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Delhi News: छह सीबीआई अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई के आदेश
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गलत बयान देने के मामले में विशेष सीबीआई अदालत को चार सप्ताह में शिकायत भेजने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पूर्व आईआरएस अधिकारी के मामले में अदालत के समक्ष कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आरोप में छह सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष सीबीआई अदालत को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया।
अदालत ने सीबीआई अधिकारियों सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 191, 193 और 209 के तहत कार्रवाई के लिए प्रथम दृष्टया आधार पाया। विशेष न्यायाधीश को चार सप्ताह के भीतर शिकायत संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास भेजने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े सीबीआई मामले का है। जनवरी 2016 में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को अवैध ठहराते हुए उन्हें मामले से डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार किया, लेकिन कानून मंत्रालय ने जून 2016 में आगे कार्रवाई नहीं करने की राय दी थी। डीओपीटी ने जुलाई 2016 में यह राय सीबीआई को भेज दी थी।
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बाद में अग्रवाल ने जब्त दस्तावेज लौटाने की मांग की। इसके जवाब में सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को कहा कि मंत्रालय के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर पत्राचार जारी है। हाईकोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई पत्राचार नहीं चल रहा था। अदालत ने सीबीआई के जवाब के तैयार किए गए मसौदों की भी जांच की और पाया कि शुरुआती मसौदे में डीओपीटी द्वारा अपील खारिज किए जाने का उल्लेख था, जिसे बाद के मसौदे में हटाकर पत्राचार जारी है लिखा गया।
हाईकोर्ट ने इसे महज शब्दों की गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि कथित झूठे बयान की जांच न्यायहित में आवश्यक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पूर्व आईआरएस अधिकारी के मामले में अदालत के समक्ष कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आरोप में छह सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मधु जैन ने पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष सीबीआई अदालत को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया।
अदालत ने सीबीआई अधिकारियों सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 191, 193 और 209 के तहत कार्रवाई के लिए प्रथम दृष्टया आधार पाया। विशेष न्यायाधीश को चार सप्ताह के भीतर शिकायत संबंधित क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास भेजने का निर्देश दिया गया है।
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यह मामला अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े सीबीआई मामले का है। जनवरी 2016 में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को अवैध ठहराते हुए उन्हें मामले से डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार किया, लेकिन कानून मंत्रालय ने जून 2016 में आगे कार्रवाई नहीं करने की राय दी थी। डीओपीटी ने जुलाई 2016 में यह राय सीबीआई को भेज दी थी।
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बाद में अग्रवाल ने जब्त दस्तावेज लौटाने की मांग की। इसके जवाब में सीबीआई ने 2 अगस्त 2016 को कहा कि मंत्रालय के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर पत्राचार जारी है। हाईकोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई पत्राचार नहीं चल रहा था। अदालत ने सीबीआई के जवाब के तैयार किए गए मसौदों की भी जांच की और पाया कि शुरुआती मसौदे में डीओपीटी द्वारा अपील खारिज किए जाने का उल्लेख था, जिसे बाद के मसौदे में हटाकर पत्राचार जारी है लिखा गया।
हाईकोर्ट ने इसे महज शब्दों की गलती मानने से इनकार करते हुए कहा कि कथित झूठे बयान की जांच न्यायहित में आवश्यक है।