लो फ्लोर बस खरीद मामला : दिल्ली में चढ़ा राजनीतिक तापमान, वाक-युद्ध तेज
- दिल्ली सरकार ने विपक्ष के आरोपों को नकारा
- भाजपा और कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग
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लो-फ्लोर बसों की खरीद मामले में सियासी पारा चढ़ गया है। पक्ष-विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहा है। एक ओर जहां दिल्ली सरकार ने केंद्र को घेरा है तो, भाजपा और कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। बृहस्पतिवार को दिनभर यह मामला सुर्खियों में रहा।
आरोपों में कतई सच्चाई नहीं, केंद्र कर रहा परेशान : दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया कि भाजपा दिल्लीवासियों को नई बसों की सुविधा देने से रोकना चाहती है। पहले भी केंद्र सरकार सीबीआई का इस्तेमाल कर दिल्ली सरकार को परेशान करने का विफल प्रयास कर चुकी है। आरोपों में सच्चाई न होने की वजह से केंद्र को सफलता नहीं मिल सकी। दिल्ली सरकार बदनाम करने की राजनीति में विश्वास नहीं करती है। सरकार केवल सुशासन में विश्वास करती है और इसके लिए प्रतिबद्ध है।
पहले दिन से ही भ्रष्टाचारियों को बचा रहे हैं मुख्यमंत्री : भाजपा
भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा किविधानसभा में मुद्दा उठाए जाने के बाद से मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। मार्च में यह मामला विधानसभा में उठाया गया था और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई गई थी, परंतु मुख्यमंत्री और उनकी सरकार ने जवाब देने के बजाय मामले को दबाने के लिए हर हथकंडा आजमाया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने उपराज्यपाल की ओर से गठित समिति की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया, जिसमें सीबीआई जांच का आदेश देने के लिए पर्याप्त आधार है। 5000 करोड़ रुपये के बस घोटाले ने मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ योद्धा होने की सावधानीपूर्वक तैयार की गई छवि को धूमिल किया है। वे पहले दिन से ही भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए उनके साथ खड़े नजर आए हैं।
उन्होंने मांग की कि परिवहन मंत्री और डीटीसी अध्यक्ष कैलाश गहलोत और साजिश के पीछे उन सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाया जाना चाहिए और स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। मामले में दर्ज प्राथमिकी में गहलोत को गिरफ्तार किया जाए।
घोटाला को दबाने की हुई कोशिश : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि 1000 लो-फ्लोर की खरीद और एएमसी में 4288 करोड़ के घोटाले की सीबीआई और सीवीसी जांच की मांग की थी। उन्होंने दिल्ली सरकार और भाजपा की ओर से मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया। कहा कि बसों के रखरखाव के मद में करीब 3500 करोड़ रुपये का टेंडर रद्द करने के बजाय दिल्ली सरकार तीन सदस्यीय कमेटी की तरफ से क्लीन चिट का हवाला देते हुए सच्चाई की जीत का दावा कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में सीबीआई सजा दिलवाएगी।
डीटीसी की पुरानी बसों में ही फिलहाल कर सकेंगे सफर
दिल्ली में डीटीसी बसों में सफर करने वालों को नई लो-फ्लोर बसों में सफर करने के लिए कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ेगा। बसों की खरीद मामले में विपक्ष की तरफ से दिल्ली सरकार पर अनियमितता के आरोप लगने के बाद जांच पूरी होने तक खरीद पर रोक लगा दी गई थी। मामले की सीबीआई जांच से खरीद की प्रक्रिया में और देरी होगी। नई बसों के सड़कों पर उतरने तक यात्रियों को पुरानी बसों में ही सफर करना होगा।
करीब 10 साल बाद डीटीसी के बेड़े में नई बसें शामिल की जानी थी। फिलहाल अधिकतर बसें पुरानी हो चुकी हैं, जो अक्सर बीच रास्ते खराब हो जाती हैं और यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बसों की खरीद मामले की सीबीआई जांच की इजाजत मिलने से और देरी होने की आशंका जताई जा रही है। इससे यात्रियों को आवागमन में मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं।