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पटाखों के अस्थायी लाइसेंस संबंधी अधिसूचना पर रोक से इनकार
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक बार फिर आगामी दिवाली समारोह के दौरान आतिशबाजी और पटाखों के अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन आमंत्रित करने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल याचिका पर सुनवाई एक दिसंबर तय कर दी।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका प्राची गोयल ने दायर की है। याची के अधिवक्ता संदीप मित्तल ने कहा कि दिल्ली सरकार व उनके मुवक्किल की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने का आग्रह किया।
पुलिस आयुक्त ने 9 सितंबर 21 की एक अधिसूचना में आगामी दिवाली त्योहार के दौरान अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस के आवेदन मंगाए हैं।
वहीं याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि दिवाली त्योहार के दौरान अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस के अनुदान के लिए आवेदन मंगाना विस्फोटक अधिनियम, 18 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन और विपरीत है। दिल्ली पुलिस व दिल्ली सरकार ने याचिका को जुर्माने के साथ खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह विचार योग्य नहीं है।
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लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने कहा याचिका बिना सोचे-समझे और पूरी तरह से शोध के बिना दायर की गई है। इसके अलावा अस्थायी आतिशबाजी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में विस्फोटक नियम, 2008 का सख्ती से पालन किया गया है। इसके अलावा याची ने याचिका में पूरे तथ्य पेश नहीं किए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रतिवादी को विस्फोटक नियम, 2008 के नियम 84 के उल्लंघन में अस्थायी शेड या पक्की दुकान के लिए अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस देने से रोकने का भी आग्रह किया है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका प्राची गोयल ने दायर की है। याची के अधिवक्ता संदीप मित्तल ने कहा कि दिल्ली सरकार व उनके मुवक्किल की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने का आग्रह किया।
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पुलिस आयुक्त ने 9 सितंबर 21 की एक अधिसूचना में आगामी दिवाली त्योहार के दौरान अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस के आवेदन मंगाए हैं।
वहीं याचिकाकर्ता ने तर्क रखा कि दिवाली त्योहार के दौरान अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस के अनुदान के लिए आवेदन मंगाना विस्फोटक अधिनियम, 18 के तहत निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन और विपरीत है। दिल्ली पुलिस व दिल्ली सरकार ने याचिका को जुर्माने के साथ खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह विचार योग्य नहीं है।
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लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने कहा याचिका बिना सोचे-समझे और पूरी तरह से शोध के बिना दायर की गई है। इसके अलावा अस्थायी आतिशबाजी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में विस्फोटक नियम, 2008 का सख्ती से पालन किया गया है। इसके अलावा याची ने याचिका में पूरे तथ्य पेश नहीं किए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रतिवादी को विस्फोटक नियम, 2008 के नियम 84 के उल्लंघन में अस्थायी शेड या पक्की दुकान के लिए अस्थायी आतिशबाजी और पटाखा लाइसेंस देने से रोकने का भी आग्रह किया है।