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पड़तालः दिल्ली के रैन बसेरों में राहत, इंतजाम बेहतर मगर लोगों की अधिकता

Mon, 18 Jan 2021 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 18 Jan 2021 05:57 AM IST
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Relief in Delhi's night shelters and arrangements are better 
शकरपुर (लक्ष्मीनगर), अक्षरधाम पुल के नजदीक एक रैन बसेरा - फोटो : amar ujala

कड़ाके की ठंड में लोग बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकल रहे हैं, क्योंकि ठंड अपने चरम पर है। शाम होते ही लोग घर के अंदर बिस्तर में दुबक जाते हैं, या कहीं आग के पास बैठ जाते हैं। लेकिन राजधानी दिल्ली में ऐसे बहुत से बेघर व जरूरतमंद लोग हैं, जिनके पास कड़ाके की ठंड में रात गुजारने के लिये अपनी छत नहीं है। ऐसे तमाम लोगों के लिये दिल्ली सरकार के शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने जगह-जगह पर रैन बसेरे बनवाए हैं। 

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सरकारी आंकड़ों की मानें तो इन सर्दियों में बेघरों के लिये दिल्ली में 193 स्थायी और 250 अस्थायी (टेंट में) रैन बसेरे बनाये गए हैं। जिनमें सात हजार से अधिक लोगों के खाने व सोने का इंतजाम है। रविवार को अमर उजाला संवाददाता आदित्य पाण्डेय और छायाकार हिमाशु सोनी ने दिल्ली के कुछ रैन बसेरों में रात के वक्त जाकर वहां किये गए इंतजाम की पड़ताल की है। आइये जानते हैं कि इस पड़ताल में क्या पता चला है।
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स्थान : शकरपुर (लक्ष्मीनगर), अक्षरधाम पुल के नजदीक, पूर्वी दिल्ली
समय : रात 10.30 बजे
केयर टेकर : सुधीश यादव
यहां पर 18 लोगों के लिये खाने व सोने का इंतजाम है। लेकिन रविवार को केवल 8 लोग यहां थे। जिनमें से आधे लोग खा पी कर सो चुके थे, जबकि आधे लोग टीवी देख रहे थे। साफ सफाई और पेय जल की यहां भी समुचित व्यवस्था नजर आई। रैन बसेरे के सामने दो माबाइल टॉयलेट रखे हैं, बगल में ही 200-200 लीटर छमता की दो पानी की टंकियां भी रखी गई हैं। सुधीश यादव ने कहा कि लोगों के नहाने धोने का सारी इंतजाम यहां पर है। उन्होंने बताया कि कई बार लोग नशे की हालत में यहां पहुंचते हैं। लेकिन सर्दी के मौसम में ऐसे लोगों को भी मडबूरन यहां रोकना पड़ता है। लेकिन ऐसे लोगों के बर्ताव से यहां ठहरने वाले दूसरे लोगों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। 
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स्थान :  सराय काले खां रैन बसेरा, दक्षिणी दिल्ली
समय : रात 8.30 बजे 
केयर टेकर : पी के गगन
सराय काले खां मेट्रो स्टेशन के सामने डूसिब ने एक ही जगह पर सात रैन बसेरे बनाए हैं। जहां एक सामान्य, एक बजुर्गों के लिये, दो परिवार वालों के लिये, दो महिलाओं के लिये और एक जिनका किसी बीमारी का इलाज चल रहा है उनके लिये स्थायी रैन बसेरा बनाया गया है। यहां पर 450 लोगों के रहने की व्यवस्था है। रात को अंदर जाते समय चौकीदार ने रोका औां अंदर जाने की वजह पूछी। बातचीत के बाद अंदर जाने का मौका मिला। यहां लोगों को खाना खिलाने की तैयारी हो रही थी। रात के खाने में सब्जी, रोटी व चावल आया था। खाना गरम था और सब्जी से मसाले की खुशबू अच्छी आ रही थी। यहां पीने के लिये साफ पानी, डबल डोर रेफ्रिजरेटर, रूम वार्मर का इंतजाम भी था। लोगों के बिस्तर साफ थे। पुरुषों और महिलाओं के लिये अलग-अलग रैन बसेरे हैं। पी के गगन ने उस्तुकता के साथ रैन बसेरे की खासियत गिनाई। यहां की व्यवस्थाएं ऐसी थीं, जिन्हें गिनाया जा सकता था। परिसर में बच्चों के लिये झूले व दूसरे खेलने के सामान लगे हैं। जहां बच्चे खेलते नजर आए। हर वार्ड में टेलीविजन लगा था। महिलाएं टीवी पर अमिताभ बच्चन की फिल्म मर्द देखने में व्यस्त थीं। 


स्थान : गुरुद्वारा बांग्ला साहिब रैन बसेरा, नई दिल्ली
समय : रात 9.45 बजे
केयर टेकर : सौरभ कुमार दीक्षित
गुरुद्वारा बांग्ला साहिब के बगल में डूसिब ने एक स्थान पर 6 स्थायी और 5 अस्थायी (टेंट में) रैन बसेरे बनाए हैं। जहां 280 लोगों के खाने, सोने का इंतजाम है। देर रात यहां लोगों का आनाजाना जारी था। अंदर जाने पर पता चला यहां एक भी बिस्तर खाली नहीं है। सौरभ कुमार ने बताया कि आधे घंटे पहले ही सभी ने रात का खाना खाया है। लोगों से पूछा तो पता चला कि वाकई लोगों ने खाना खा लिया है। लगभग सभी लोग बिस्तर के अंदर जा चुके थे। लेकिन अचानक बातचीत सुनकर सब उठने लगे थे। महिलाओं के रैन बसेरे में जबरदस्त भीड़ थी। सौरभ ने बताया आरएमएल अस्पताल में इलाज कराने आए लोग यहीं पर रात गुजार रहे हैं, इसलिये भीड़ ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यहां पर रोजाना क्षमता से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं। वह चाहते हैं कि डूसिब यहां पर कम से कम तीन और टेंट वाले रैन बसेरों का इंतजाम कराए। ताकि सर्द भरी रात में यहां से किसी को वापस ना जाना पड़े। यहां पर बुजुर्गों के लिये भी अलग रैन बसेरा बनाया गया है।

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