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दलित वोटरों को लामबंद करने में प्रियंका की मदद करेगी 35 सदस्यीय 'टीम यूपी'
Sun, 10 Feb 2019 01:30 PM IST
अजय सिंह
भाषा, नई दल्ली
भाषा, नई दल्ली
Published by: अजय सिंह
Updated Sun, 10 Feb 2019 01:30 PM IST
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Priyanka Gandhi- Jyotiradtya Scindia
- फोटो : self
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प्रियंका गांधी वाड्रा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की उत्तर प्रदेश के दलित समुदाय में ज्यादा से ज्यादा पहुंच सुनिश्चित करने एवं उन्हें कांग्रेस के पक्ष में लामबंद करने के लिए पार्टी ने 35 सदस्यीय 'टीम यूपी' बनाई है।
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पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग की ओर बनाई गई इस टीम ने कुछ दिनों पहले ही प्रियंका और सिंधिया के समक्ष अपना 'ब्लूप्रिंट' रखा और जल्द ही वह उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर उतरने जा रही है।
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कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष नितिन राउत ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में कहा कि टीम यूपी मुख्य रूप से उन सीटों पर ध्यान देगी जहां दलित मतदाताओं की संख्या 20 फीसदी या इससे अधिक है।
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उन्होंने कहा, 'पिछले दिनों हमने प्रियंका गांधी और सिंधिया दोनों को ब्लूप्रिंट सौंप दिया। हम जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू कर देंगे।'
उन्होंने कहा, 'हम दलित समुदाय तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर जनसंपर्क, सभाएं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करेंगे। पूरी रूपरेखा बना ली गई है।'
हाल ही में प्रियंका को पार्टी महासचिव-प्रभारी (पूर्वी उत्तर प्रदेश) और सिंधिया को महासचिव-प्रभारी (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) नियुक्त किया गया है।
सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद सबसे पहले और सम्भवतः सबसे मुश्किल लक्ष्य के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अपने मिशन-यूपी के तहत सोमवार को पहली बार उत्तर प्रदेश के दौरे पर आएंगी।
प्रियंका के साथ उनके भाई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के नवनियुक्त प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया भी लखनऊ पहुंचेंगे।
प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि प्रियंका और ज्योतिरादित्य उत्तर प्रदेश के अपने चार दिन के इस दौरे के दौरान अपने-अपने प्रभार वाले लोकसभा क्षेत्रों के प्रमुख नेताओं से विस्तार से चर्चा करेंगे।
'टीम यूपी' की अगुवाई अनुसूचित जाति विभाग के प्रवक्ता एसपी सिंह करेंगे।
सिंह ने कहा, 'हम प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों के साथ काम करेंगे। हमने करीब 40 ऐसी सीटों को चिन्हित किया है जहां दलित मतदाताओं की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। इनमें 17 आरक्षित सीटें भी शामिल हैं।'
उन्होंने कहा, 'प्रियंका और सिंधिया की जनसभाओं और कार्यक्रमों में भी हम दलित समुदाय की समुचित भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।'
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस की इस पहल से सपा-बसपा गठबंधन को सीधा नुकसान नहीं होगा तो सिंह ने कहा, 'यह गलत धारणा है सभी दलित वोट बसपा को मिलते हैं। उनके साथ आधे दलित वोटर जाते हैं, लेकिन शेष दूसरे दलों के साथ चले जाते हैं। इसलिए इस पहल को गठबंधन को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की दृष्टि से देखना पूरी तरह गलत है।'
उन्होंने कहा, ' हम उन वोटरों को अपने साथ लाने की कोशिश करेंगे जो पिछले चुनावों में किसी वजह से भाजपा की तरफ चले गए थे। हम दलित समाज को यह बताएंगे कि भाजपा आरक्षण खत्म करना चाहती है और संविधान बदलना चाहती है।'
रायबरेली और अमेठी के दायरे से निकलकर पहली बार प्रत्यक्ष रूप से बड़े फलक पर काम करने जा रही प्रियंका के सामने चुनौतियां भी बहुत बड़ी हैं। उन्हें उस पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है, जिसे भाजपा का गढ़ माना जाता है और जहां से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। माना जाता है कि जिसने पूर्वांचल जीत लिया, उसने उत्तर प्रदेश फतह कर लिया।
अभी तक यही सम्भावना है कि मोदी एक बार फिर वाराणसी से ही लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ की पूर्व में लम्बे समय तक रही गोरखपुर सीट से नुमाइंदगी और अब उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद ‘हार्डलाइनर हिन्दुत्व’ का प्रभाव बढ़ने से पूर्वांचल में विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस के लिये एक नयी तरह की चुनौती उत्पन्न हुई है।