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हजारों लोगों के मरने पर भी किसी को फिक्र नहीं, भगवान इस देश को बचाए

Wed, 19 May 2021 01:40 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 01:40 AM IST
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No one is bothered even after thousands of people die, may God save this country
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने भारत में स्पूतनिक वी टीके के उत्पादन में रुचि नहीं लेने पर केंद्र सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार के अधिकारी जमीनी हकीकत को नहीं समझ पा रहे और हजारों लोगों के मरने के बावजूद अपनी आरामगाहों में रह रहे हैं। भगवान ही इस देश को बचाए। अदालत ने दिल्ली की पैनासिया बायोटेक की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं। साथ ही केंद्र को नोटिस जारी करते हुए इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए अगली सुनवाई 31 मई तय की है।
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न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने महामारी के हालात से निपटने को लेकर केंद्र के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा भगवान इस देश को बचाए। पीठ ने कहा कि स्पूतनिक वी टीके के उत्पादन के लिए पैनासिया बायोटेक की रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ साझेदारी को इस अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत ने कहा यहां इसका उपयोग हो और ऐसे मामलों में उच्चाधिकारियों से 30 मिनट के भीतर निर्देश मिल जाने चाहिए। जब सरकार के पास लाखों टीकों की खुराक प्राप्त करने का अवसर है तब भी कोई दिमाग नहीं लगा रहा जबकि इसे एक अवसर के तौर पर अपनाना चाहिए।
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पीठ ने कहा हर दिन सभी अदालतें आपसे नाराजगी जता रही हैं और तब भी आप नहीं जाग रहे। उन्होंने कहा कौन सा नौकरशाह आपको निर्देश दे रहा है। क्या उसे हालात की जानकारी नहीं है। पीठ ने कहा क्या आपका अफसर देश में इतनी बड़ी संख्या में हो रही मौतों को नहीं देख पा रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र के रुख की आलोचना करते हुए पीठ ने कहा आपके पास टीकों की इतनी कमी है और आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे। इतने नकारात्मक मत होइए। यह आग भड़काने जैसा है और किसी को कोई फिक्र नहीं है। वहीं, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह ने कहा कि स्पूतनिक वी के निर्माण से देश को कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि यह आरडीआईएफ द्वारा वैश्विक आपूर्ति के लिए होगा।
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पैनासिया बायोटेक कंपनी ने अपने नए आवेदन में मध्यस्थ अवार्ड जारी करने की मांग करते हुए कहा कि उसे मानवता के व्यापक हित में जल्द से जल्द धन की जरूरत है। कंपनी की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा अवार्ड राशि जारी नहीं की जाती है तो सबसे तेज गति से वैक्सीन के निर्माण की पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है और देरी हो सकती है जो मानवता के व्यापक हित में नहीं होगी।
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