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रोहिणी जेल के दो अधिकारी और मैनेजर समेत पांच गिरफ्तार
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नई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रोहिणी जेल में बैठकर कारोबारी से रंगदारी मांगने के मामले में जेल के दो अधिकारियों व बैंक के मैनेजर समेत पांच को गिरफ्तार किया है। आरोपी सुकेश चंद्रशेखर व पहले गिरफ्तार किए गए दीपक रमनानी से पूछताछ के बाद इनके नाम का खुलासा हुआ था। ईओडब्ल्यू अब रकम के लेन-देन के ट्रांजेक्शन को लेकर जांच कर रही है।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार जेल अधिकारियों में डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाष बत्रा और असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट डीएस मीणा शामिल हैं। डीएस मीणा को तो अन्य पांच जेल कर्मियों के साथ पहले ही निलंबित किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आठ अगस्त को रोहिणी जेल में बंद सुकेश चंदशेखर की बैरक में छापा मारकर जेल से जबरन वसूली का धंधा चलाने के आरोप में उसे उसके दो साथियों दीपक रमनानी व प्रदीप के साथ गिरफ्तार किया था। इससे रोहिणी जेल में अफरा-तफरी मच गई थी। दस अगस्त को प्रशासन की तरफ से रोहिणी जेल के दो असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, एक हेड वार्डन और दो वार्डन समेत पांच कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि जेल में बैठकर ही सुकेश ने कई कारोबारियों से 300 करोड़ रुपये ठग लिए थे। बाद में मामले की जांच स्पेशल सेल से आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई थी।
ईओडब्ल्यू ने चंद्रशेखर द्वारा इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। दोनों ही फोनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। दीपक रमनानी ने पूछताछ में बताया कि रोहिणी जेल के अधिकारी सुकेश की जेल में बैठकर सहायता व सभी इंतजाम कर रहे हैं। इसके बाद रोहिणी जेल के इन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद कनॉट प्लेस स्थित आरबीएल बैंक के मैनेजर कोमल पोद्दार व बैंक के दो अन्य कर्मचारी अविनाश कुमार व जितेन्द्र नरूला का नाम सामने आया। पुलिस ने इन तीनों को भी गिरफ्तार कर लिया। इन तीनों ने कैश का प्रबंध किया था व ट्रांजेक्शन किए थे। रिश्वत मामले में अप्रैल, 2017 में एक होटल से गिरफ्तार चंद्रशेखर को शुरुआत में तिहाड़ जेल में रखा गया था। सुकेश खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी के खिलाफ चल रहे केस को सेटल कराने की बात करके पैसे ऐंठ रहा था। कारोबारी की पत्नी ने स्पेशल सेल में शिकायत दर्ज कराई थी।
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ईओडब्ल्यू अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार जेल अधिकारियों में डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाष बत्रा और असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट डीएस मीणा शामिल हैं। डीएस मीणा को तो अन्य पांच जेल कर्मियों के साथ पहले ही निलंबित किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आठ अगस्त को रोहिणी जेल में बंद सुकेश चंदशेखर की बैरक में छापा मारकर जेल से जबरन वसूली का धंधा चलाने के आरोप में उसे उसके दो साथियों दीपक रमनानी व प्रदीप के साथ गिरफ्तार किया था। इससे रोहिणी जेल में अफरा-तफरी मच गई थी। दस अगस्त को प्रशासन की तरफ से रोहिणी जेल के दो असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट, एक हेड वार्डन और दो वार्डन समेत पांच कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि जेल में बैठकर ही सुकेश ने कई कारोबारियों से 300 करोड़ रुपये ठग लिए थे। बाद में मामले की जांच स्पेशल सेल से आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई थी।
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ईओडब्ल्यू ने चंद्रशेखर द्वारा इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। दोनों ही फोनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। दीपक रमनानी ने पूछताछ में बताया कि रोहिणी जेल के अधिकारी सुकेश की जेल में बैठकर सहायता व सभी इंतजाम कर रहे हैं। इसके बाद रोहिणी जेल के इन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद कनॉट प्लेस स्थित आरबीएल बैंक के मैनेजर कोमल पोद्दार व बैंक के दो अन्य कर्मचारी अविनाश कुमार व जितेन्द्र नरूला का नाम सामने आया। पुलिस ने इन तीनों को भी गिरफ्तार कर लिया। इन तीनों ने कैश का प्रबंध किया था व ट्रांजेक्शन किए थे। रिश्वत मामले में अप्रैल, 2017 में एक होटल से गिरफ्तार चंद्रशेखर को शुरुआत में तिहाड़ जेल में रखा गया था। सुकेश खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी के खिलाफ चल रहे केस को सेटल कराने की बात करके पैसे ऐंठ रहा था। कारोबारी की पत्नी ने स्पेशल सेल में शिकायत दर्ज कराई थी।
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