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दिल्ली: 60 फीसदी बढ़ेगी सीएनजी शवदाह गृह की संख्या, अभी 300 से अधिक हैं छोटे-बड़े शमशान घाट
Fri, 21 May 2021 11:42 PM IST
प्राची प्रियम
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Fri, 21 May 2021 11:42 PM IST
सार
राजधानी में इस समय छोटे-बड़े 300 से अधिक शवदाह गृह चल रहे हैं। इसमें कुछ शवदाह गृह का संचालन निगम व कुछ का गांव की समितियां कर रही हैं। यही वजह है कि सभी श्मशान घाटों पर निगम का पूरा अधिकार नहीं है और उनका रखरखाव भी गांव की समितियां कर रही हैं।
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श्मशान घाट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में कोरोना से मौत के आंकड़ों को देखते हुए श्मशान घाटों में सीएनजी शवदाह गृह की संख्या 60 फीसदी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए तीनों नगर निगम अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। दिल्ली में इस समय करीब 18 सीएनजी शवदाह गृह हैं, जिनकी संख्या 30 से अधिक करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए सीएसआर फंड की भी सहायता ली जाएगी।
राजधानी में इस समय छोटे-बड़े 300 से अधिक शवदाह गृह चल रहे हैं। इसमें कुछ शवदाह गृह का संचालन निगम व कुछ का गांव की समितियां कर रही हैं। यही वजह है कि सभी श्मशान घाटों पर निगम का पूरा अधिकार नहीं है और उनका रखरखाव भी गांव की समितियां कर रही हैं।
निगम संचालित श्मशान में भी सीमित संख्या में ही सीएनजी शवदाह गृह लगे हुए हैं। क्योंकि, इसे लगाने के लिए अधिक राशि की जरूरत होती है। ऐसे में पहले से ही खस्ता हालत में चल रहे निगम इसका खर्च सीएसआर फंड के जरिए जुटाने की कोशिश करते हैं।
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उत्तरी निगम के महापौर जयप्रकाश ने बताया कि हाल ही में निगमबोध घाट में छह सीएनजी शवदाह की संख्या कर दी गई है। इससे पहले यहां सिर्फ चार थे। निगम जल्द ही सीएसआर फंड से इंद्रपुरी, पंचकुईयां व मंगलापुरी शवदाह गृह में भी सीएनजी शवदाह की व्यवस्था की कोशिश कर रहा है। इसके लिए सीएसआर फंड जुटाने के लिए भी कोशिश की जा रही है।
दक्षिणी निगम में हैं आठ
दक्षिणी निगम में अकेले ही 40 से अधिक शवदाह गृह हैं। इसमें से आठ शमशान व एक कब्रिस्तान को कोविड शवों की अंत्येष्टि के लिए आरक्षित किया गया है। नेता सदन नरेंद्र चावला के मुताबिक, तीन शमशान में आठ सीएनजी शवदाह गृह हैं। इसमें पंजाबी बाग में चार, सुभाष नगर में दो, ग्रीन पार्क में दो व लोदी रोड में दो विद्युत शवदाह की व्यवस्था है।
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राजधानी में इस समय छोटे-बड़े 300 से अधिक शवदाह गृह चल रहे हैं। इसमें कुछ शवदाह गृह का संचालन निगम व कुछ का गांव की समितियां कर रही हैं। यही वजह है कि सभी श्मशान घाटों पर निगम का पूरा अधिकार नहीं है और उनका रखरखाव भी गांव की समितियां कर रही हैं।
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निगम संचालित श्मशान में भी सीमित संख्या में ही सीएनजी शवदाह गृह लगे हुए हैं। क्योंकि, इसे लगाने के लिए अधिक राशि की जरूरत होती है। ऐसे में पहले से ही खस्ता हालत में चल रहे निगम इसका खर्च सीएसआर फंड के जरिए जुटाने की कोशिश करते हैं।
