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Monsoon Session Delhi Assembly : सेवा विभाग से नहीं मिला जवाब, सदन की कमेटी गठित

Wed, 06 Jul 2022 05:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 06 Jul 2022 05:04 AM IST
सार

48 घंटे के भीतर देनी होगी रिपोर्ट, राखी बिड़लान ने संभाली विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी।

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Monsoon Session Delhi Assembly: No reply received from service department, committee constituted
The Delhi Assembly file pic - फोटो : Agency

विस्तार

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल गैर मौजूदगी में कार्यभार संभालते हुए उपाध्यक्ष राखी बिड़लान ने सेवा विभाग के प्रति मंगलवार को कड़ा रुख अतिख्यार किया। बिड़लान ने विधायकों के सवालों के सेवा विभाग से जवाब न मिलने से जुड़े मसले पर सदन की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी को 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।

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आप विधायक राजेश गुप्ता ने सर्विस विभाग की ओर से विधायकों के सवालों का जवाब नहीं देने का मुद्दा उठाया था। इस मौके पर राखी बिड़लान ने कहा कि सर्विस विभाग कर्मचारियों के ट्रासंफर, पोस्टिंग आदि का मसला संविधान के तहत दिल्ली की चुनी हुई सरकार के अधीन आता है। इस वजह से सर्विस विभाग भी दूसरे विभागों की तरह विधानसभा के प्रति जवाबदेह है। ऐसा न करना सांविधानिक व्यवस्था, चुने हुए विधायकों और विधानसभा का अपमान है।
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राखी बिड़लान ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर भी जो जानकारी ली जा सकती है वह जानकारी भी इस विधानसभा को सर्विसेज विभाग क्यों नहीं दे सकती है? इस मुद्दे पर उन्होंने विधायक राजेश गुप्ता, सोमनाथ भारती और आतिशी की तीन सदस्यीय समिति बनाई। कमेटी मौजूदा स्थिति, सांविधानिक व प्रशासनिक व्यवस्था समेत दूसरे सभी मसलों का परीक्षण करके 48 घंटे में इस पूरे मामले पर एक रिपोर्ट बनाकर देगी। इसमें वर्ष 2015 से पहले इस तरह के सवालों पर सर्विस विभाग की ओर से दिए जाने वाले जवाब को भी शामिल किया जाएगा।
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राखी बिड़लान ने बताया कि विधायकों ने सर्विस विभाग से दिल्ली सरकार में ग्रेड चार के रिक्त पदों, अधिकारियों को एसडीएम का कार्यभार सौंपने, प्रत्येक विभाग में स्वीकृत पदों की रिक्तियां जैसे सवाल पूछे हैं, लेकिन सर्विस विभाग कहता है कि वह विधानसभा के प्रश्न के बारे में उत्तर नहीं दे सकता है। 

विभाग ने ये दिया तर्क
विभाग तर्क देता है कि सर्विसेज का मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 21 मई, 2015 को जारी अधिसूचना के तहत एक आरक्षित विषय है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए विभाग विधानसभा प्रश्न के बारे में उत्तर नहीं दे सकता है।

मंदिरों को तोड़ने संबंधित मसले पर सदन में निंदा प्रस्ताव पारित

दिल्ली विधानसभा में दिल्ली के 53 मंदिरों को तोड़ने से जुड़े एक मसले पर चर्चा हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष ने केंद्र सरकार की इस नीति की तीखी आलोचना की और योजना को कटघरे में खड़ा किया। सदन ने इस मसले में विधायक दिलीप पांडेय की तरफ से पेश निंदा प्रस्ताव भी पारित किया।

