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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस विशेष: पढ़ाई छूटी, बाल विवाह फिर बनी मजदूर...कोरोना ने बेटियों को किया अधिकारों से दूर

Tue, 12 Oct 2021 02:10 AM IST
नोएडा ब्यूरो परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Tue, 12 Oct 2021 02:10 AM IST
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Missed studies, child marriage again became a laborer... Corona took away daughters from rights
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस - फोटो : amar ujala

सर, कोरोना घातक है, लेकिन हमारी लाचारी कुछ और भी हैं... लॉकडाउन से स्कूल छूट गया। मिड डे मील न मिलने से 10 साल की बहन के साथ पेट भरने के लिए सड़कों पर आना पड़ा। रात में रोटियों के लिए सड़कों पर भटकते हैं।

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डेढ़ साल से यही दिनचर्या है...अब स्कूल खुल गए, लेकिन मम्मी की तबियत ठीक नहीं है। इसलिए जाना शुरू नहीं किया है। उन दिनों को कैसे भूल सकती हूं... दिल्ली के विकास नगर इलाके में रहने वाली 14 साल की रेणु (बदला नाम) से जब बालिका दिवस को लेकर सवाल पूछा तो वह मुस्कुराती हुई बोली, हमारा तो रोज दिवस रहता है।
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रोशनी (13, बदला नाम) की कहानी तो और भी दर्दनाक है। महामारी से पहले उसका डॉक्टर बनने का सपना था। वह स्कूल में टॉप कर रही थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान यौन शोषण की शिकार हुईं। घर में रहने से ज्यादा मां के साथ फैक्ट्री में जाकर मजदूरी करना ज्यादा सुरक्षित महसूस करती, क्योंकि घर में पिता ही उसका शोषण करता था। रोशनी का दर्द उस वक्त सामने आया जब एनजीओ की टीम सर्वे करने के लिए उनके यहां पहुंची।
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सर्वे में सामने आई बेटियों की हकीकत
दीपालय, मार्था फैरेल फाउंडेशन, शेड्स ऑफ हेप्पीनेस फाउंडेशन और प्रोत्साहन इंडिया फांउडेशन ने मिलकर दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 11 से 18 वर्ष की 416 बालिकाओं से बातचीत करते हुए यह सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट भी प्रकाशित हो चुकी है।

रिपोर्ट में एक कविता भी लिखी है जिसका मुख्य भाग है, ‘न जाने ये रीत किस इंसान ने क्यूं बनाई, हर रोज चढ़ रही बेटी की बलि, बस बनने के लिए कहानी कोई नई।’

रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी ने बेटियों को उनके अधिकारों से और दूर कर दिया है। पिछले साल जब लॉकडाउन लगा तो लड़कों से ज्यादा बेटियों की शिक्षा पर असर पड़ा। स्कूल छूट गए और घर पहुंचने के बाद मां या पिता के साथ काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। यौन शोषण और बाल विवाह जैसे गंभीर मामले तक सामने आए हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में 13 फीसदी किशोरियों ने स्कूल बंद होने के बाद यौन शोषण की शिकार होने की पुष्टि की। 17 फीसदी बच्चियों ने स्कूल बंद होने के बाद बाल विवाह कराने की जानकारी दी। वहीं, 19 फीसदी बालिकाओं ने बीते डेढ़ साल से शिक्षा छोड़ मजदूरी करने और 79 फीसदी ने फिर से स्कूल जाने की इच्छा जताई।

सर्वे के दौरान 41 फीसदी बच्चियों ने कहा कि मीड डे मिल से अच्छा भोजन घर में हो सकता है। 55 फीसदी किशोरियों ने यहां तक कहा कि पिछले और इस साल लॉकडाउन के दौरान घर में उन्होंने लिंग भेदभाव का सामना किया।

दिल्ली में लिंगानुपात का स्तर भी कमजोर
बालिकाओं को लेकर इसी साल केंद्र सरकार ने चिट्ठी भेजते हुए दिल्ली में लिंगानुपात लगातार लड़खड़ाने की बात कही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की इस चिट्ठी में असेस जेंडर वाइस्ड सेक्स सलेक्शन रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत में लिंगानुपात 2018 में मामूली रूप से घटकर 899 हो गया, जो 2011 में 906 था।


यह गिरावट दिल्ली में सबसे ज्यादा रही क्योंकि यहां लिंगानुपात साल 2012-14 में 876 की तुलना में साल 2016-2018 में घटकर 844 रह गया था। इससे पहले साल 2013-15 में लिंगानुपात 869, 2014-16 में 857 और 2015-16 में 850 था।

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