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Delhi: अपहरण के मामले में उम्रकैद का दोषी 26 साल बाद गिरफ्तार, पहचान छुपाकर देहरादून में रहता था अमित यादव
Tue, 18 Aug 2026 06:52 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 18 Aug 2026 06:52 AM IST
सार
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 31 साल पुराने अपहरण मामले में उम्रकैद के दोषी अमित यादव को 26 साल बाद देहरादून से गिरफ्तार किया है। 57 वर्षीय यादव वहां पहचान बदलकर बिल्डर के रूप में रह रहा था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 31 साल पुराने अपहरण मामले में उम्रकैद के दोषी अमित यादव को 26 साल बाद देहरादून से गिरफ्तार किया है। 57 वर्षीय यादव वहां पहचान बदलकर बिल्डर के रूप में रह रहा था। यादव उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सैदपुर गांव का निवासी है। विशेष पुलिस आयुक्त एचजीएस धालीवाल ने बताया कि यादव को 1999 में दोषी ठहराया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी 2000 में उसे एक महीने की अंतरिम जमानत दी थी। जमानत अवधि समाप्त होने पर उसने आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गया। पुलिस ने वर्ष 2000 में उस पर 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।
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यह मामला सितंबर 1995 में ऋषि सेठी के अपहरण से जुड़ा है। अपहरणकर्ताओं ने सेठी के परिवार से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। 16 सितंबर 1995 को यादव को मेरठ में 10 लाख रुपये की फिरौती लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने गाजियाबाद में एक किराये के मकान से सेठी को सुरक्षित बचाया था।
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जेल अधिकारियों या दिल्ली पुलिस के पास यादव की कोई तस्वीर नहीं थी। अपराध शाखा ने क्राइम रिकॉर्ड कार्यालय और फिंगरप्रिंट ब्यूरो की मदद ली। 1999 में दर्ज उसके बायोमीट्रिक रिकॉर्ड से पहचान स्थापित हुई। टीम को जानकारी मिली कि यादव देहरादून में रह रहा था। इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम ने 13 अगस्त को देहरादून से उसे गिरफ्तार किया।
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फरार होने के बाद का जीवन
यादव ने वर्ष 2000 में फरार होने के बाद गाजियाबाद का किराये का मकान छोड़ दिया। उसने अपने सभी पुराने संपर्क खत्म कर दिए और पैतृक संपत्ति भी बेच दी। वह ऋषिकेश गया और फिर वर्ष 2001 में देहरादून चला गया। वहां उसने अपनी पहचान बदली और निर्माण कारोबार में बिल्डर बन गया। गिरफ्तारी के बाद यादव को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।