फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   MCD submits report to NGT claims better ash management at two waste to energy plants in Delhi

Delhi: MCD ने NGT को सौंपी रिपोर्ट, दिल्ली के दो वेस्ट-टु-एनर्जी प्लांटों में राख के बेहतर प्रबंधन का दावा

Sun, 22 Feb 2026 06:35 AM IST
Digvijay Singh नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 22 Feb 2026 06:35 AM IST
सार

दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर अहम कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में दक्षिण दिल्ली के दो कचरा-से-ऊर्जा (वेस्ट-टू-एनर्जी) संयंत्रों से निकलने वाली राख (ऐश) के उपयोग और निस्तारण की जानकारी दी गई है।

विज्ञापन
MCD submits report to NGT claims better ash management at two waste to energy plants in Delhi
एमसीडी मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर अहम कदम उठाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में दक्षिण दिल्ली के दो कचरा-से-ऊर्जा (वेस्ट-टू-एनर्जी) संयंत्रों से निकलने वाली राख (ऐश) के उपयोग और निस्तारण की जानकारी दी गई है। एमसीडी ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह पर्यावरण की स्वच्छता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण दिल्ली में दो प्रमुख वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट संचालित हो रहे हैं। इसमें तेहखंड वेस्ट टू इलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट लिमिटेड और तिमारपुर ओखला वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड है।

विज्ञापन


रिपोर्ट के अनुसार, ओखला के पास स्थित तेहखंड प्लांट प्रतिदिन लगभग 2000 टन कचरा प्रोसेस करता है, जो पूरी तरह एमसीडी से प्राप्त होता है। वर्ष 2025 में इस प्लांट ने करीब 6.29 लाख टन कचरे का निस्तारण किया। इस प्रक्रिया से 10,390 टन फ्लाई ऐश और 66,155 टन बॉटम ऐश उत्पन्न हुई। प्लांट प्रबंधन का दावा है कि वह 100 प्रतिशत राख का उपयोग ईंट निर्माण, सड़क निर्माण और कंक्रीट सड़कों के लिए ग्रेनुलर सब-बेस (जीएसबी) सामग्री के रूप में कर रहा है। हालांकि, कुछ अनुपयोगी इनर्ट सामग्री का पूरा उपयोग अभी संभव नहीं हो पा रहा है और उसे लैंडफिल में डालना पड़ रहा है। प्लांट ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के निर्देशों का पालन करते हुए नियमित रिपोर्ट भी जमा की है।
विज्ञापन


वर्ष 2025 में इसने 6.28 लाख टन कचरे का निस्तारण
रिपोर्ट में बताया कि दूसरा संयंत्र, तिमारपुर ओखला वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, मथुरा रोड पर स्थित है। यह प्लांट रोजाना लगभग 1950 टन कचरा संभालता है, जिसमें से 1550 टन कचरा एमसीडी से आता है। वर्ष 2025 में इसने 6.28 लाख टन कचरे का निस्तारण किया। इस दौरान 16,401 टन फ्लाई ऐश और 49,954 टन बॉटम ऐश उत्पन्न हुई। यहां वर्ष 2015 से ऐश आधारित ईंट बनाने की मशीन लगी है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 20,000 ईंट बनाने की है। हालांकि, व्यावसायिक कारणों से इसे पूरी क्षमता से नहीं चलाया जा सका। वर्तमान में यह प्लांट लगभग 20 प्रतिशत फ्लाई ऐश और 40 प्रतिशत बॉटम ऐश का उपयोग ईंट, पेवर ब्लॉक, सड़क निर्माण और जीएसबी में कर रहा है। शेष राख और इनर्ट सामग्री को ओखला लैंडफिल में डाला जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्लांट संचालकों पर राख डालने के लिए शुल्क लगेगा
रिपोर्ट के अनुसार, राख की डंपिंग कम करने के लिए प्लांट संचालकों पर राख डालने के लिए शुल्क लगाया गया है, ताकि वे इसके वैकल्पिक उपयोग के उपाय तलाशें। साथ ही, यह भी तय किया गया है कि कचरे से निकलने वाली इनर्ट सामग्री 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। बची हुई राख का उपयोग ओखला लैंडफिल में सड़क निर्माण और कचरे को ढकने के लिए किया जा रहा है, जिससे मीथेन गैस उत्सर्जन और दुर्गंध जैसी समस्याओं में कमी आती है। एमसीडी के कार्यकारी अभियंता ने शपथपत्र में कहा है कि पर्यावरण संरक्षण उनकी पहली प्राथमिकता है और सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed