारी करा दें। उन्हें कौन रोक रहा है।

गुरुवार को दिल्ली पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने खुलासा किया है कि शाहीन बाग का प्रदर्शन अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। पिछले तीन चार दिनों की रिपोर्ट पर गौर करें तो वहां अब लोगों का आना-जाना कम हो गया है। सुरक्षा के चलते पुलिस ने जब से लोगों के दस्तावेज जांचने शुरू किए, तो वहां पर आने वालों का आंकड़ा कम हो गया। रात को मुश्किल से दो सौ प्रदर्शनकारी भी नहीं रहते।

खैर, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को अलर्ट पर रखा गया है। अतिरिक्त बसों एवं एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है। साथ ही तीन सौ से अधिक महिला पुलिस कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है। जहां तक खुली जेल की बात है तो ये कोई नया काम नहीं है। जब भी कोई प्रदर्शन होता है तो पुलिस कई जगह पर इस तरह की खुली जेल बना देती है।


चूंकि प्रदर्शनकारी ज्यादा संख्या में होते हैं, इसलिए उन्हें थानों में बंद नहीं किया जा सकता। कुछ घंटे के लिए उन्हें स्टेडियम आदि में रोका जाता है। ये स्टेडियम भी ऐसी जगहों में चिन्हित किए जाते हैं, जो प्रदर्शन स्थल से अच्छी दूरी पर हों। जैसे बवाना, कंझावला या नांगलोई स्थित सूरजमल स्टेडियम को खुली जेल के लिए तैयार कर दिया जाता है। ऊपर से जो भी आदेश आएगा, उसी के मुताबिक पुलिस कार्रवाई करेगी।

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