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एम्स में लगी रोक: गैर कोविड मरीजों की फिर आई आफत, किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस मुश्किल
Tue, 11 Jan 2022 01:23 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 11 Jan 2022 01:23 AM IST
सार
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डायलिसिस पर रोक लगी है। यहां मरीजों के लिए विभाग के बाहर ही एक जानकारी चस्पा कर दी गई है जिसमें 11 अस्पतालों के नाम साझा करते हुए सलाह दी है कि मरीज एम्स के बाहर यहां सेवा प्राप्त कर सकते हैं।
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Kidney Transplant
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की नई लहर ने एक बार फिर से गैर कोविड मरीजों को मुश्किलों में डाल दिया है। इनदिनों दिल्ली के ज्यादातर अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना संक्रमण की चपेट में हैं। वहीं गैर कोविड मरीजों के लिए यहां चिकित्सीय सेवाओं पर भी असर पड़ा है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी किडनी रोगियों के लिए हो रही है जिन्हें हर महीने डायलिसिस लेना पड़ता है।
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नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में डायलिसिस पर रोक लगी है। यहां मरीजों के लिए विभाग के बाहर ही एक जानकारी चस्पा कर दी गई है जिसमें 11 अस्पतालों के नाम साझा करते हुए सलाह दी है कि मरीज एम्स के बाहर यहां सेवा प्राप्त कर सकते हैं। इनमें केवल दो ही जगहों पर निशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिलती है। ऐसे में एम्स आने वाले गरीब मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि बीते दो साल से यहां काफी बुरे हालात हैं। जब भी कोई लहर आती है प्रबंधन स्वास्थ्य सेवाओं को शट डाउन करना शुरू कर देता है। फिर चाहे वह ट्रामा सेंटर पर असर हो या फिर अन्य विभागों के रोगियों पर। उन्होंने कहा कि एम्स में अब तक कोविड मामलों को लेकर एक निश्चित ठिकाना अब तक नहीं बन पाया है। नई लहर के नाम पर मरीजों की भर्ती रोक दी है। ओपीडी में भी नियम शर्ते लागू कर दी गई हैं। ऐसे में अगर मरीज इलाज के लिए कहां जाएगा? एम्स के ही पास सफदरजंग अस्पताल में भी डायलिसिस को लेकर जब जानकारी मांगी गई तो पता चला कि यहां पहले की तरह सेवाएं जारी हैं। चूंकि इनके पास सीमित संसाधन हैं इसलिए नियमित तौर पर यहां डायलिसिस किया जा रहा है।
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