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चौ. अजित सिंह के प्रयास से ही ओबीसी में शामिल हुए थे दिल्ली के जाट

Fri, 07 May 2021 07:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 07 May 2021 07:00 AM IST
सार

  • दिल्ली जाटों को ओबीसी में शामिल करने वाला देश का पहला राज्य बना था
  • चौ. अजित सिंह से बहुत अधिक प्यार करते थे दिल्ली के ग्रामीण

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Jats of Delhi joined OBC only due to Ajit Singh efforts
अपने पिता व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ चौ. अजित सिंह... - फोटो : amar ujala

विस्तार

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. अजित सिंह की किसान नेता के तौर पर छवि रही, लेकिन दिल्ली के ग्रामीणों की उन्होंने कृषि के मामले में नहीं, बल्कि उनको विभिन्न मामलों में अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयास से ही वर्ष 1999 में दिल्ली के जाट ओबीसी में शामिल हुए थे और दिल्ली जाटों को ओबीसी में शामिल करने वाला देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा वे वर्ष 1997 में दिल्ली किराया कानून लागू कराने के ग्रामीणों के आंदोलन में शामिल होने के लिए कई बार जंतर मंतर पर गए थे।

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वर्ष 1999 में लोकसभा चुनाव परिणाम आने के कुछ दिन बाद रिटायर्ड जस्टिस गुमान मल लोढा आयोग ने दिल्ली अन्य पिछड़ा वर्ग की रिपोर्ट दिल्ली सरकार को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में उन्होंने जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की सिफारिश की थी। उनके रिपोर्ट सौंपने के अगले दिन दिल्ली के जाट समुदाय के करीब दो हजार लोगों को लेकर चौ. अजित ?सिंह ने पुराना सचिवालय में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात की। इस दौरान शीला दीक्षित ने उनको जल्द ही रिपोर्ट लागू करने का आश्वासन दिया। 
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इतना ही नहीं, शीला दीक्षित ने अगले दिन लोढ़ा आयोग की रिपोर्ट लागू करते हुए जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने का ऐलान कर दिया। दिल्ली से पहले जाट किसी भी राज्य में ओबीसी में शामिल नहीं थे। इससे कुछ दिन पहले अटलबिहारी वाजपेयी सरकार ने केवल राजस्थान (भरतपुर एवं धौलपुर जिले को छोड़कर) के जाटों को केंद्रीय स्तर पर ओबीसी में शामिल किया था। इस तरह चौ. अजित सिंह के प्रयास से दिल्ली के जाट राज्य ओबीसी में शा?मिल हुए थे।
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दिल्ली के ग्रामीण चौ. अजित सिंह से बहुत अधिक प्यार करते थे
नई दिल्ली। चौ. अजित सिंह के समय उनके समर्थक को वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव छोड़कर दिल्ली में कभी चुनावी दंगल में बाजी नहीं मार पाए, लेकिन दिल्ली के ग्रामीण उनको किसानों के मसीहा एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह का पुत्र होने के कारण बहुत अधिक प्यार करते थे। वे दिल्ली के किसी गांव में अपने समर्थक के यहां निजी कार्यक्त्रस्म आते थे तो आसपास के गांवों के लोग उनकी एक झलक पाने के लिए वहां पहुंच जाते थे। ऐसा ही नजारा वर्ष 1998 में गांव मदनपुर डबास में देखने को मिला था। इस गांव में वह अपने समर्थक की शादी में आए थे। इस दौरान आसपास के गांवों के वे लोग भी वहां पहुंच गए जिनका शादी में न्यौता नहीं था।

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