{"_id":"614487338ebc3e70cf37dd96","slug":"rohini-court-grants-anticipatory-bail-to-lakha-sidhana-in-connection-with-republic-day-violence-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: लक्खा सिधाना को लाल किला हिंसा मामले में जमानत, रोहिणी कोर्ट से मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: लक्खा सिधाना को लाल किला हिंसा मामले में जमानत, रोहिणी कोर्ट से मिली राहत
Fri, 17 Sep 2021 05:49 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 17 Sep 2021 05:49 PM IST
सार
लखबीर सिंह उर्फ लक्खा सिधाना पंजाब का गैंगस्टर है। जिस पर भड़काऊ भाषण देकर लोगों को भड़काने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक 26 जनवरी की किसान हिंसा में पकड़े गए दीप सिद्धू ने 25 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर जब भड़काऊ भाषण दिया था तब लक्खा सिधाना भी वहीं मौजूद था।
विज्ञापन
लक्खा सिधाना
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अदालत ने शुक्रवार को गैंगस्टर बने सामाजिक कार्यकर्ता लक्खा सिधाना को गणतंत्र दिवस पर किसानों की विरोध रैली के दौरान कथित तौर पर पुलिस कर्मियों को मारने के प्रयास और भीड़ को बैरिकेड तोड़ने के लिए उकसाने से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत दे दी।
विज्ञापन
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगदीश कुमार ने सिधाना को राहत देते हुए कहा कि वह पहले ही जांच में शामिल हो चुके हैं और उसे हिरासत में लेने का कोई औचित्य नहीं है। अदालत ने 26 जनवरी को लाल किले में हुई हिंसा से संबंधित साजिश के मामले में उन्हें जमानत दे दी है।
विज्ञापन
सिधाना ने संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत मांगी थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि भले ही वह जांच में शामिल हो गया है, लेकिन उसके द्वारा पुलिस को सौंपे गए मोबाइल फोन में से एक को पासवर्ड से सुरक्षित रखा जाता है और उसे खोला नहीं जा सका। सिधाना ने पासवर्ड देने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडेय ने अदालत को बताया कि सिधाना ने पुलिस को बताया कि वह पासवर्ड भूल गया है और जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। अदालत ने कहा यदि यह स्थिति है कि अदालत यह कैसे मान सकती है कि वह पासवर्ड भूल गया है या जानबूझकर मोबाइल फोन को अनलॉक करने के लिए कोड का खुलासा नहीं कर रहा है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि सिधाना ने स्वीकार किया है कि वह भीड़ का हिस्सा था। आरोपी की अग्रीम जमानत स्वीकार करते हुए अदालत ने उसे जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। अदालत ने उसे किसी भी तरह से गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश भी दिया है।
हालांकि पुलिस ने कहा कि सिधाना गैरकानूनी सभा का हिस्सा था और उसने कुछ पुलिस अधिकारियों को मारने का प्रयास किया और भीड़ को बैरिकेड तोड़ने के लिए उकसाया। इसके अलावा आरोपी ने बैरिकेड तोड़ने के बाद जश्न मनाने के लिए कुछ लोगों को गले भी लगाया। उन्होंने बताया कि सिधाना इस समय हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े 20 जघन्य मामलों में शामिल है।
सिधाना की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर में उनके मुवक्किल का नाम भी नहीं है और पुलिस के पास उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है।