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Delhi : बिजली सब्सिडी पर सियासी घमासान, सरकार ने कहा-बंद नहीं होगी राहत

Fri, 31 Mar 2023 07:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 31 Mar 2023 07:18 AM IST
सार

दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल व भाजपा पर बिजली सब्सिडी खत्म करने का आरोप मढ़ा है। कहा कि साजिश के तहत मुफ्त बिजली रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली योजना बंद नहीं होगी।  

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Political tussle over electricity subsidy
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विस्तार

बिजली सब्सिडी पर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल व भाजपा पर बिजली सब्सिडी खत्म करने का आरोप मढ़ा है। कहा कि साजिश के तहत मुफ्त बिजली रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली योजना बंद नहीं होगी।  
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ऊर्जा मंत्री आतिशी ने उपराज्यपाल व भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बिजली विभाग से एक फाइल आई है, जिसमें किसानों और वकीलों के चैंबर में मिलने वाली फ्री बिजली बंद करने का प्रस्ताव है। आतिशी ने पूछा कि जब चुनी हुई सरकार ने इस तरह का कोई प्रस्ताव बनाया ही नहीं तो आया कहा से। किसने इस तरह के आदेश दिए है। आतिशी ने कहा कि बिजली विभाग के अधिकारियों ने मुझे बताया कि उपराज्यपाल और भाजपा नेताओं के दबाव के कारण इस तरह का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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किसानों को नहीं मिलती मुफ्त बिजली : बिधूड़ी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि बिजली मंत्री आतिशी का आरोप बेबुनियाद है। राजधानी में किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा मिलती ही नहीं तो उपराज्यपाल के दबाव में इसे बंद करने का प्रश्न ही नहीं उठता। आतिशी अभी नई-नई मंत्री बनी हैं और उन्होंने यह होम वर्क भी नहीं किया कि दिल्ली में किसानों के लिए मुफ्त बिजली की कोई योजना ही नहीं है। किसानों के साथ केजरीवाल का सौतेला व्यवहार जगजाहिर है। ब्यूरो
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आतिशी का दावा गलत : सचदेवा
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बिजली मंत्री आतिशी के दावे को गलत बताया है जिसमें उन्होंने कहा है कि किसानों और वकीलों की फ्री बिजली बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है। सच्चाई यह है कि उपराज्यपाल कार्यालय ने ऐसा कोई सुझाव अधिकारियों को नहीं दिया। सच तो यह है कि दिल्ली सरकार किसानों को एक यूनिट भी बिजली फ्री नहीं देती है, बल्कि गरीब किसानों से प्रति ट्यूबवेल 10 से 20 किलोवाट पर लोड चार्ज वसूलती है।
 
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