कोरोना वॉरियर: जान की परवाह किए बगैर फर्ज निभा रहे है सफाई कर्मचारी जोगिंदर
मैं पूर्वी नगर निगम के दिलशाद गार्डन समेत कई इलाकों में काम करता हूं। फिलहाल कोरोना वायरस देश में कहर ढहा रखा है। ऐसे में हम भी बाहर निकल कर कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। जान की परवाह किए बगैर मैं अपना फर्ज निभा रहा हूं।
जब भी मुझे सुपरवाइजर व इंस्पेक्टर द्वारा कोरोना के मामले की जानकारी मिलती है तो मैं इसके लिए तैयार हो जाता हूं। हालांकि, उपकरणों की कमी है, लेकिन जितना भी है उतने में ही गुजारा करना पड़ता है। हमें सबसे पहले कोरोना संक्रमित के घर में पहुंचकर सावधानी का अधिक ध्यान रखना पड़ता है।
कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध घर में पहुंचते ही मैं सबसे पहले कूड़े को बाहर ले जाता हूं। इसमें टिश्यू पेपर से लेकर इस्तेमाल किया हुआ एक कागज का टुकड़ा तक नहीं छोड़ना होता है। साथ ही लोगों के गंदे कपड़ों को भी पॉलीथिन में डालकर कूड़े में डालता हूं। इसके बाद पूरे घर में साफ-सफाई की जाती है।
इस बीच खुद की सुरक्षा को लेकर परिवार की चिंता भी होती है, लेकिन ड्यूटी का फर्ज सबसे पहले याद आता है। पूरे घर की सफाई करने के बाद जमा कूड़े को निष्पादन के लिए मैं गाड़ी में डालकर वेस्ट टू एनर्जी प्लांट भेज देता हूं और फिर एक नए कोरोना के मामले में घर की साफ-सफाई के लिए निकल पड़ता हूं।
सबसे अधिक खतरा दिलशाद गार्डन इलाके में रहता है, जहां कोरोना वायरस का पहला मामला मिला था। हालांकि, दिलशाद गार्डन के अलावा सीलमपुर, जाफराबाद, गोकुलपुरी आदि इलाकों में भी साफ-सफाई करते हैं। थक-हारकर शाम को जब घर पहुंचता हूं तो घरवालों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है।
घर में प्रवेश करने से पहले ही सभी कपड़े बाहर उतार कर रख देता हूं और सीधे स्नानघर में जाकर साबुन से अच्छी तरह नहाता हूं। बच्चे पास आने की जिद करते हैं, लेकिन संक्रमण के खतरे से उन्हें अपने पास से दूर रखता हूं। करीब तीन से चार घंटे गुजरने के बाद फिर बच्चों के पास जाता हूं।
-जोगिंदर, सफाई कर्मचारी
हम खुद ही नहीं, लोग भी हमें संक्रमण से बचा रहे हैं
मेरी ड्यूटी नूर-ए-इलाही इलाके में है, जहां कुछ दिन पहले कोरोना संदिग्ध केस सामने आया था। इस मामले से निपटना मेरे लिए चुनौती था। क्योंकि, वहां साफ-सफाई की जिम्मेदारी मेरी ही थी। जब मुझे इस बात की जानकारी मिली तो मैं तुरंत अपनी झाड़ू लेकर साफ-सफाई के लिए पहुंच गया।