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मांग एक, प्रदर्शन अनेक: केंद्रीय नेतृत्व नहीं होना पुलिस के लिए चुनौती, संगठन अपने-अपने स्तर पर कर रहे विरोध
Mon, 12 Oct 2026 04:56 AM IST
Digvijay Singh
संतोष कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
संतोष कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 12 Oct 2026 04:56 AM IST
सार
मांग एक, मंच अनेक और नेतृत्व भी लुटियन की दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों में बंटा दिख रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध की आवाज तो एक जैसी रही, लेकिन प्रदर्शनकारी एकजुट होकर सामने नहीं आए।
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दिल्ली प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मांग एक, मंच अनेक और नेतृत्व भी लुटियन की दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों में बंटा दिख रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध की आवाज तो एक जैसी रही, लेकिन प्रदर्शनकारी एकजुट होकर सामने नहीं आए। नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस व वाम दलों से जुड़े संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चा खोल रखा है।
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साझा मंच और केंद्रीय नेतृत्व के अभाव में विरोध कई धड़ों में बंटा है। प्रदर्शनकारियों का यही बिखराव दिल्ली पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बना है। आंदोलन की केंद्रीय आवाज न होने से पुलिस को हर समूह की गतिविधि पर हर पल नजर रखनी पड़ रही है।
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हर समूह पर नजर रखने की चुनौती :
प्रदर्शनों से निपटने में पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती विरोध के किसी एक केंद्र का न होना है। आम तौर पर जब किसी आंदोलन का स्थान, समय और नेतृत्व तय होता है, तो पुलिस अपनी तैनाती और निगरानी उसी के अनुरूप कर सकती है। लेकिन अलग-अलग संगठनों के स्वतंत्र कार्यक्रमों के कारण जुटान की जगह और समय को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने बताया कि आम तौर पर आंदोलनों में नेतृत्व और कार्यक्रम की स्पष्ट रूपरेखा होने से पुलिस को अपनी रणनीति बनाने में आसानी होती है। इस बार अलग-अलग संगठन अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन की कोशिशों के कारण भी निगरानी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम कठिन हो रहा है।
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संगठनों में तनातनी भी दिखी :
बीते पंद्रह दिनों में आइसा और सीजेपी तो बीच-बीच में एक प्लेटफार्म पर दिखे भी, लेकिन कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के साथ आप कभी साथ नहीं आई। इसके उलट दोनों दलों के नेताओं में कई बार सोशल मीडिया पर तनातनी भी दिखी है। कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव और आप दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज इस बीच एक-दूसरे के खिलाफ बयानवाजी भी करते दिखे हैं।
बीते पंद्रह दिनों के प्रदर्शन और उनके संगठन
कांग्रेस : 25 सितंबर को दिल्ली समेत देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली में युवा कांग्रेस और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
सीजेपी : 24 सितंबर को 48 घंटे में इस्तीफा देने की मांग की और 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया।
आइसा : दो से चार अक्तूबर को मार्च।
वामदल : पांच अक्तूबर को बताई आंदोलन की रणनीति।
इंडिया गठबंधन और आप : छह और सात अक्तूबर को इंडिया गठबंधन ने प्रदर्शन किया। सात अक्तूबर को इंडिया गठबंधन और आप ने अलग-अलग प्रदर्शन किया।
कांग्रेस : आठ अक्तूबर को राजघाट पर मार्च।
इंडिया गठबंधन : नौ अक्तूबर को कांग्रेस सांसदों ने विजय चौक पर भी प्रदर्शन किया।
सीजेपी, आप और आइसा : 10 अक्तूबर को आइसा व सीजेपी ने साथ-साथ प्रदर्शन किया। आप का समर्थन मिला। कांग्रेस व इंडिया गठबंधन ने दूरी बनाए रखी। प्रदर्शनकारियों पर ज्यादती के आरोप लगाती पोस्ट कांग्रेस ने शेयर की है।
इंडिया गठबंधन: 12 अक्तूबर को कांग्रेस का प्रदर्शन प्रस्तावित है। वहीं, सीजेपी ने भी आंदोलन जारी रखने का एलान किया है।