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जेईई मेंस: देशभर के 334 शहरों के 828 परीक्षा केंद्रों में होगी परीक्षा, छात्र इस बात का रखें ध्यान

Wed, 07 Jul 2021 05:06 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 07 Jul 2021 05:06 AM IST
सार

कोविड-19 के चलते जेईई मेंस परीक्षा के लिए नियमों में बदलाव भी किया गया है। छात्रों और परीक्षा केंद्र में तैनात शिक्षकों और कर्मियों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार किया गया है। इसी एसओपी के तहत परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान, परीक्षा खत्म होने पर तीन भागों में बांटा गया है।  

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jee mains exam will be held in 828 exam centers in 334 cities across the country
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना महामारी के संक्रमण से छात्रों के बचाव के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कंप्यूटर आधारित जेईई-मेंस परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों और शहरों की संख्या बढ़ा दी है। पहले फरवरी और मार्च चरण की परीक्षा 232 शहरों में आयोजित की गई थी। इस बार 334 शहरों में आयोजित होगी। जबकि पिछली परीक्षा में  660 परीक्षा केंद्र थे और इस बार इनकी संख्या बढ़ाकर 828 की जा रही है। छात्र अपनी सुविधानुसार दोबारा परीक्षा केंद्र व शहर बदल सकते हैं। चारों चरणों की परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले अंकों के आधार पर जेईई मेंस 2021 की मेरिट बनेगी।

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक विनीत जोशी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव की पूरी तैयारी के तहत परीक्षा आयोजित होगी। मैं छात्रों और अभिभावकों को यह सुनिश्चित करवाना चाहता हूं कि पिछली परीक्षाओं से भी बेहतर इंतजाम होंगे। परीक्षा केंद्र में किसी प्रकार की दिक्कत उन्हें नहीं होगी। सामाजिक दूरी और कोविड-19 के लिए सरकार के सभी दिशा-निर्देशों का पूरा पालन किया जाएगा। अप्रैल की स्थगित परीक्षा के लिए 6.80 लाख और मई की स्थगित परीक्षा के लिए 6.09 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था।
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परीक्षा पूरी तरह टच फ्री रहेगी
कोविड-19 के चलते जेईई मेंस परीक्षा के लिए नियमों में बदलाव भी किया गया है। छात्रों और परीक्षा केंद्र में तैनात शिक्षकों और कर्मियों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार किया गया है। इसी एसओपी के तहत परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान, परीक्षा खत्म होने पर तीन भागों में बांटा गया है।  
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संक्रमण से छात्रों को बचाने के लिए परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित रखने के चलते टच फ्री रहेगी। छात्रों को अलग-अलग टाइम स्लॉट के आधार पर परीक्षा केंद्र में आना होगा। इसकी जानकारी उन्हें मिल जाएगी। छात्र को रजिस्ट्रेशन रूम में जाना होगा, यहां उसके शरीर का तापमान (99.4 डिग्री होना चाहिए) जांचा जाएगा। यहां एक छात्र के निकलने के बाद दूसरे को अंदर बुलाया जाएगा। इसके अलावा अन्य दस्तावेज की जांच होगी। इसमें उसे अपना एडमिट कार्ड, सरकारी फोटो पहचान पत्र दिखाना पड़ेगा।  

इस पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट का समय लगेगा। इस दौरान छात्र के किसी भी दस्तावेज को छुआ नहीं जाएगा। इसके बाद दोबारा छात्र का तापमान जांचा जाएगा। परीक्षा केंद्र में एनटीए के स्वयंसेवक भी तैनात रहेंगे। वे छात्रों को मदद करेंगे। परीक्षा केंद्र में आने वाले शिक्षकों और कर्मियों की भी शरीर के तापमान की नियमित जांच जरूरी होगी। अंगूठे के निशान की बजाय छात्र का मिलान, लिखावट और हस्ताक्षर से होगा। सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए अलग-अलग ग्रुप में छात्रों को क्लासरूम में लाया जाएगा। परीक्षा केंद्र में तैनात सभी कर्मियों और छात्रों को दस्ताने पहनने अनिवार्य होंगे। क्लासरूम में हैंड सेनेटाइजर भी रखे जाएंगे।
 

छात्र इनका रखें ध्यान

- मुंह पर मॉस्क और हाथों में दस्ताने पहनने होंगे।
-पारदर्शी पीने के पानी की बोतल ला सकेंगे।
-50 एमएल का निजी हैंड सेनेटाइजर लाने की अनुमति होगी। हालांकि उसकी बोतल पारदर्शी होनी चाहिए।
- नकल रोकने के लिए मेटल डिटेक्टर से छात्रों की जांच होगी। इसलिए वे किसी भी प्रकार की धातू आदि से बने प्रोडेक्ट को अपने साथ न लाएं। मेटल डिटेक्टर दूर से जांच करेगा, इस दौरान छात्र के सीधे संपर्क में कोई नहीं होगा।
-परीक्षा से संबंधित दस्तावेज एडमिट कार्ड, सरकारी फोटो पहचान पत्र आदि।
- शौचायल जाने से पहले उन्हें अनुमति लेनी जरूरी होगी।
- परीक्षा केंद्र की दीवारों, टेबल-कुर्सी, कंप्यूटर, पंखों को परीक्षा शुरू होने से पहले भी सेनेटाइज किया जाएगा। कॉरिडोर में रूम नंबर बड़े अक्षरों में लिखे होंगे, ताकि छात्र को तलाशने में परेशानी न हो।
-परीक्षा केंद्र में ब्लूटूथ, वाई-फाई की जांच होगी। इसके बाद एनटीए जैमर का प्रयोग करेगा।
-सीटिंग प्लान में एक कंप्यूटर के बाद दूसरा कंप्यूटर खाली रहेगा। इसमें सुबह की शिफ्ट में जिस कंप्यूटर पर छात्र बैठा होगा, उसमें दो दिन के बाद दोबारा कोई अन्य छात्र बैठेगा। इसका मकसद उसे सेनेटाइज करने के साथ 24 घंटे से अधिक खाली रखना है। इसके अलावा दो शिफ्ट में दो घंटे के अंतराल की बजाय अब तीन घंटे का अंतर होगा।
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