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उत्तरी निगम के महापौर जयप्रकाश ने बताया कि हाल ही में निगमबोध घाट में छह सीएनजी शवदाह की संख्या कर दी गई है। इससे पहले यहां सिर्फ चार थे। निगम जल्द ही सीएसआर फंड से इंद्रपुरी, पंचकुईयां व मंगलापुरी शवदाह गृह में भी सीएनजी शवदाह की व्यवस्था की कोशिश कर रहा है। इसके लिए सीएसआर फंड जुटाने के लिए भी कोशिश की जा रही है।
दक्षिणी निगम में हैं आठ
दक्षिणी निगम में अकेले ही 40 से अधिक शवदाह गृह हैं। इसमें से आठ शमशान व एक कब्रिस्तान को कोविड शवों की अंत्येष्टि के लिए आरक्षित किया गया है। नेता सदन नरेंद्र चावला के मुताबिक, तीन शमशान में आठ सीएनजी शवदाह गृह हैं। इसमें पंजाबी बाग में चार, सुभाष नगर में दो, ग्रीन पार्क में दो व लोदी रोड में दो विद्युत शवदाह की व्यवस्था है।
इनके अलावा हस्तसाल, सराय काले खां, लालकुआं, द्वारका सेक्टर-24 व बदरपुर में लकड़ियों से अंतिम क्रिया हो रही है। शेष शमशान के लिए निगम ने सीएनजी शवदाह केंद्रों को बढ़ाने पर विचार किया है। क्योंकि, मौत के आंकड़ों में कमी नहीं आ रही है। इसलिए अभी अधिकारियों के साथ मिलकर प्रस्ताव तैयार हो रहा है। हालांकि, अब पहले के मुकाबले अब शवों की संख्या कम हुई है।
पूर्वी निगम में भी बढ़ेगी संख्या
पूर्वी निगम में इस समय चार सीएनजी शवदाह गृह हो गए हैं। इसमें दो कड़कड़डूमा व दो गाजीपुर श्मशान में एक दिन पहले ही शुरू किए गए हैं। महापौर निर्मल जैन ने बताया कि निगम ने ज्वाला नगर व सीलमपुर शमशान के लिए दो- दो सीएनजी शवदाह गृह के लिए टेंडर निकाला है। इसके लिए इच्छुक कंपनी सीएसआर फंड के जरिए निगम की सहायता कर सकती है। इसके बाद पूर्वी निगम में कुल आठ सीएनजी शवदाह गृह हो जाएंगे।
इसलिए होती है सीएनजी शवदाह गृह की जरूरत
सीएनजी शवदाह में गैस के जरिए शव की अंत्येष्टि की जाती है। इस प्रणाली में कम गैस रिलीज होती है, जबकि लकड़ियों से अंतिम संस्कार करने में 400 किलो तक लकड़ियों की आवश्यकता होती है। लकड़ियों के जलने से उत्पन्न धुएं से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है, जबकि सीएनजी प्रणाली में प्रदूषण की मात्रा कम होती है। सीएनजी शवदाह गृह में 40 से 45 मिनट में ही अंतिम संस्कार हो जाता है।
पूर्वी निगम में भी बढ़ेगी संख्या
पूर्वी निगम में इस समय चार सीएनजी शवदाह गृह हो गए हैं। इसमें दो कड़कड़डूमा व दो गाजीपुर श्मशान में एक दिन पहले ही शुरू किए गए हैं। महापौर निर्मल जैन ने बताया कि निगम ने ज्वाला नगर व सीलमपुर शमशान के लिए दो- दो सीएनजी शवदाह गृह के लिए टेंडर निकाला है। इसके लिए इच्छुक कंपनी सीएसआर फंड के जरिए निगम की सहायता कर सकती है। इसके बाद पूर्वी निगम में कुल आठ सीएनजी शवदाह गृह हो जाएंगे।
इसलिए होती है सीएनजी शवदाह गृह की जरूरत
सीएनजी शवदाह में गैस के जरिए शव की अंत्येष्टि की जाती है। इस प्रणाली में कम गैस रिलीज होती है, जबकि लकड़ियों से अंतिम संस्कार करने में 400 किलो तक लकड़ियों की आवश्यकता होती है। लकड़ियों के जलने से उत्पन्न धुएं से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है, जबकि सीएनजी प्रणाली में प्रदूषण की मात्रा कम होती है। सीएनजी शवदाह गृह में 40 से 45 मिनट में ही अंतिम संस्कार हो जाता है।