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Delhi News: निर्माण और विध्वंसक सामग्री से उत्पाद बनाना होगा अनिवार्य
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शहरी विकास विभाग की बैठक में लिया गया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में निर्माण और विध्वंसक सामग्री (मलबा) के उपयोग से नए उत्पाद बनाना अनिवार्य किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने ये निर्णय लिया है। शुक्रवार को शहरी विकास विभाग, जल बोर्ड, डीएसआईआईडीसी, डीटीटीडीसी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, डीडीए, डीपीसीसी, एमसीडी, डिस्कॉम, डीएमआरसी और एनसीआरटीसी के अधिकारियों की बैठक में इसके लक्ष्य भी तय किए गए।
शहरी विकास विभाग मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने निर्माण व ध्वस्तीकरण सामग्री के प्रबंधन नियम 2016 को अधिसूचित किया है। इस नियम के मुताबिक सभी स्थानीय निकाय व सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियाें को अपने निर्माण कार्यों में पुनर्चक्रित सीएंडडी सामग्री के उत्पादों का उपयोग करना अनिवार्य है। शहरी विकास मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने साल 2025-26 के लिए दिल्ली की विभिन्न एजेंसियों के लिए पुनः निर्मित सीएंडडी सामग्री के उत्पादों के उपयोग का वार्षिक लक्ष्य 9.85 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया है लेकिन वर्तमान में केवल 52,000 एमटी सामग्री का ही उपयोग किया जा रहा है। मंत्री ने विभिन्न एजेंसियों के साथ लक्ष्य को पूरा करने में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की।
दिल्ली की एजेंसियों को मिला लक्ष्य
नगर निगम दिल्ली - 2,00,000 मीट्रिक टन
डीएसआईआईडीसी - 1,00,000 मीट्रिक टन
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग - 2,00,000 मीट्रिक टन
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद - 10,000 मीट्रिक टन
लोक निर्माण विभाग - 1,00,000 मीट्रिक टन
दिल्ली जल बोर्ड - 25,000 मीट्रिक टन
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड - 5,000 मीट्रिक टन
दिल्ली परिवहन निगम - 10,000 मीट्रिक टन
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
हरेक तीन महीने में प्रगति की नियमित समीक्षा होगी
सभी निर्माण एजेंसियों को सड़क सब बेस, पेवमेंट ब्लॉक, टाइल्स, नाली के ढक्कन, बेंच और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग करना है। मंत्री ने कहा कि सभी निर्माण कार्यों में सीएंडडी सामग्री का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निर्धारित वार्षिक लक्ष्यों का पालन न करने की स्थिति में संबंधित एजेंसी का भुगतान रोका जा सकता है। इसकी हरेक तीन महीने में प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। सभी विभागों की जवाबदेही तय होगी। सभी सीएंडडी सामग्री संग्रह स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और ढकाव बनाना अनिवार्य है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में निर्माण और विध्वंसक सामग्री (मलबा) के उपयोग से नए उत्पाद बनाना अनिवार्य किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने ये निर्णय लिया है। शुक्रवार को शहरी विकास विभाग, जल बोर्ड, डीएसआईआईडीसी, डीटीटीडीसी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, डीडीए, डीपीसीसी, एमसीडी, डिस्कॉम, डीएमआरसी और एनसीआरटीसी के अधिकारियों की बैठक में इसके लक्ष्य भी तय किए गए।
शहरी विकास विभाग मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने निर्माण व ध्वस्तीकरण सामग्री के प्रबंधन नियम 2016 को अधिसूचित किया है। इस नियम के मुताबिक सभी स्थानीय निकाय व सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियाें को अपने निर्माण कार्यों में पुनर्चक्रित सीएंडडी सामग्री के उत्पादों का उपयोग करना अनिवार्य है। शहरी विकास मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने साल 2025-26 के लिए दिल्ली की विभिन्न एजेंसियों के लिए पुनः निर्मित सीएंडडी सामग्री के उत्पादों के उपयोग का वार्षिक लक्ष्य 9.85 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया है लेकिन वर्तमान में केवल 52,000 एमटी सामग्री का ही उपयोग किया जा रहा है। मंत्री ने विभिन्न एजेंसियों के साथ लक्ष्य को पूरा करने में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की।
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दिल्ली की एजेंसियों को मिला लक्ष्य
नगर निगम दिल्ली - 2,00,000 मीट्रिक टन
डीएसआईआईडीसी - 1,00,000 मीट्रिक टन
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग - 2,00,000 मीट्रिक टन
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद - 10,000 मीट्रिक टन
लोक निर्माण विभाग - 1,00,000 मीट्रिक टन
दिल्ली जल बोर्ड - 25,000 मीट्रिक टन
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड - 5,000 मीट्रिक टन
दिल्ली परिवहन निगम - 10,000 मीट्रिक टन
टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड - 5,000 मीट्रिक टन
हरेक तीन महीने में प्रगति की नियमित समीक्षा होगी
सभी निर्माण एजेंसियों को सड़क सब बेस, पेवमेंट ब्लॉक, टाइल्स, नाली के ढक्कन, बेंच और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग करना है। मंत्री ने कहा कि सभी निर्माण कार्यों में सीएंडडी सामग्री का अनिवार्य रूप से उपयोग किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निर्धारित वार्षिक लक्ष्यों का पालन न करने की स्थिति में संबंधित एजेंसी का भुगतान रोका जा सकता है। इसकी हरेक तीन महीने में प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। सभी विभागों की जवाबदेही तय होगी। सभी सीएंडडी सामग्री संग्रह स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग और ढकाव बनाना अनिवार्य है।
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