फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Relationship between husband and wife is not rape, it can be considered as sexual abuse

बीच बहस : पति-पत्नी के बीच संबंध दुष्कर्म नहीं, माना जा सकता है यौन शोषण 

Wed, 26 Jan 2022 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 26 Jan 2022 05:54 AM IST
सार

वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली याचिका पर आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता आरके कपूर ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण के मुद्दे पर विभिन्न याचिकाओं पर विचार कर रही है।

विज्ञापन
Relationship between husband and wife is not rape, it can be considered as sexual abuse
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

वैवाहिक संबंधों में पति-पत्नी के बीच संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता, बल्कि इसे केवल यौन शोषण ही माना जा सकता है। वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण की मांग वाली याचिका पर आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता आरके कपूर ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा। न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ वैवाहिक दुष्कर्म के अपराधीकरण के मुद्दे पर विभिन्न याचिकाओं पर विचार कर रही है।

विज्ञापन


अधिवक्ता कपूर ने कहा कि यही कारण है कि धारा 375 में अपवाद 2 को बरकरार रखा गया है और संसद ने इस तरह के यौन शोषण के कृत्य को क्रूरता के तहत कवर किया है और इसे धारा 375 आईपीसी के तहत परिभाषित दुष्कर्म के दायरे से बाहर कर दिया है।
विज्ञापन


पति को धारा 376 आईपीसी की गंभीरता से छूट दी है।उन्होंने कहा संसद यह नहीं कहती कि इस तरह का कार्य यौन शोषण नहीं है, लेकिन विवाह की संस्था को बचाने के लिए इसे एक अलग श्रेणी में ले लिया है और पत्नी अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए पति के खिलाफ एक विशेष सजा निर्धारित करने के लिए संसद को मजबूर नहीं कर सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि विवाह की संस्था की रक्षा करने का प्रयास किया गया है और कहा कि विवाह संस्था न केवल जोड़े के लिए बल्कि परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण है जिसमें बच्चे और माता-पिता भी शामिल हैं।


यौन अपराध से संबंधित डाटा साझा करने का निर्देश
दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया कि सभी जिलों के डीसीपी को संवेदनशील बनाया गया है और आवश्यक सरकारी आदेश जारी किए गए हैं ताकि यौन अपराधों से संबंधित मामलों के संबंध में संपूर्ण डेटा दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) के साथ साझा     किया जा सके। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने पीड़ितों को अंतरिम मुआवजा देने के उद्देश्य से डीएसएलएसए के साथ यौन अपराधों से संबंधित प्राथमिकी साझा करने की आपूर्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का निर्देश दिया था। दिल्ली पुलिस की और से पेश अधिवक्ता ने अदालत     को बताया कि सभी जिला डीसीपी ने अपने    जवाब में कहा है कि वर्ष 2012 से 2018 तक    के डेटा को पहले ही डीएसएलएसए के साथ    साझा किया जा चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed