जेएनयू: कैंपस में सोमवार रात फिर लगे आजादी के नारे, ढफली पर फांसीवाद से आजादी की मांग

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 07 Dec 2021 10:36 AM IST

सार

जेएनयू में विवादित ढांचा गिराने की बरसी पर प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया।  छात्र संघ उपाध्यक्ष साकेत मून ने कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराना गलत था।
प्रदर्शन करते छात्र
प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 बेशक यूपी में होना है पर उसकी सुगबुगाहट दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस में दिखनी शुरू हो गई है। यूपी चुनाव के चलते दो साल बाद अचानक जेएनयू में भगवान श्रीराम मंदिर का मुद्दा गरम है।
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आइसा ने विश्वविद्यालय प्रशासन की रोक के बाद शनिवार रात को राम नाम डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की। उसके बाद सोमवार आधी रात सद्भावना मार्च निकाला। इसमें जेएनयू छात्रसंघ उपाध्यक्ष साकेत मून ने अयोध्या विवादित ढांचे को दोबारा उसी स्थान पर बनाने की मांग रखी है।


जेएनयू छात्रसंघ और आइसा की ओर से विवादित ढांचे के विध्वंस और बाबा साहब आंबेडकर की पुण्यतिथि पर सोमवार को सद्धावना मार्च की कॉल दी गई थी। यह सद्धाभावना मार्च गंगा ढाबा से चंद्रभागा हॉस्टल तक निकाला जाना था। कार्यक्रम के आयोजन की विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉक्यूमेंट्री की तर्ज पर यहां भी नही दी थी। इसके बाद भी ढफली और पोस्टर के साथ सद्भावना मार्च निकाला गया। इस कार्यक्रम का वीडियो सामने आया है। एक कथित वीडियो में साकेत मून को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने मुआवजे की मांग रखी है।

साकेत ने कहा कि मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह स्वीकार किया जाना चाहिए कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस गलत था और इसका पुनर्निर्माण होना चाहिए। इससे पहले शनिवार रात को जेएनयू छात्रसंघ और आइसा ने राम नाम की डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण किया था।

फांसीवाद और मनुवाद से आजादी की माग

आइसा सदस्यों ने इस दौरान फिर आजादी की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने फांसीवाद, मनुवाद से लेकर कई अन्य मुद्दों पर आजादी की मांग रखी। इस दौरान कुछ छात्रों ने कश्मीर मुद्दा भी उठाया।

बयान पर जेएनयू छात्रसंघ भी दो हिस्सों में बंटा

जेएनयू छात्रसंघ के उपाध्यक्ष साकेत मून के अयोध्या विवादित ढांचा विध्वंस मामले पर दी गई टिप्पणी और बयान से छात्रसंघ दो हिस्सों में बंट गया है। जेएनयू छात्रसंघ के महासचिव सतीशचंद्र यादव ने कहा है कि यह साकेत का विचार होगा। जेएनयू छात्रसंघ ने ऐसी कोई मांग नहीं रखी है।

भगवान श्रीराम मंदिर मामले में कैंपस में जेएनयू छात्रसंघ और आइसा जिस तरह से सांप्रदायिक सौहार्द खराब करने में लगे है, वह गलत है। भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण पर ऐसे सवाल उठाना गलत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगाई है। इसके बाद भी आयोजन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले का सम्मान करते हैं, इसलिए कोई हंगामा नहीं करेंगे।
- शिवम चौरसिया, अध्यक्ष, एबीवीपी जेएनयू इकाई:

वीडियो से छात्रों की पहचान कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी

जेएनयू प्रशासन ने सोमवार आधी रात भगवान श्रीराम मंदिर मामले में आयोजित कार्यक्रम पर बेशक अभी तक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन वीडियो सिक्योरिटी ने एकत्रित कर लिए हैं। इसके माध्यम से आयोजकों से लेकर विवादित टिप्पणियां देने वाले छात्रों की पहचान की जाएगी।

इसके आधार पर डीन ऑफ स्टूडेंट संबंधित स्कूल और सेंटर के अलावा हॉस्टल वार्डन को ऐसे छात्रों के नाम की सूची भेजेगा। इसके आधार पर उन्हें नोटिस जारी होगा। उसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। दरअसल विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार को छात्रों के नाम नोटिस जारी किया था। इसमें साफ लिखा था कि कैंपस में ऐसे किसी भी कार्यक्रम के आयोजन की मंजूरी नहीं दी गई है। क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों से संप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
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