{"_id":"61789602c58c3f74c534c40a","slug":"one-crore-fine-on-ghaziabad-municipal-corporation","type":"story","status":"publish","title_hn":"कचरा प्रबंधन में नाकामी : जीडीए पर एक करोड़ का जुर्माना, एनजीटी ने कहा-एक महीने में हो तामील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कचरा प्रबंधन में नाकामी : जीडीए पर एक करोड़ का जुर्माना, एनजीटी ने कहा-एक महीने में हो तामील
Wed, 27 Oct 2021 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 27 Oct 2021 05:27 AM IST
सार
आवेदन पर सुनवाई के दौरान अधिकरण ने जताई निराशा। कहा, गलती करने वाले अधिकारियों से वसूले हर्जाना।
विज्ञापन
NGT
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कचरा प्रबंधन में विफलता को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गाजियाबाद नगर निगम को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास अंतरिम मुआवजे के रूप में एक करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया है। इस राशि का इस्तेमाल पर्यावरण सुधारने के लिए किया जाएगा।
विज्ञापन
अधिकरण ने निगम को यह पैसा गलती करने वाले अधिकारियों की तनख्वाह से वसूलने की छूट भी दी है।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा, आपराधिक कानून के तहत अभियोजन के अलावा सांविधानिक दायित्व के उल्लंघन को लेकर अधिकारियों को मुआवजा और विभागीय कार्रवाई के जरिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
विज्ञापन
पीठ ने कहा, अधिकरण के आदेशानुसार निगम सीपीसीबी को एक माह के भीतर मुआवजा जमा कराए, जिसे उचित योजना बनाकर पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
विज्ञापन
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगर विकास या अन्य अधिकारियों की सहायता लेकर एक महीने में स्थिति की समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव को तीन माह बाद अनुपालना स्थिति पेश करने और अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मौजूद रहने को भी कहा है।
इसके अलावा, पीठ ने सीपीसीबी को 24 फरवरी 2022 से पहले क्षेत्र में ठोस और तरल कचरा प्रबंधन के मुद्दे पर स्वतंत्र रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। दरअसल, एनजीटी ट्रांस हिंडन परिसंघ, गाजियाबाद के रेसिंडेंट वेल्फेयर एसोसिएशनों के उस आवेदन पर सुनवाई कर रहा था, जो इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, पर्यावरण व जन स्वास्थ्य से जुड़ा है।
सुनवाई के दौरान अधिकरण ने गाजियाबाद के इन इलाकों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर अधिकारियों के कामकाज पर भारी निराशा जताई। पीठ ने कहा, इस मुद्दे पर अधिकरण द्वारा निर्धारित समय सीमाएं गुजर चुकी हैं। पर्यावरण क्षति और आधिकारिक विफलता को लेकर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है।