72 सालों में तीसरी बार सबसे गर्म मार्च: 30 दिनों में बढ़ा 14.6 डिग्री तापमान, नहीं हुई बारिश, अप्रैल में भी होगा बुरा हाल
मौसम विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर, उत्तर-पश्चिम, मध्य व पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान रहेगा। इस बीच इन हिस्सों में सामान्य से कम बारिश भी हो सकती है।
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मौसम के बदले मिजाज से उत्तर व मध्य भारत लू की चपेट में है। दिल्ली-एनसीआर में हर दिन तल्ख होते सूरज के तेवर से गर्मी नए रिकॉर्ड बना रही है। बीते 30 दिनों में तापमान में 14.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई है।
मौसम विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर, उत्तर-पश्चिम, मध्य व पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा तापमान रहेगा। इस बीच इन हिस्सों में सामान्य से कम बारिश भी हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, 28 फरवरी को अधिकतम तापमान 25.3 व न्यूनतम 9.6 डिग्री सेल्सियस था। एक मार्च को यह 26 हो गया था। 10 मार्च को अधिकतम 30 और न्यूनतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस रहा। 15 मार्च को 34.7 व 18.9 तक चढ़ा। 30 मार्च को 39.6 डिग्री सेल्सियस पारा पहुंचने पर इस सीजन का सबसे गर्म व बीते 72 साल में तीसरी बार सबसे गर्म दिन रहा था।
दक्षिण पाकिस्तान, राजस्थान और गुजरात की गर्म हवा बढ़ा रही गर्मी
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा के मुताबिक, इस समय दक्षिण पाकिस्तान, राजस्थान और गुजरात से आने वाली गर्म हवा समूचे उत्तर भारत व मध्य भारत को गर्म कर रही है, जिससे जम्मू से लेकर मध्य प्रदेश तक लू की चपेट में है। लंबे समय से पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय नहीं है। इस वजह से तापमान में कमी नहीं आ रही है।
आमतौर पर कई बार इस मौसम में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल जाता है, लेकिन इन दिनों लंबे समय से बारिश नहीं हो रही है। इस वजह से तापमान बढ़ रहा है।
अप्रैल में रहेगा बुरा हाल
मौसम विभाग की तरफ से बृहस्पतिवार जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में देश में औसत वर्षा सामान्य (दीर्घावधि औसत/ एलपीए का 89-111फीसदी) होने की संभावना है, लेकिन उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने के आसार हैं। वहीं, पश्चिमी और पूर्वोत्तर के कुछ भागों में सामान्य से लेकर अधिक बारिश हो सकती है। 1961-2010 के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के दौरान देशभर में वर्षा का दीर्घावधि औसत करीब 39.3 मिलीमीटर है।
प्रशांत व हिंद महासागरों में समुद्र की सतह की हलचल प्रभावित करती है भारत की जलवायु
प्रशांत व हिंद महासागरों में समुंद्र की सतह के तापमान की स्थिति में परिवर्तन से भारतीय जलवायु को प्रभावित करती है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में ला-नीना की स्थिति है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि ला-नीना की स्थिति पूरे पूर्वानुमान अवधि के दौरान जारी रहने की संभावना है। वहीं, हिंद महासागर में हिंद महासागर द्विध्रुव(इंडियन ऑशन डाइपॉल) की स्थिति है, जो कि पूरे गर्मी के मौसम में जारी रहने की संभावना है। यहां बता दें कि हिंद महासागर पांच महासागरों में सबसे गर्म महासागर है। इसके बाद प्रशांत महासागर सबसे गर्म है। इन दिनों पूर्वी दिशा से चलने वाली हवाओं के कारण प्रशांत महासागर की पानी हिंद महासागर में मिलना शुरू होता है। इससे समुंद्र के ऊपरी सतह पर गर्म होती है। ऐसे में हिंद महसागर के पूर्वी दिशा इसका प्रभाव भारतीय मानसून पर भी पड़ता है।
मार्च में अधिकतम तापमान के आंकड़े
1973- 39.6 डिग्री सेल्सियस
2021- 40.1 डिग्री सेल्सियस
2022- 39.6 डिग्री सेल्सियस