ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जमाखोरी : दिल्ली की अदालत ने नवनीत कालरा को दी जमानत
अदालत ने कालरा के दो बार रिमांड आवेदन को खारिज करने संबंधी पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा आरोपी को 17 मई को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद तीन दिन का पुलिस रिमांड लिया।
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अदालत ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटरों की कालाबाजारी व धोखाधड़ी के आरोपी नवनीत कालरा को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी से न तो पुलिस को मामले में पूछताछ करनी है और न ही कोई बरामदगी। मामला दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है और उनसे छेड़छाड़ संभव नहीं। ऐसे में नवनीत कालरा जमानत पाने का हकदार है।
साकेत अदालत स्थित मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने अपने 23 पृष्ठों के फैसले में अभियोजन पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित होगी। अदालत ने कालरा के दो बार रिमांड आवेदन को खारिज करने संबंधी पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा आरोपी को 17 मई को गिरफ्तार किया गया और उसके बाद तीन दिन का पुलिस रिमांड लिया। इसके बाद पांच दिन का रिमांड बढ़ाने का आग्रह किया, लेकिन अदालत ने आधार न होने पर उसे खारिज कर दिया।
इसके बाद पुलिस ने पुन: दूसरी अदालत से पांच दिन का रिमांड मांगा उसे भी खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा कि रिमांड आवेदन दो बार खारिज होने के बावजूद पुलिस ने उसे ऊपरी अदालत में चुनौती नहीं दी। इसके अलावा जांच अधिकारी ने 12 दिन से जेल में बंद कालरा से पूछताछ के लिए कोई भी आवेदन दायर नहीं किया। ऐसे में स्पष्ट है कि उससे पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है।
अदालत ने कहा कि जहां तक आरोपी के पूछताछ में शामिल न होने का सवाल है जब तक अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई लंबित थी तो वह कानूनी सहायता मिलने तक पेश नहीं हो सकता था। अदालत ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि केस डायरी के अनुसार प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी व आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला बनता है लेकिन सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने उक्त आरोपी खारिज करने का आग्रह नहीं किया।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलो का हवाला देते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों में आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है तो उसे जमानत प्रदान की जा सकती है। ऐसे में उनका मानना है कि आरोपी जमानत का हकदार है। अदालत ने कालरा की जमानत एक लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व दो अन्य जमानती पेश करने पर मंजूर की है। अदालत ने उसे गवाहों से संपर्क न करने, जिन्हें कंसंट्रेटर बेचे हैं उन लोगों से संपर्क न करनेका निर्देश दिया है। अदालत ने उसे जांच में सहयोग करने को भी कहा है।
इससे पूर्व सरकारी वकील अतुल श्रीवास्तव ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए तर्क रखा था कि आरोपी ने लोगों से धोखाधड़ी की है और उन्हें खराब क्वालिटी के कंसंट्रेटर बेचे हैं। आरोपी ने इस जर्मनी तकनीक का बताया था जबकि वे जर्मनी के नहीं निकले। इसके अलावा कालरा ने दान में कंसंट्रेटर नहीं दिए, बल्कि पैसे भी वसूले हैं और वह भी दो सौ प्रतिशत ज्यादा। इसके अलावा हाईकोर्ट तक ने उसे राहत देने से इंकार कर दिया था।
उन्होंने श्रीराम लैब की रिपोर्ट भी हवाला दिया कि कंसंट्रेटर तय मानक के नहीं है। यह व्हाइट क्राईम है। ऐसे में जमानत देन पर वह साक्ष्य नष्ट कर सकता है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास पाहवा ने कहा कि श्रीराम लैब को 2016 तक ही मान्यता प्रदान थी। हम रिपोर्ट को चुनौती दे रहे है यी भ्रम पैदा करने वाली है। ऐसे में जमानत प्रदान की जाए।