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मनीष सिसोदिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र: कहा- बिना वैक्सीनेशन के परीक्षा के लिए छात्रों को न बुलाएं

Tue, 25 May 2021 05:00 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 25 May 2021 05:00 PM IST
सार

दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने शैक्षिक प्रदर्शन (दसवीं की बोर्ड परीक्षा के अंक, 11वीं के अंक और बारहवीं में अब तक स्कूल द्वारा किए गए आंकलन) के आधार पर रिजल्ट निकाले जाने की सिफारिश की है।

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Manish Sisodia wrote a letter to Union Minister of Education said do not call students for examination without vaccination
मनीष सिसोदिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बारहवीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के लिए वैक्सीन लगाने या परीक्षा रद्द करने का सुझाव केंद्र सरकार को भेजा है। सिसोदिया ने मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र के माध्यम से अपने सुझाव भेजे। 

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उपमुख्यमंत्री का कहना है कि बच्चों को वैक्सीन लगाना संभव न हो तो बारहवीं के बच्चों का मूल्यांकन उनके शैक्षिक प्रर्दशन के आधार पर किया जाए। दिल्ली के शिक्षा मंत्री सिसोदिया ने शैक्षिक प्रदर्शन (दसवीं की बोर्ड परीक्षा के अंक, 11वीं के अंक और बारहवीं में अब तक स्कूल द्वारा किए गए आंकलन) के आधार पर रिजल्ट निकाले जाने की सिफारिश की है। जो बच्चे इस रिजल्ट से असंतुष्ट हो उनके लिए भविष्य में स्थितियां सामान्य होने पर विकल्प बी के तहत परीक्षा कराने का विकल्प खुला रखा जाए।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को लिखे पत्र में सिसोदिया ने कहा कि 17 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 95 फीसदी बच्चों को कोविशिल्ड या कोवाक्सिन दी जा सकती है, इस पर विशेषज्ञों से राय ली जाए। अगर विशेषज्ञ 12वीं कक्षा के छात्रों को कोविशिल्ड या कोवाक्सिन देने के खिलाफ सुझाव देते हैं, तो केंद्र सरकार को फाइजर वैक्सीन खरीदनी चाहिए जिसे 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए मंजूरी दी गई है।
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उन्होंने कहा यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करें तो परीक्षा प्रक्रिया में शामिल बारहवीं कक्षा के छात्रों व शिक्षकों को  तीन से चार सप्ताह के भीतर टीका लगाया जा सकता है। यदि सरकार को लगता है कि वर्तमान में छात्रों का टीकाकरण करना संभव नहीं है, तो परीक्षा रद्द कर दी जानी चाहिए।
 

सिसोदिया ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि सरकार को 2022 परीक्षाओं के परीक्षा प्रारूप पर चर्चा शुरू करने के लिए अगले महीने उच्च स्तरीय बैठक बुलानी चाहिए। सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अगले साल की तैयारी शुरु कर देनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बोर्ड परीक्षा आयोजित करने को लेकर 25 मई तक विस्तृत सुझाव मांगे थे।

बारहवीं की परीक्षाओं को कोरोना महामारी की दूसरी लहर को देखते हुए स्थगित कर दिया गया था। सीबीएसई ने 15 जुलाई से 26 अगस्त के बीच परीक्षा आयोजित करने और सितंबर में परिणाम घोषित करने का प्रस्ताव रखा है।

बोर्ड ने दो विकल्प भी प्रस्ताव केरुप में दिए हैं। पहले से तय केंद्रों पर 19 प्रमुख विषयों के लिए नियमित परीक्षा आयोजित करना या स्कूलों में छोटी अवधि की परीक्षा आयोजित करना। सिसोदिया ने मंगलवार को अपने पत्र में कहा केंद्र द्वारा प्रस्तावित दो विकल्प कोरोना वायरस के नए तनाव से उत्पन्न चुनौतियों का जवाब नहीं हैं। छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार रहने के लिए कहना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि घातक भी है। इसलिए हमें टीकाकरण या परीक्षा रद्द करने पर विचार करना चाहिए।

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