पांडेय ने सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार से राजधानी के 53 मंदिरों को तोड़ने की अनुमति मांगी है। यह एक गंभीर मसला है। इससे भाजपा की चाल, चरित्र और चेहरा उजागर होता है। पांडेय के मुताबिक, इससे पहले भाजपा ने बनारस व अयोध्या में मंदिर तोड़े थे। अब यही काम वह दिल्ली में करने की कोशिश कर रही है। इस मामले में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से देश व दिल्ली की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए आप विधायक वीरेंद्र सिंह कादियान ने कहा कि भाजपा के किसी भी विधायक व सांसद ने मंदिर का निर्माण नहीं कराया है, जबकि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में कई मंदिर बनवाने का काम किया है। आप विधायक मंदिर बनाते रहेंगे और भाजपा वाले तुड़वाते रहेंगे। वहीं, आप विधायक आतिशी ने कहा कि भाजपा के भ्रष्टाचार इतना ज्यादा है कि यह मकान, दुकान और छज्जे पर नहीं रुके, बल्कि मंदिरों को कहा कि अगर तुमने हमें अपने दान पात्र से पैसा नहीं दिया तो हम तुम्हारे मंदिर पर भी बुलडोजर चला देंगे। 

श्रमिकों के लिए कल्याणकारी गतिविधियों पर कम किया खर्च

भवन और निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड ने अपनी आय काे जरूरी गतिविधियों के मद में खर्च कर दिया। राशि का उचित इस्तेमाल न होने और आयकर के भुगतान में देरी व ब्याज के मद में 97.64 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा। इस राशि का श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जा सकता था। मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखाकार परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में ये बातें सामने आईं।

रिपोर्ट में कल्याणकारी योजना को श्रमिकों तक लाभ पहुंचाने में भी कम खर्च की ओर से इशारा किया गया है। दिल्ली भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड का गठन सितंबर 2002 में किया गया था। इसका उद्देश्य उपकरों के मद में एकत्रित राशि का निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य की देखभाल सहित दूसरी सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया गया। 

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की ओर से विधानसभा में 31 मार्च 2018 को पेश रिपोर्ट में कहा गया कि आयकर और ब्याज के रूप में 97.64 करोड़ रुपये के भुगतान से भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों को हितों से वंचित किया गया। सामाजिक सुरक्षा और दूसरे कल्याणकारी उपायों की उन्हें काफी जरूरत होती है। मार्च 2019 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए विधानसभा में पेश की गई एक अन्य ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बोर्ड ने अपने अनिवार्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कोई दीर्घकालिक योजना या वार्षिक योजना तैयार नहीं की। वर्ष 2002-19 के दौरान बोर्ड को उपकर के रूप में 3,273.64 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उपकर पर ब्याज और पंजीकरण शुल्क में से केवल 182.88 करोड़ रुपये (5.59 प्रतिशत) निर्माण श्रमिकों के कल्याण पर खर्च किए गए। उपकर और शुल्क के तौर पर मार्च 2019 तक ब्याज 2,709.46 करोड़ रुपये एकत्रित हुए। 

कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए निर्माण श्रमिकों को बोर्ड के साथ पंजीकृत होना जरूरी है। हालांकि, बोर्ड ने श्रमिकों के पंजीकरण में बढ़ोतरी या निर्माण श्रमिकों की पहचान के लिए कोई सर्वेक्षण नहीं किया। मार्च 2019 तक अनुमानित 10 लाख निर्माण श्रमिकों में से केवल 17,339 (1.7 प्रतिशत) ही बोर्ड के साथ पंजीकृत थे, ऐसे में 98 प्रतिशत श्रमिक बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं के लाभों से वंचित रह गए।

पंजीकृत श्रमिकों के मामले में भी प्रदान किए गए लाभ सीमित थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड की ओर से लागू 15 कल्याणकारी योजनाओं में से छह पर कोई खर्च नहीं हुआ था। बोर्ड का प्रशासनिक खर्च भी कुल खर्च के पांच प्रतिशत की निर्धारित सीमा से बहुत अधिक था। 2016-17 में 14.42 प्रतिशत और 2018-19 में 12.20 प्रतिशत था।

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