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दर्द: नहीं सोने देती हैं बच्चों की सिसकियां, मां के इलाज के लिए पांच बच्चों को काबुल छोड़कर आईं मरियम, अब लौटना नहीं चाहतीं

Wed, 18 Aug 2021 01:00 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 18 Aug 2021 01:00 AM IST
सार

वकालत के पेशे से जुड़ी मरियम 15 दिन पहले अपनी मां के इलाज के लिए अफगानिस्तान के काबुल से यहां फोर्टिस अस्पताल पहुंची थीं। पांचों बच्चों के रोने की गूंजती आवाज सोने नहीं देती। उहापोह से जूझ रही महिला की दरख्वास्त है कि कोई उनके परिवार को यहां लाने में सहयोग करे। वहां लौटना खतरे से खाली नहीं। 

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Maryam left five children in Kabul of Afghanistan for the treatment of their mother
मयरियम का भाई फरहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अफगानिस्तान के काबुल पर तालिबान के कब्जे ने इंसाफ की नुमाइंदगी करने वाली मरियम की जिंदगी बदल दी। मोबाइल को देखती हुई जब नींद महसूस होती है तो बच्चों की सिसकियां सोने नहीं देती। वकालत के पेशे से जुड़ी मरियम 15 दिन पहले अपनी मां के इलाज के लिए फोर्टिस अस्पताल पहुंची थीं। 
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पांचों बच्चों के रोने की गूंजती आवाज सोने नहीं देती। उहापोह से जूझ रही महिला की दरख्वास्त है कि कोई उनके परिवार को यहां लाने में सहयोग करे। वहां लौटना खतरे से खाली नहीं। मरियम के साथ उनकी मां जंजीरा और भाई फरहान भी हैं। 
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फरहान ने बताया कि पढ़ाई के बाद मैं दिल्ली आया, लेकिन अब लौटने की राह में कई अड़चनें दिखने लगी हैं। रुपये धीरे-धीरे कम हो रहे हैं, वीजा खत्म होने तक अगर परिवार के सदस्य नहीं पहुंचे तो क्या करेंगे। बकौल मरियम, मैं वहां नहीं लौट सकती।
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न तो महिलाओं को बाहर निकलने की इजाजत है और न ही पढ़ाई की। मैं वकालत तो कर रही थी, लेकिन मुवक्किल भी छुपते हुए पहुंचते थे। बैंक खाते में जमा रकम भी मिले न मिले, पता नहीं। अपने पति के भरोसे पांच बच्चों को छोड़कर आई हैं। पिछले तीन दिन से छोटे दो बच्चे लगातार रो रहे हैं। 
 

सबसे बड़ी बेटी 12 साल की है, लेकिन पापा के भरोसे कब तक रहेंगे। उन्होंने भारत सरकार से वीजा नियमों में ढील देने की मांग करते हुए गुहार लगाई है कि वहां फंसे परिवारों को अन्य सदस्यों से मिलवाने में की पहल करती है तो इंसानियत के लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं होगी। कम होते रुपये पर मरियम ने यहां की बढ़ती महंगाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मुश्किल वक्त में उन्हें थोड़ी राहत मिलनी चाहिए। 
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